सिख बलिदानियों में प्रथम,क गुरु अर्जुनदेव

गुरुग्रन्थ साहिब का सम्पादन करने वाले गुरु अर्जुनदेव को सर्वधर्म समभाव के साथ अपने आत्म बलिदान के लिए जाना जाता है

जल ही जीवन का तत्व और अमृत

मानव शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, अन्तरिक्ष तथा वायु इन पंचतत्वों से निर्मित है। इन पंचतत्वों में से एक के भी दूषित हो जाने पर उसका दुष्प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है।

नदियाँ के बिना जीवन नहीं है!

वेदों में सात नदियों का विशेष वर्णन करते हुए कहा गया है कि ये सात चेतना प्रवाह रूप हैं। उन्हें उषा की गौएं, सूर्य के सात घोड़े तथा सात अग्नि रूप कहा गया है।

सत और असत

व्यावहारिक जगत में लौकिक रूप अर्थात लौकिक भाव में सत् (सत) का अर्थ लिया जाता है अच्छा, सज्जन। आध्यात्मिक अर्थ है अपरिणामी, जिसमें कोई परिवर्तन नहीं होता।

पूर्ण वैचारिक स्वतंत्रता के पक्षधर गौतम बुद्ध

भगवान गौतम बुद्ध संसार के धर्म प्रचारकों में एक दैदीप्यमान प्रकाश स्तम्भ की भांति आकाश में अपना दिव्य प्रकाश ढाई हजार वर्षों से संसार में बिखेर रहे हैं।

व्यक्ति, समाज और जगत का एक सिद्धान्त

ब्रह्माण्ड को ब्रह्म का शरीर माना गया है। ब्रह्माण्ड के भी सब पदार्थ, शरीर की भान्ति प्रति क्षण क्षरित हो रहे हैं। जगत्यां जगत अर्थात गत्तिशील जगत शरीर है।

शत्रु नाश हेतु बगलामुखी उपासना

वाद- विवाद और युद्ध में विजय की प्राप्ति, शत्रुओं के नाश, वाक सिद्धि के उद्देश्य से भगवती बगलामुखी की उपासना किये जाने की पौराणिक परिपाटी है।

कर्म करने में स्वतंत्र है मनुष्य

मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है, परन्तु मनुष्य से इतर जीव-जन्तु कर्म करने में स्वतंत्र नहीं हैं।

परशुरामः युग परिवर्तन के साक्षी, कारण व कारक!

भारतीय पुरातन ग्रन्थों में अतिप्राचीन काल में हो चुके कुछ ऐसे महापुरुषों का वर्णन है, जिन्हें आज भी जीवित अर्थात अमर माना जाता है।

जैविक खेती को अपनाना जरूरी

कुछ वर्ष पूर्व ही भारतीय फल, सब्जियों और चाय को यूरोपियन यूनियन के देशों और सऊदी अरब ने जहरीला बताते हुए आयात पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था।

श्रृद्धा बिनु धर्म नहिं होई……

एक देश जो अपनी जड़, अपनी जमीन, अपने जल, अपने जंगल, अपनी संस्कृति को पहचान कर उसी में विकसित होना चाहता है।

पुष्टि मार्ग के प्रणेता वल्लभाचार्य

वल्लभाचार्य के मत में भगवान श्रीकृष्ण के अनुग्रह को पुष्टि और इस विशेष अनुग्रह से उत्पन्न होने वाली भक्ति को पुष्टिभक्ति कहा जाता है।

उपनिषद है सनातन अमर ग्रंथ

पुरातन भारतीय महत्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रंथ वैदिक वांग्मय के अभिन्न अंग उपनिषदों में परमेश्वर, परमात्मा ,ब्रह्म , आत्मा, जीव, जगत आदि के सम्बंध में अत्यंत दार्शनिक, रहस्यमय व ज्ञानवर्द्धक विवरणी अंकित ह

22 अप्रैल-पृथ्वी दिवस: आश्रय आधार मां पृथ्वी

हे धरती देवी, तुम सम्पूर्ण लोक की आधार हो, तू मुझे भी धारण कर, मैं तुम पर पैर रख रहा हूँ, इस अपराध को क्षमा कर।

पुण्यभूमि और हिन्दुस्तानी का सवाल

नैतिक पतन से देशवासियों को उभारने के लिए लोगों में राष्ट्रभक्ति अर्थात देश से प्रेम की और नैतिक आचरण की सुदृढ़ता के लिए एक आचार संहिता की आवश्यकता है।

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