लुच्चा-मुक्त, टुच्चा-मुक्त सियासत के लिए

यह तो ज़माने से कहा जाता रहा है कि लफ़ंगों का अंतिम आश्रय-स्थल राजनीति है। मगर…

कमलनाथ, शिवराज और कार्तिक का कृष्ण पक्ष

सेंधमारी के ज़रिए मध्यप्रदेश में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार को ख़ुद के बूते बने…

भूपेश बघेल की सियासत का पठोनी-गान

भूपेश बघेल ने दिल्ली और रायपुर में अपनी सियासी चौपड़ इस तरह बिछा ली है कि…

सियासत की हाट-व्यवस्था और राहुल गांधी

राजस्थान बाल-बाल नहीं, बड़ी मुश्क़िलों से बचा। मध्यप्रदेश ख़ुमारी में जाता रहा। पंजाब चंद नौकरशाहों के…

सरकारी बंगला और पत्रकारिता की कपिला गाय

मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक अख़बार के…

अमूर्त-विपक्ष की रामनवमी का सोहर-गीत

मानेंगे नहीं, मगर सच्चाई यही है कि नरेंद्र भाई मोदी अपने बनाए मकड़जाल में गले-गले तक…

सहचर-पूंजीवाद का मोर-पंखी मीडिया

मोर-पंखी मीडिया को अपने पांवों की तरफ़ संजीदगी से देखने का अगर यह भी वक़्त नहीं…

शीर्षक-प्रबंधन की खोह का पतनाला

पिछले सवा छह साल से प्रचार-माध्यमों के शीर्षक-प्रबंधन में दिन-रात लगी रहने वाली नरेंद्र भाई मोदी…

74वें वर्ष में एकालाप की अप्रासंगिकता

आज अंग्रेज़ों की हुक़ूमत से आज़ाद हुए तो हमें 73 साल पूरे हो गए, मगर हुक़्मरानों…

जीत कौन रहा है? हार कौन रहा है?

क्या इस बात से आप को कोई फ़िक्र नहीं हो रही है कि इस बुधवार को…

दुरात्माओं से मुक्ति के हवन का समय

आपके या मेरे मानने-न-मानने से कुछ नहीं होता, कांग्रेस के भीतरी हालात ही ऐसे हैं कि…

न विपक्ष मरघिल्ला है, न हुक़्मरान अविजित

अभी चार साल हैं, मगर 2024 के भारतीय सियासी परदे के पीछे का दृश्य विपक्ष के…

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