श्रीविष्णु के जागरण का दिन देवउठनी एकादशी

पौराणिक मान्यतानुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव शयन करते हैं, और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं।

इच्छा पूरक व अक्षय फलप्रदायक अक्षय नवमी

पंचांग के अनुसार वर्ष का नौंवा महिना कार्तिक बहुत शुभ है। यह मास स्नान- दान के लिए प्रसिद्ध है।

गौ संरक्षण का संकल्प लेने का दिन गोपाष्टमी

गौ का तात्पर्य गौ माता के साथ ही इंद्रियों और चंद्रमा भी से है। गोवर्धन का तात्पर्य गौ माता के गोबर से है। गौ माता का गोबर एवं मूत्र अत्यंत मूल्यवान होता है।

नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, पाप और यमराज

दीपावली से एक दिन पहले मतलब कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की तिथि को नरक चतुर्दशी, नरक चौदस, नर्क चतुर्दशी, नर्का पूजा, रूप चौदस,काली चौदस आदि नाम से जाना जाता है।

मजबूत रिश्ते, विश्वास का करवा चौथ व्रत

करवा चौथ का संबंध शिव और पार्वती से है। करवाचौथ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है – करवा और चौथ।

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष वाला कार्तिक

भारतीय पंचांग के अनुसार आश्विन माह के पश्चात आने वाला वर्ष का आठवाँ माह कार्तिक मास समस्त तीर्थों तथा धार्मिक कृत्यों से अत्यंत पवित्र माना जाता है।

शरद पूर्णिमाः चन्द्रमा से मानों अमृत वर्षा!

शरद पूर्णिमा के नाम से आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन सर्व मनोकामना पूर्ति और सन्तान सुख के लिए शरद पूर्णिमा व्रत किया जाता है।

विजयादशमी के है कई अर्थ

नौ दिनों तक शक्ति की आराधना के बाद आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी अर्थात दशहरा का त्यौहार मनाये जाने की परिपाटी है।

जनजातीय नवरात्र परंपरा

भारतीय संस्कृति में देवी पूजा को मुख्य माना गया है लेकिन जनजातीय संस्कृति में प्रकृति पूजन को मुख्य माना गया है।

पाप खत्म, इच्छी पूरी की अभीष्ट नवदुर्गा

पौराणिक मान्यतानुसार शक्ति की अधिष्ठात्री देवी भगवती दुर्गा अर्थात पार्वती के नौ (नव) रूपों को नौदुर्गा (नवदुर्गा) की संज्ञा से अभिहित किया गया है।

प्राण उर्जा शक्तियों को जगाने का समय नवरात्र

नवरात्रि का तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा को समर्पित है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र से जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वत: प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

ब्रह्मचारिणीः कुंडलिनी शक्ति को जगाने वाली

नवरात्र पर्व के दूसरे दिन नवदुर्गाओं में द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना किये जाने की परिपाटी है। पौराणिक मान्यतानुसार श्रीदुर्गा के द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है।

ब्रह्ममयी महाशक्ति वैदिक देवी अदिति

स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश में कहा है कि, जितने देव शब्द के अर्थ लिखे हाँ उतने ही देवी शब्द के भी हैं।

पंजाब और सिंध जनों के गुरु नानक

अधिकांश विद्वान कार्तिक पूर्णिमा को ही नानक का जन्म दिन मानते हैं, और यही तिथि प्रचलित भी है। इनके पिता का नाम लाला कल्याण राय (मेहता कालूचन्द खत्री) तथा माता का नाम तृप्ता देवी था।

प्राणों को सर्वाधिक शुद्ध करने वाला पीपल

सभी उम्र के लोगों के लिए परिचित, सर्वप्रचलित और सर्वप्रिय भारत के प्रसिद्ध वृक्ष पीपल की महिमा वेद , पुराण, चरक, सुश्रुत और निघण्टु आदि आयुर्वेद शास्‍त्रों में सर्वत्र गाई गई है।

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