कालपुरुष की चेतना और श्रावण सोमवारी
सनातन धर्म में कोई भी व्रत केवल आस्था या अंधविश्वास पर आधारित नहीं माना गया है। उसके पीछे प्रकृति
सनातन धर्म में कोई भी व्रत केवल आस्था या अंधविश्वास पर आधारित नहीं माना गया है। उसके पीछे प्रकृति
भारतीय परंपरा में संगीत केवल मनोरंजन का साधन अथवा भौतिक कला मात्र नहीं, अपितु यह परब्रह्म के साक्षात्कार, आत्मानुसंधान ए...
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के ऐसे राष्ट्रऋषि थे, जिन्होंने राजनीति ...
कबीर भारतीय दर्शन के मौलिक प्रवर्तक नहीं, बल्कि उसके अद्वितीय व्याख्याकार ...
“चलते रहो, चलते रहो” भारतीय पर्यटन दर्शन का मूल आधार है। सच्चा यायावर वही है, जो जहां भी जाए, वहां की संस्कृति को सम्मान...
झांसी और कालपी के पतन के बाद महारानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और राव साहब के ने...
आज संयुक्त राष्ट्र 1 जून को वैश्विक अभिभावक दिवस के रूप में मनाता है। इसका उद्...
आक्रमणकारियों ने धन के लोभ में मंदिर को लूटा, लेकिन वे उस श्रद्धा को नहीं लूट सके जो लोगों के ह...
वैशाख शुक्ल सप्तमी, जिसे गंगा सप्तमी या जह्नु सप्तमी कहा जाता है
भारतीय वाङ्मय के आकाश में आद्य गुरु शंकराचार्य एक ऐसे उज्ज्वल सूर्य हैं, जिन्होंने अल्पायु में ही अपनी प्रतिभा से चारों ...
बदरीनाथ (नारायण) और केदारनाथ (रुद्र) का संबंध परस्पर पूरक है। स्कंदपुराण के केदारखंड के अनुसार शिव और विष्णु के ...
पराशर का जीवन एक सेतु है—आकाश और पृथ्वी के बीच, ज्ञान और कर्म के बीच, ऋषित्व और लोक के बीच। उन्...
वल्लभाचार्य का सबसे बड़ा धार्मिक कार्य पुष्टिमार्ग की स्थापना है। “पोषणं तदनुग...
गुरु अर्जुन देव की शहादत ने सिख पंथ के इतिहास को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद सिख धर्म में राजनीतिक शक्ति के रूप ...