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हिंदी के वरिष्ठतम पत्रकार। नवभारत टाइम्स में बतौर विशेष संवाददाता का लंबा अनुभव। जाफ़ना के जंगलों से भी नवभारत टाइम्स के लिए रपटें भेजीं और हंगरी के बुदापेश्त से भी।अस्सी के दशक में दूरदर्शन के कार्यक्रमों की लगातार एंकरिंग। नब्बे के दशक में टेलीविज़न के कई कार्यक्रम और फ़िल्में बनाईं। फिलहाल ‘न्यूज़ व्यूज़ इंडिया’ और ‘ग्लोबल इंडिया इनवेस्टिगेटर’ के कर्ता-धर्ता।
ठुमकों की उम्मीद पर प्रतिदंड के पानी की कहानी

बालासाहेब के ज़माने में किशोरवयी रहे शिवसैनिकों को उद्धव की रहनुमाई तो रास आ सकती थी, मगर आदित्य ठाकरे को अपने सिर पर वे कैसे नाचने दें?

ख़ामोशी की बर्फ़ के नीचे बहता ताताचट लावा

अपनी ग़लतियों को सार्वजनिक तौर पर मानने का तो छोड़िए, मन-ही-मन उनका अहसास कर लेने की भी संवेदना आज कितनों में आप को दिखाई देती है?

राष्ट्रनीति से राजनीति तक का सफ़रनामा

आठ साल में भारत जिस मोड़ पर आकर खड़ा हो गया है या कि नरेंद्र भाई ने उसे जिस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, उसके चलते वे 2024 का लक्ष्य हासिल कर लें तो हैरत कैसी?

मोशा-युग में तो खटोला यहीं बिछेगा

कश्मीरी पंडितों के पलायन का दूसरा अध्याय पहले अध्याय से ज़्यादा चिंताजनक है।

नरेंद्र भाई के बरामदे से राहुल की ड्योढ़ी तक

मेरे शुभचिंतक मुझे यह भी उलाहना देते हैं कि मैं नरेंद्र भाई मोदी, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाहक ही इतनी आलोचना क्यों करता हूं?

लार टपकाते नकटों के गांव में

मैं नकटा हूं। सब से बड़ा नकटा। और, मुझे अपने नकटे होने पर गर्व है। दुनिया में जितने भी नकटे हैं, उन्हें अपने नकटे होने पर गर्व होना चाहिए।

कांग्रेस के चिंतन की अंतिम झील

उदयपुर की झीलों को गांवों के ऊसर तक ले जाने का भगीरथी-तप अगर समूची कांग्रेस कर सके तो कोई बात है, वरना सारा चिंतन व्यर्थ है।

बदलते राजचिह्न के दौर का अभिनंदन

भारत का राजचिह्न सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के सिंह स्तंभ की अनुकृति है या बेंजामिन होल्ट का बनाया बुलडोज़र?

अखंड-भारत की गुदगुदी का असली सच

अखंड भारत इस वक़्त क़रीब पौने इकसठ करोड़ मुस्लिमों का निवास स्थान है।

दो बिरादरों के बहाने बुझी अंगीठियों पर आंसू

कहा गया कि संवाददाता को नौकरी से निकालें। अख़बार मालिक आजकल चूंकि सिर्फ़ अखबार मालिक ही नहीं होते हैं, इसलिए किसी भी सरकार के सामने टिकने लायक नैतिक बल उनमें होता नहीं है।

बहेलियों की काल-रात्रि में राहुल-प्रियंका का चिराग

पांच प्रदेशों में कांग्रेस की सीटें पहले से 85 कम हो गई हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या भी पहले से 43 घट गई है। कांग्रेस भाजपा के मुकाबले दुगनी रफ़्तार से रपटी है

ज़श्न के हो-हल्ले की ओट से झांकता सच

अगर राहुल गांधी और उनके चेले-चपाटे अपनी कैनबिस इंडिका ख़ुमारी से बाहर आ कर मैदान में पिल पड़ें तो पांच प्रदेशों के नतीजों में भाजपा को पदा-पदा कर दौड़ाने के अंकुर खोज सकते हैं।

हथकंडों के मौसेरेपन की जुगलबंदी का डर

अब भी देर हुई तो कांग्रेस देश की चिंता का विषय ही नहीं रह जाएगी। देश को समझदार विपक्ष चाहिए, कांग्रेस दे या कोई और।

अब कलाजंग दांव की तैयारी करें राहुल-प्रियंका

2024 में नरेंद्र भाई मोदी को घुटनों पर टिकाने के लिए अगले दो साल राहुल-प्रियंका को भाजपा के प्रादेशिक क्षत्रपों को रोज़-ब-रोज़ पानी पिलाने घर से निकलना होगा।

सर्वव्यापी मुगाम्बो-दौर में यूक्रेन के बहाने

जब तक वैश्विक शक्तियां मानवता के मूल प्रश्नों पर अपनी प्रतिक्रियाएं अंगवस्त्रम-भाव से ज़ाहिर करने भर का काम करती रहेंगी, संसार नहीं बदलेगा।

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