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केमद्रुम योग से ग्रसित समृद्ध कुटीर-उद्योग

विबंलडन में हरित घास वाले 38 टेनिस मैदान हैं। दिल्ली जिमखाना में 26 हैं। तो क्या इस का लेखाजोखा नहीं होना चाहिए कि हमारे जिमखाना ने कितनी सेरेना विलियम्स, मार्टिना नवरातिलोवा, स्टेफी ग्राफ और रॉजर फेडरर अपने अंगने में खिलाए हैं? दिल्ली के पश्चिमी इलाके में बना रोशनआरा क्लब 23 एकड भूमि पर काबिज़ है़। पौने तीन साल पहले इसे दिल्ली विकास प्राधिकरण ने अपने सीधे नियंत्रण में ले लिया। वज़ह वही। अनियमितताओं को दुरुस्त करना। और दुरस्त करने का जिम्मा किन पर?

जिमखाना क्लब के बहाने – 2

दिल्ली जिमखाना की सवा 27 एकड़ सरकारी ज़मीन की कीमत आज तक़रीबन एक खरब रुपए है यानी सौ अरब रुपए यानी दस हज़ार करोड़ रुपए। एक के आगे ग्यारह शून्य। क्लब के मताधिकार प्राप्त स्थायी सदस्यों की तादाद 5,018 है। इस का मतलब यह हुआ कि एक सदस्य सरकार की दो करोड़ रुपए मूल्य की ज़मीन पर पसरा हुआ है। वैसे क्लब की सुविधाओं का इस्तेमाल करने का अधिकार बिना मताधिकार वाले एसोसिएट सदस्यों को भी है। उन्हें मिला लें तो कुल सदस्य 14,547 हो जाते हैं। इस हिसाब से भी सरकार ने प्रत्येक लाभ-भोगी को तक़रीबन 70-70 लाख रुपए की ज़मीन दे रखी है।

अब कोई इन 5 या 15 हज़ार लोगों से यह पूछे कि आप ऐसा क्या योगदान कर रहे हैं कि आप के लिए सरकार ऐसे पलक-पांवड़े बिछाए? क्लब में टेनिस खेलने के लिए 33 मैदान हैं। इन में से 26 हरी घास वाले हैं, 4 शुष्क ज़मीन वाले हैं और 3 फ्लेक्स कुशन कोर्ट हैं। जल के तापमान को नियंत्रित रखने वाला स्विमिंग पूल है। कई स्क्वैश और बेडमिंटन कोर्ट हैं। कई बिलियर्ड और स्नूकर टेबल हैं। ताश खेलने के लिए कई कमरे हैं। जिम है। हैल्थ क्लब है। तीन बार हैं। अलग-अलग स्वाद वाले चार भोजन कक्ष हैं। चाय-काफी लाउंज है। तनाव-मुक्ति के लिए मसाज पार्लर है। सैलून है। केश कर्तनालय है। कई पार्टी लॉन हैं।

क्लब में पीछे की तरफ़ सर्व-सुविधासंपन्न 43 ‘कुटीर’ हैं। इन में 37 कमरे डबल बेड वाले हैं। एक शयनकक्ष और एक बैठक कक्ष वाले दो सुइट हैं। दो शयनकक्ष, एक बैठक कक्ष और एक पठन कक्ष वाला एक डबल सुइट है। सिर्फ़ क्लब के स्थायी सदस्य इन्हें तीन से दस हज़ार रुपए प्रतिदिन की दर पर एक बार में 15 दिनों के लिए ले सकते हैं। अगर आप की रसूखदारी दूसरे सदस्यों से बेहतर है तो अपवाद के नियम की छूट आप को मिल जाएगी और आप महीने भर के लिए अपना ‘कुटीर-उद्योग’ चला सकते हैं। मैं जानता हूं कि इतने समझदार तो आप हैं ही कि किसी के बिना बताए भी यह समझ सकते हैं कि ये कुटीर आमतौर पर कौन बुक करते हैं, किन के लिए बुक करते हैं और किसलिए बुक करते हैं?

ये सब नकारात्मक बातें छोड़िए। इस सकारात्मकता पर आइए कि लंदन में विंबलडन क्लब के बाद दिल्ली का जिमखाना दुनिया का दूसरा ऐसा क्लब है, जहां एक ही परिसर में टेनिस के इतने ग्रास कोर्ट्स हैं। विबंलडन में हरित घास वाले 38 टेनिस मैदान हैं। दिल्ली जिमखाना में 26 हैं। तो क्या इस का लेखाजोखा नहीं होना चाहिए कि हमारे जिमखाना ने कितनी सेरेना विलियम्स, मार्टिना नवरातिलोवा, स्टेफी ग्राफ और रॉजर फेडरर अपने अंगने में खिलाए हैं? विंबलडन 70 बरस में अपने प्रांगण में 400 चैंपियन खिलाड़ियों और टीमों की मेज़बानी कर चुका है। दिल्ली जिमखाना ने आज़ादी के बाद ऐसा कौन-सा तीर मारा है कि सरकार अपनी कीमती भूमि उसी के पल्लू में बांधे रखे?

एक बात और जान लीजिए, विंबलडन को ब्रिटेन की सरकार ने बित्ता भर भी ज़मीन नहीं दी है। उस की 42 एकड़ ज़मीन ख़ुद क्लब ने खरीदी थी। जल्दी ही वह और भूमि खरीद रहा है। तब कुल ज़मीन 115 एकड़ हो जाएगी। विंबलडन क्लब स्व-वित्तपोषी संस्थान है। परजीवी नहीं। हैं तो दिल्ली जिमखाना की गांठ में भी ख़ुद के साढ़े तीन अरब रुपए। मगर जब कुंडली में केमद्रुम योग हो तो कोई क्या करे?

जब टेनिस की दुनिया में ही हमारे जिमखाना का यह हाल है तो स्क्वैश, बेडमिंटन, बिलियर्ड, स्नूकर और तैराकी के चैंपियनों को जन्म देना तो छोड़िए, उन की मेज़बानी करने तक के बारे में सवाल उठाना भी ख़ुद की जग-हंसाई कराना ही होगा। 60 साल पहले डेविस कप का एक टाई-मैच और ऐसे ही दो-चार और फुटकर आयोजनों के अलावा जिमखाना में किसी भी खेल की अंतर-क्लब स्पर्धाओं के अलावा कुछ हुआ है क्या? सो, कौन पूछे कि आप के पास कोई मुस्तफ़ा असल, अमीना ओर्फ़ी, शी युकी, अकाने यमगुची, वू यिजे, लियोन मर्चंड, समर मैक्लिनटोश, डेव कोज़ियर और सौरव कोठारी हैं क्या?

संचालन संबंधी कुव्यवस्थाओं के चलते दिल्ली जिमखाना क्लब की निर्वाचित कार्यकारिणी को भंग कर सारा कामकाज सरकार द्वारा नियुक्त संचालन समिति के हाथ में आए चार साल पूरे हो गए हैं। अब मौजूदा जिमखानाधीश मलय कुमार सिन्हा हैं। वे आईबी में विशेष निदेशक रह चुके हैं, कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) थे। उत्तर प्रदेश काडर के आईपीएस रहे हैं। उन की क्लब-कार्यकारिणी में भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के महासचिव कुलजीत सिंह चहल, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली और भाजपा के पूर्व सांसद तथा पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे सरीखे अर्थवान, ज्ञानवान और ऊर्जावान चेहरे हैं। जिसे इस तथ्य पर विलाप करना है, कर ले, मगर सच यही है कि जिमखाना क्लब अपना बोया ही आज काट रहा है। सो, उस की मद्धम-मृत्यु की प्रतीक्षा कीजिए।

निर्वाचित संचालन समितियों को विदा कर सरकारी इंतज़ाम लागू करने की बात निकली है तो राजधानी के बाकी क्लबों के बजाय अभी मैं आप को पहले दिल्ली के पश्चिमी इलाके में बने रोशनआरा क्लब के बारे में कुछ बताता हूं। यह सरकार की दी हुई 23 एकड भूमि पर काबिज़ है़। पौने तीन साल पहले इसे दिल्ली विकास प्राधिकरण ने अपने सीधे नियंत्रण में ले लिया। वज़ह वही। अनियमितताओं को दुरुस्त करना। अब दिल्ली के उपराज्यपाल इस के अध्यक्ष हैं। डीडीए के उपाध्यक्ष क्लब की प्रबंध समिति के प्रमुख हैं और प्राधिकरण के खेल प्रभाग के मुख्य आयुक्त, आयुक्त, मुख्य अभियंता और निदेशक कार्यकारिणी के सदस्य हैं।

इस व्यवस्था के पहले अंतिम निर्वाचित प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मोहित सूरी और महासचिव राजन मनचंदा थे। सूरी सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और मनचंदा क्रिकेट प्रशासक। दोनों भाजपा से जुड़े हुए हैं। सूरी केंद्र सरकार के वकीलों की पैनल में रहे हैं। मनचंदा अरुण जेटली के बेटे रोहन के साथ दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन में हैं। रोशनआरा क्लब भारतीय क्रिकेट का मक्का माना जाता है। 98 साल पहले इसी क्लब के मैदान में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड -बीसीसीआई- की स्थापना हुई थी। अंग्रेज़ अधिकारियों और कुलीन भारतीयों के मनोरंजन के लिए यह क्लब 104 बरस पहले 1922 में बना था।

अपने हत्थे चढ़ते ही डीडीए ने इस क्लब के 637 नए आजीवन सदस्य बना दिए। इन में 298 सरकारी अधिकारी हैं। बाक़ी से सदस्यता के लिए साढ़े 12 लाख रुपए का शुल्क लिया जाता है, मगर सरकारी कारकूनों के लिए यह शुल्क महज़ 4 लाख रुपए का है। क्लब की ज़मीन का बाज़ार मूल्य आज क़रीब 60 अरब रुपए है। क्लब के सदस्यों की तादाद तक़रीबन 5 हज़ार है। यानी प्रति सदस्य अनुपात सवा करोड़ रुपए की भूमि का है।

रोशनआरा शाहजहां और मुमताज की पांचवी संतान और तीसरी बेटी थीं। मुमताज से शाहजहां के 14 बेटे-बेटियां जन्मे थे, मगर उन मे से सिर्फ़ 7 ही जीवित रहे। रोशनआरा को लालकिले की गहमागहमी नापसंद थी। सो, शांहजहां ने उस के लिए शाहजहानाबाद की चारदीवारी, यानी आज की पुरानी दिल्ली, से दूर, 1650 के आसपास, एक बेहद ख़ूबसूरत बाग बनवाया था। यह क्लब इसी रोशनआरा बाग का हिस्सा है। प्रार्थना करें कि सांस्कृतिक-धार्मिक प्रदूषण के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे नवोदित धर्मरक्षकों का ध्यान नाम के इस इतिहास पर कभी न जाए।कल दिल्ली गोल्फ क्लब समेत कुछ और क्लबों में चलेंगे। (जारी)

By पंकज शर्मा

स्वतंत्र पत्रकार। नया इंडिया में नियमित कन्ट्रिब्यटर। नवभारत टाइम्स में संवाददाता, विशेष संवाददाता का सन् 1980 से 2006 का लंबा अनुभव। पांच वर्ष सीबीएफसी-सदस्य। प्रिंट और ब्रॉडकास्ट में विविध अनुभव और फिलहाल संपादक, न्यूज व्यूज इंडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता। नया इंडिया के नियमित लेखक।

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