सिख बलिदानियों में प्रथम,क गुरु अर्जुनदेव

गुरुग्रन्थ साहिब का सम्पादन करने वाले गुरु अर्जुनदेव को सर्वधर्म समभाव के साथ अपने आत्म बलिदान के लिए जाना जाता है

जल ही जीवन का तत्व और अमृत

मानव शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, अन्तरिक्ष तथा वायु इन पंचतत्वों से निर्मित है। इन पंचतत्वों में से एक के भी दूषित हो जाने पर उसका दुष्प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है।

डेल्टाक्रोन: पहले से उलट लक्षण

भले ही कोरोना का नया वैरियेंट पहले से कम घातक हो लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिये, खासकर उन लोगों को जो ब्लड प्रेशर, शुगर या अस्थमा जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं।

New Initiatives : अब पैरेंट्स कर सकेंगे बच्चों के सोशल मीडिया के लती बनने पर कंपनियों पर केस…

सोशल मीडिया कंपनियों को उन बच्चों को नुकसान पहुंचाने के लिए जल्द ही जिम्मेदार ठहरा सकेंगे, जो उनके उत्पादों के आदी हो गए हैं…

स्तन कैंसर का खतरा

उन महिलाओं में स्तन कैंसर (स्तन कैंसर) का रिस्क अधिक होता है जिनकी स्तन हैवी हो। इसका इलाज कीमोथेरेपी के साथ सर्जरी से स्तन रिमूव करके होता है।

सत और असत

व्यावहारिक जगत में लौकिक रूप अर्थात लौकिक भाव में सत् (सत) का अर्थ लिया जाता है अच्छा, सज्जन। आध्यात्मिक अर्थ है अपरिणामी, जिसमें कोई परिवर्तन नहीं होता।

पूर्ण वैचारिक स्वतंत्रता के पक्षधर गौतम बुद्ध

भगवान गौतम बुद्ध संसार के धर्म प्रचारकों में एक दैदीप्यमान प्रकाश स्तम्भ की भांति आकाश में अपना दिव्य प्रकाश ढाई हजार वर्षों से संसार में बिखेर रहे हैं।

दिल का वॉल्व बदलना कब जरूरी?

देश में प्रतिवर्ष हार्ट वॉल्व विकार के करीब 50 लाख मामले सामने आते हैं लेकिन सर्जरी की जरूरत 5 प्रतिशत में ही होती है।

व्यक्ति, समाज और जगत का एक सिद्धान्त

ब्रह्माण्ड को ब्रह्म का शरीर माना गया है। ब्रह्माण्ड के भी सब पदार्थ, शरीर की भान्ति प्रति क्षण क्षरित हो रहे हैं। जगत्यां जगत अर्थात गत्तिशील जगत शरीर है।

शत्रु नाश हेतु बगलामुखी उपासना

वाद- विवाद और युद्ध में विजय की प्राप्ति, शत्रुओं के नाश, वाक सिद्धि के उद्देश्य से भगवती बगलामुखी की उपासना किये जाने की पौराणिक परिपाटी है।

कर्म करने में स्वतंत्र है मनुष्य

मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है, परन्तु मनुष्य से इतर जीव-जन्तु कर्म करने में स्वतंत्र नहीं हैं।

सनातन धर्म के उद्धारक आदि शंकराचार्य

प्राचीनकालीन देवी पूजा से जुड़ी शाक्त संप्रदाय पांच मकारों अर्थात मत्स्य, मांस, मद्य, मुद्रा (नृत्य) और मैथुन में विश्वास करता था।

परशुरामः युग परिवर्तन के साक्षी, कारण व कारक!

भारतीय पुरातन ग्रन्थों में अतिप्राचीन काल में हो चुके कुछ ऐसे महापुरुषों का वर्णन है, जिन्हें आज भी जीवित अर्थात अमर माना जाता है।

श्रृद्धा बिनु धर्म नहिं होई……

एक देश जो अपनी जड़, अपनी जमीन, अपने जल, अपने जंगल, अपनी संस्कृति को पहचान कर उसी में विकसित होना चाहता है।

पुष्टि मार्ग के प्रणेता वल्लभाचार्य

वल्लभाचार्य के मत में भगवान श्रीकृष्ण के अनुग्रह को पुष्टि और इस विशेष अनुग्रह से उत्पन्न होने वाली भक्ति को पुष्टिभक्ति कहा जाता है।

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