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स्वतंत्र पत्रकार। नया इंडिया में नियमित कन्ट्रिब्यटर। नवभारत टाइम्स में संवाददाता, विशेष संवाददाता का सन् 1980 से 2006 का लंबा अनुभव। पांच वर्ष सीबीएफसी-सदस्य। प्रिंट और ब्रॉडकास्ट में विविध अनुभव और फिलहाल संपादक, न्यूज व्यूज इंडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता। नया इंडिया के नियमित लेखक।
  • कारकूनों के कुचक्र में कसमसाती कांग्रेस

    हुआ यह कि पांच चरणों के इस युग में कांग्रेस का ढोल बजा तो खूब, लेकिन तरह-तरह की व्यक्तिगत कार्यावलियों को अपनी चोर-जेब में छिपाए बहुत दिनों से ताक में बैठे कारकून इस ढोल की पोल में घुस गए।.. 139 बरस पुरानी पार्टी का सारा क्रियान्वयन-तंत्र सियासी सहभागियों के बजाय कारिंदों के सुपुर्द हो गया। कांग्रेस की मुसीबत की आज यही असली जड़ है।.. यह जाने वालों के मीन-मेख निकालने का नहीं, आत्म-निरीक्षण का समय है। देर से ही सही, कभी तो अंतर्दर्शन भी हो। जब जागो, तब सवेरा। जागो तो सही। और, फिर जागते रहो! यह अलग बात है कि...

  • दर-दर दस्तक का गूढ़ार्थ

    पंजाब में शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा से समझौता करने से इनकार ऐसे ही नहीं किया है। ओडिशा में भी नवीन पटनायक भाजपा से अपना दामन बांधने से ऐसे ही नहीं कतराए हैं। समझ लीजिए कि ये सारे संकेत क्या कह रहे हैं? ....राजनीतिक रजतपट पर दस साल से चल रहे दृश्यों ने मतदाताओं के मन में बदलाव की एक परत बहुत गहरे बसा दी है। इसलिए इतनी बड़ी शक़्ल-बदलू कार्रवाई के बावजूद 272 के स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा भी छू पाना भाजपा के लिए दूर के ‘चंदा’मामा साबित होती दिख रही है। lok sabha election 2024 पिछले एक महीने...

  • एक स्वयंसेवक के बेनूरीपन की फ़िक्र

    घूमते-फिरते रहते हुए स्वयंसेवक बने रहना आसान है। प्रधानमंत्री-भाव का बोध अपने में भरना बहुत मुश्क़िल है।… सारे मंत्रालयों की सारी परियोजनाओं का शिलान्यास-उद्घाटन किसी और मंत्री को नहीं करने देने, बात-बात पर ‘एक अकेला, सब पर भारी’ का स्वयं ही उद्घोष करते रहने और ‘मोदी की गारंटी का मतलब है गारंटी की गारंटी’ का ख़ुद ही अनवरत आलाप लगाते रहने की नरेंद्र भाई की ताबड़तोड़ मशक्क़त देख कर देशवासियों में यह धारणा ठोस आकार लेती जा रही है कि इस बार स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा भाजपा की मुट्ठी से तेज़ी से फिसल रहा है। Lok Sabha election 2024 अपने...

  • प्रश्नों की उमड़-घुमड़ का अंतर्व्यूह

    पिछले हफ़्ते मैंने टीवी बहसों में भाजपा के हर प्रवक्ता से पूछा कि 12 लाख मतदान केंद्रों में से हर एक पर 370 अतिरिक्त वोट का मतलब क्या होता है, इसका हिसाब जानते है?  क़रीब 44 करोड़ अतिरिक्त वोट। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कुल मिला कर तक़रीबन 23 करोड़ वोट मिले थे।  उन में 44 करोड़ अतिरिक्त वोट जुड़ने का मतलब है कि 2024 में भाजपा के 67 करोड़ वोट। इसका अर्थ है कुल मतदान के 70 फ़ीसदी वोट भाजपा पाए। पिछले चुनाव में भाजपा को 37.7 प्रतिशत वोट मिले थे। तो क्या 2024 में उस के...

  • ‘आएगा तो मोदी ही, आएगा तो मोदी ही’

    मुझे नहीं मालूम कि नरेंद्र भाई ही आएंगे या नहीं। लेकिन मुझे इतना मालूम है कि अगर वे आएंगे तो हमारे देश का, हमारे समाज का, क्या-क्या जाएगा और अगर वे जाएंगे तो क्या-क्या आएगा। भाजपा का आना अलग बात है। नरेंद्र भाई का आना अलग बात। नरेंद्र भाई के आने को भाजपा का आना समझने वाले मासूम हैं। भाजपा तो अब तब आएगी, जब नरेंद्र भाई जाएंगे। जो यह समझ लेंगे, देश पर उपकार करेंगे। pm narendra Modi ‘आएगा तो मोदी ही, आएगा तो मोदी ही’ की रट जैसे-जैसे नरेंद्र भाई मोदी (pm narendra Modi) ख़ुद ही ज़ोर-ज़ोर से...

  • नरेंद्र भाई की फ़िक्र में घुलता मैं

    मैं अपने माथे पर हाथ रखे कई दिनों से इस फ़िक्र में घुला जा रहा हूं कि अगर नरेंद्र भाई को 2019 में जीती सारी सीटें दोबारा मिल भी जाएं तो अपने 370 का आंकड़ा पूरा करने के लिए 67 अतिरिक्त सीटों का जुगाड़ वे करेंगे कैसे? अपनी तिलस्मी टोपी से 67 अतिरिक्त खरगोश प्रकट करने के लिए अब और कौन-सी दिहाड़ी बाकी है, जो उन्होंने अब तक नहीं की है? नरेंद्र भाई मोदी ने ऐलान कर दिया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 370 सीटें मिलेंगी और एनडीए 400 पार करेगा। कितना पार, यह...

  • दादी-पिता से ज़्यादा नसीब वाले हैं राहुल

    44 और 52 सीटों वाले राहुल को कांग्रेस के भीतर मिल रहे अपार स्नेह का बीजगणित क्या है? क्या वे कांग्रेसजन के लिए अपनी दादी और पिता से भी बड़े आस्था-केंद्र हैं? क्या आज के मोशा-दौर में वे जिस शुचिता-मूलक सियासत की स्थापना के रास्ते पर चल रहे हैं, वह कांग्रेसजन के लिए विश्वास-धुरी है? क्या कांग्रेस के कायाकल्प और पुनरुत्थान को ले कर राहुल की क्षमता पर कांग्रेसजन का अविचलित यक़ीन इस की बुनियाद में है? मैं राहुल गांधी को भाग्यशाली मानता हूं कि उन्हें एक ऐसी कांग्रेस मिली हुई है, जो दस साल में दो-फाड़ नहीं हुई। राहुल...

  • विपक्ष के आकुल लपोरीलालों की ना-लायकी

    विपक्षी दलों को एकमंचीय करने और उन्हें एकाकार बनाए रखने की प्रक्रिया अगर सोनिया की सीधी रहनुमाई में चली होती तो इंडिया-समूह के राजनीतिक दलों की संख्या 28 से कहीं ज़्यादा होती। मैं अपनी प्रामाणिक निजी जानकारी के आधार पर कह रहा हूं कि ठोस सियासी जनाधार रखने वाले कई राजनीतिक दल अभी भी ऐसे हैं, जो न इधर हैं, न उधर और जिन्हें मलाल है कि इंडिया-समूह की तरफ़ से उन से क़ायदे के किसी व्यक्ति ने संपर्क ही नहीं किया। नरेंद्र भाई मोदी हम पर राज करने के कितने लायक हैं, कितने नहीं, इस पर तो बात तब...

  • तालठोकू फ़रमान और कांग्रेस का इनकार

    हालांकि बहुतों को लगता है, मगर मुझे नहीं लगता कि 22 को अयोध्या पहुंचने के फ़रमान को सरयू में तिरोहित कर देने के कांग्रेसी निर्णय से उसे कोई चुनावी नुक़्सान होगा। उलटे इस से भारतीय जनता पार्टी समेत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तमाम सहयोगी संगठनों की नीयत पर प्रश्नचिह्न लग गया है।…मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ईसा से 5114 साल पहले जनवरी महीने की दस तारीख़ को जन्मे थे। तब चैत्र महीने का शुक्ल पक्ष था। इस दिन हम हर साल रामनवमी मनाते हैं। इस वर्ष रामनवमी 18 अप्रैल को है।….इसलिए सोनिया गांधी इस रामनवमी पर रामलला के दर्शन करने...

  • फुगावों की मादकता से मुक्ति का समय

    यह सुखद है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व उत्साहीलालों की टोली की इस बिगुलबाज़ी की पूरी तरह अनदेखी कर रहा है और पूरी संजीदगी से सीट बंटवारे की प्रक्रिया को तजु़र्बेकार लोगों की देखरेख में पूरी करा रहा है। कांग्रेस के भीतर अपनी तिकड़मों की बिसात बिछाते घूमते रहने वाले गिरोह ने यह राग अलापना भी शुरू किया था कि इंडिया-समूह के कुछ राजनीतिक दल ऐन वक़्त पर पलट जाएंगे, इसलिए कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ने की तैयारियां रखनी चाहिए। सिर्फ़ इच्छाधारी होने भर से अगर इच्छाएं पूरी होने लगतीं तो फिर बात ही क्या थी? फिर इच्छाएं अगर आसमानी...

  • इंडिया-समूह के अंकगणित का बीजगणित

    28 दलों के राजनीतिक गठजोड़ ‘इंडिया-समूह’ का बदन ऊपर से देखने में तो इतना गठीला दिखाई देता है कि परसों से शुरू हो रहे साल की गर्मियां आरंभ होते-होते नरेंद्र भाई मोदी का पसीना छुड़ा दे। लेकिन इस तन के भीतर मन ज़रा जर्जर लग रहे हैं। सो, अभी तो सब-कुछ राम भरोसे नज़र आ रहा है। ज़रा सोचिए तो कि इंडिया-समूह के 28 राजनीतिक दलों में से 12 का लोकसभा में एक भी सदस्य नहीं है, मगर फिर भी निचले सदन में उसके पास 142 सांसद हैं। 98 सदस्य राज्यसभा में अलग हैं। देश भर में 1637 विधायक उस...

  • संसद परिसर में उड़ती खिल्ली के भोंडे आयाम

    संसद की सीढ़ियों पर जगदीप धनखड़ जी की देहभाषा, सदन में कार्यवाही को संचालित करने की शैली और सोच-प्रक्रिया का स्वांग-मंचन देखने के बाद से मेरा दिमाग़ चकरघिन्नी बन गया है। इसलिए नहीं कि तृण-तृण के मूल-मूल में रमे राजनीतिक दल के एक सांसद कल्याण बनर्जी अपनी अभिनय कला का प्रदर्शन करने को ऐसे उतावले हो गए कि उन से रहा नहीं गया या ऐतिहासिक तादाद में विपक्षी सांसदों को निलंबित कर देने की सत्तासीन हंटरबाज़ी ने हम सभी की तरह उन्हें भी इतना उद्वेलित कर दिया कि वे आपा खो कर यह सब कर बैठे। इसलिए भी नहीं कि...

  • इतिहास के निष्ठुर पन्ने और अभागे राहुल

    अगर राहुल यह लक्ष्य आभासी-संसार में विचर रहे भोंदू-भोंपुओं, आंकड़ों की बाजीगरी कर रहे भाड़े के महंगे टट्टुओं और काग़ज़ी कारकूनी के अखिल भारतीय करतब में मशगूल बांसुरी वादकों के भरोसे करना चाहते हैं तो प्रभु उन की रक्षा करें! इसलिए कि उन की राजनीतिक रक्षा में आगे की पूरी पीढ़ी के सियासी मुस्तकबिल के प्राण बसे हैं। पिछले दो दशक की प्रयोगधर्मिता ने कांग्रेस की एक पूरी पीढ़ी को बदहाली के इस कगार पर पहुंचा दिया है। कांग्रेस को आगामिक फटेहाली से महफ़ूज़ रखने के लिए सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को थोड़ा बेरहम होना पड़ेगा। पांच...

  • फुद्दू प्रजा का ओजस्वी राजा

    मैं तो नरेंद्र भाई का मुरीद हूं कि दस साल में उन्होंने हमें कभी होश में नहीं आने दिया। वे जानते थे कि उन के दिए दर्द ऐसे हैं कि होश-हवास में कोई उन्हें बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। इसलिए बेसुध बनाए रखने के लिए वे एकदम सही अंतराल पर अपनी दवा की पुड़िया हमें देते रहे।…एक गीत था - ‘खाली से मत नफ़रत करना, खाली सब संसार’।…अपने स्कूली दिनों में सुना यह गाना मुझे इसलिए याद आया कि हम ने पिछला एक दशक इसी गारंटी के भरोसे बिताया है - खाली की गारंटी। प्रजा के लिए सिर्फ़ यही एक गारंटी...

  • ख़ुदसाख़्ता ‘हिंदू हृदय सम्राट’ नरेंद्र भाई

    तमाम दुस्साध्य कोशिशों के भी हिंदू आबादी का 60-65 प्रतिशत हिस्सा नरेंद्र भाई की असहमति में मुट्ठियां ताने खड़ा है तो वे काहे के एकछत्र ‘हिंदू हृदय सम्राट’? सोचिए, वे कौन-से हिंदू हैं, जिनके दिल में नरेंद्र भाई बसे हैं - सनातनी संस्कारों वाले करुणामयी, दयामयी, उदारमना हिंदू या सनातनी लताओं में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगा-लगा कर तैयार की गई महाकाय हिंदुत्व-सोच के अनुगामी हिंदू? सच बताइए, आप कैसा हिंदू होने पर गर्व करेंगे? हमारे नरेंद्र भाई मोदी को उनके चाहने वाले ‘हिंदू हृदय सम्राट’ कहते हैं। मुझे नहीं मालूम कि उनके पहले यह ख़िताब भारतीय जनता पार्टी के पूर्वज -...

  • राहुल की बनाई राह पर रपटते नरेंद्र भाई

    140 करोड़ ‘परिवारजन’ अब अपनी आंखें मसलने लगे हैं। यह देश की सियासत में हुए राहुल-प्रियंका के सकारात्मक हस्तक्षेप और निर्भीक उपस्थिति का नतीजा है। यह राहुल की निडर तालठोकू मुद्रा का परिणाम है कि पिछले कुछ महीनों में भारत के नक्शे का राजनीतिक व्याकरण दिन दूना-रात चौगुना बदला है। ....कांग्रेस के पैदल सैनिक तो सौ टंच खरे हैं, लेकिन राहुल-प्रियंका को घेरे खड़े हर सौ सिपहसालारों में से नब्बे फ़र्ज़ी हैं। मुझे तो बहुत बार ताज्जुब होता है कि ऐसे वरुधाधिपतियों के होते हुए कैसे ये दोनों सही-सलामत यहां तक पहुंच गए? एक बात तो साफ होती जा रही...

  • कारोबारी संसार की घनचक्करी भूलभुलैया

    मसला है कथित तौर पर पैसे ले कर लोकसभा में सवाल पूछने का। आरोप है कि महुआ ने उद्योगपति गौतम अडानी के कामकाज से संबंधित बहुत-से सवाल संसद में पूछे। ...इसलिए महुआ मोइत्रा कितनी ही पाक-दामन हों, उन पर लगे छींटे हंगामा मचा रहे हैं।... उन्हें तो अग्निपरीक्षा दे कर ही ख़ुद को पवित्र साबित करना होगा। इस समूचे प्रसंग में हमारे-आपके लिए सबसे बड़े सुकून की बात यह है कि महुआ तो कैसे गंगा नहाएंगी, वे जानें, मगर इस पृथ्वी पर कोई भी अग्निकुंड ऐसा नहीं है, जिस से गुज़र कर अडानी अपने को निर्दोष साबित कर पाएं। इस...

  • गाज़ा पट्टी के पेच-ओ-ख़म और गंगा आरती

    इज़राइल के प्रधानमंत्री बैंजामिन नैतन्याहू चूंकि घोर दक्षिपंथी हैं और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई के वे बड़े नज़दीकी मित्र माने जाते हैं, सो, हिंदुत्ववादी कर्तव्यबद्ध हैं कि इज़राइल के समर्थन में गंगा आरती करें।...हमासी-वहशीपन और फ़लस्तीनी-सरोकार के घालमेल की साज़िशों में मत फंसिए। इसलिए कि आज के भेड़िया धसान दौर में कोई आपको यह नहीं बताएगा कि पिछले शनिवार को शुरू हुए दुर्भाग्यपूर्ण युद्ध से पहले फ़लस्तीन और इज़राइल के बीच 26 बार बड़े युद्धनुमा संघर्ष हो चुके हैं। यह 27वां है। कौन आपको यह बताएगा कि इनमें कितनी बार किस की पहलक़दमी रही? मैं ने नरेंद्र भाई मोदी के...

  • मुद्रा-इतिहास के अश्वेत पन्ने का अंतिम संस्कार

    सच्चे बदलाव उन्नीस-बीस का फ़र्क़ वाले लोग नहीं लाया करते। वह तब आता है, जब सचमुच ख़ालिस दूध से धुला कोई नायक सड़ांध मारते खलनायक को ललकारता है। लोग बुरे में ‘कम बुरे’ को चुनने के चक्कर में नहीं पड़ते हैं। जब ऐसा मौक़ा आता है तो वे उन्हें फ़ायदा पहुंचाने वाले ‘ज़्यादा बुरे’ के तंबू में पनाह ले लेते हैं। यही हो रहा है। ईश्वर न करे कि यही होता रहे! दूध का धुला कोई नहीं है। आज की दुनिया में जब दूध ही दूध का धुला नहीं है तो मैं-आप कहां से दूध के धुले हों जाएंगे? सो,...

  • कमलनाथ, गहलोत, भूपेश के 23 पर टिका 24

    विधानसभा चुनावों में जा रहे पांच राज्यों में लोकसभा की 83 सीटें हैं। भाजपा के पास इनमें से 65 हैं। कांग्रेस के पास महज़ 6 हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की 65 लोकसभा सीटों में से क्या इस बार कांग्रेस को पिछली बार की तरह सिर्फ़ तीन ही मिलने जैसे हालात आपको लग रहे हैं? क्या भाजपा पहले की तरह इनमें से 61 सीटें अपनी गठरी में बांध कर छूमंतर हो जाने का करिश्मा 2024 में दिखाती लगती है? इस साल जब सर्दियों का गुलाबीपन शुरू हो रहा होगा तो पांच राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के कमल की सुर्ख़ी...

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