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सत्येन्द्र रंजन All Article

जेरमी कॉर्बिन से क्या सीखें?

ब्रिटेन में 8 जून को हुए संसदीय चुनाव ने दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों में हाल के वर्षों में दिखे रूझान की फिर से पुष्टि की। यह रूझान इतने सुसंगत ढंग से आगे बढ़ा है कि अब इसे एक परिघटना कहा जा सकता है। परिघटना यह है कि स्थापित राजनीतिक और पढ़ें....

क्या ‘कानून के राज’ की समाप्ति?

‘कानून के राज’ का सीधा अर्थ यह है कि सबके लिए समान कानून हो और कानून के आगे सभी लोग बराबर हों। जिस समाज में इस सिद्धांत को अपनाया जाता है, वहां इसे सुनिश्चित करने के लिए उचित तंत्र, प्रक्रियाएं, संस्थाएं, व्यवहार और कायदे स्थापित किए जाते हैं। मकसद सरकार और पढ़ें....

बोल्शेविक क्रांति के सौ साल

सौ साल पहले इन दिनों रूस में वो घटनाएं हो रही थीं, जो मानव इतिहास को एक अभूतपूर्व धरातल पर ले गईं। फरवरी (रोमन कैलेंडर के हिसाब से मार्च) में वहां श्रमिक वर्ग का विद्रोह हुआ। प्रथम विश्व युद्ध की विभीषिका से जर्जर जारशाही (वहां का राजतंत्र) इसका सामना नहीं और पढ़ें....

साफ-सुथरे चुनाव की चुनौती

चुनाव सुधार पुराना विषय है, लेकिन हाल के विधानसभा चुनावों के बाद इससे जुड़े कई नए सवाल उठे हैं। इस पर बीते 22 मार्च को राज्य सभा में विस्तृत बहस हुई। चुनाव किसी प्रातिनिधिक लोकतंत्र (representative democracy) का सर्व-प्रमुख पहलू है। प्रातिनिधिक लोकतंत्र में शासन निर्वाचित प्रतिनिधि चलाते हैं। उन्हें और पढ़ें....

संवैधानिक गणतंत्र के गिने-चुने दिन?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का नतीजा आते ही जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला ने ट्विट किया कि विपक्ष को अब 2019 को भूल कर 2024 की तैयारी करनी चाहिए। उनकी इस राय से इत्तेफ़ाक रखने वाले लोगों की कोई कमी नहीं होगी। इसलिए कि उत्तर प्रदेश के चुनाव और पढ़ें....

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सत्येन्द्र रंजन

सत्येन्द्र रंजन

satyendra.ranjan@gmail.com

Ranjan has been a journalist for 23 years and is a Contributing Writer at Naya India. His writings focus on the analysis of the week’s most important issues, from socio-political issues, business affairs, international affairs to sports. He started his career as a Sub Editor in Jansatta, and then moved onto working with Netjaal.com, Dainik Bhashkar, and thereon at NDTV. Since 2009, Ranjan has been writing extensively for various publications usually centred around democratic struggles and social justice. He resides in Delhi and is currently a Senior Associate Fellow at the Centre for Study of Developing Societies (CSDS). He is also a regular guest lecturer at IGNOU and Jamia Milia Islamia University.

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