देह, दोष और दृष्टि की राजनीति: ‘एक्यूज्ड’
आज के सिने–सोहबत में हम बात करेंगे हाल ही में आई फ़िल्म ‘एक्यूज्ड’ की, एक ऐसी फ़िल्म जो केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि दर...
आज के सिने–सोहबत में हम बात करेंगे हाल ही में आई फ़िल्म ‘एक्यूज्ड’ की, एक ऐसी फ़िल्म जो केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि दर...
फ़िल्म का सबसे भयावह पहलू उसका ‘विलेन’ नहीं, बल्कि उसका पूरा ‘सिस्टम’ है, जिसमें पंथ, सत्ता और ...
यह फ़िल्म युद्धभूमि से लौटे एक सैनिक की कहानी है, जो अपने ही समाज में मौजूद अन...
यह फ़िल्म युद्धभूमि से लौटे एक सैनिक की कहानी है, जो अपने ही समाज में मौजूद अन...
पंकज कपूर का किरदार इस कहानी का भावनात्मक केंद्र है। उनका चरित्र एक ऐसे व्यक्ति का है,
आज के 'सिने-सोहबत' में जो फ़िल्म चर्चा का विषय है वो है ‘दो दीवाने शहर में’ जिसके निर्देशक हैं रवि उद्यावर और लिखा है अभ...
सिने-सोहबत फ़िल्म पत्रकार-लेखक हुसैन ज़ैदी की किताब 'द माफ़ि...
लेखक गुंजित चोपड़ा और डिग्गी सिसोदिया अपराध को सनसनी नहीं बनाते। वे उसे सामाजिक संरचना की उपज की तरह देखते हैं। ...
"गांधी टॉक्स" दो समानांतर जीवन-रेखाओं पर चलती है। एक ओर है विजय सेतुपति का किरदार जो कि एक आम आ...
‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ सिर्फ एक क्लासिक क्राइम-थ्रिलर नहीं है। यह एक बौद्धिक और नैतिक जांच का मंच भी है जो यह बताती है...
फ़िल्म बार-बार यह अहसास कराती है कि आधुनिकता का सपना किसी के लिए सपना होता है,
हॉलीवुड फिल्मकार डैरेन एरोनोफ़्स्की की पिछली फिल्म 'ब्लैक स्वान
‘इक्कीस’ कई स्तरों पर काम करती है। एक स्तर पर यह साहस और कर्त...
'रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स 'उन फ़िल्मों में से नहीं है जो ...
हर साल सैकड़ों फ़िल्में बनाने वाला हमारा हिंदी फिल्म उद्योग पता नहीं मुस्लिम कथा को उचित शोध और ईमानदारी से क्यों ...