मातृदेवो भव, पितृदेवो भव
आज संयुक्त राष्ट्र 1 जून को वैश्विक अभिभावक दिवस के रूप में मनाता है। इसका उद्...
आज संयुक्त राष्ट्र 1 जून को वैश्विक अभिभावक दिवस के रूप में मनाता है। इसका उद्...
आक्रमणकारियों ने धन के लोभ में मंदिर को लूटा, लेकिन वे उस श्रद्धा को नहीं लूट सके जो लोगों के ह...
वैशाख शुक्ल सप्तमी, जिसे गंगा सप्तमी या जह्नु सप्तमी कहा जाता है
भारतीय वाङ्मय के आकाश में आद्य गुरु शंकराचार्य एक ऐसे उज्ज्वल सूर्य हैं, जिन्होंने अल्पायु में ही अपनी प्रतिभा से चारों ...
बदरीनाथ (नारायण) और केदारनाथ (रुद्र) का संबंध परस्पर पूरक है। स्कंदपुराण के केदारखंड के अनुसार शिव और विष्णु के ...
पराशर का जीवन एक सेतु है—आकाश और पृथ्वी के बीच, ज्ञान और कर्म के बीच, ऋषित्व और लोक के बीच। उन्...
वल्लभाचार्य का सबसे बड़ा धार्मिक कार्य पुष्टिमार्ग की स्थापना है। “पोषणं तदनुग...
गुरु अर्जुन देव की शहादत ने सिख पंथ के इतिहास को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद सिख धर्म में राजनीतिक शक्ति के रूप ...
इतिहास चेतावनी देता है कि मजबूत सेना भी बिखरे हुए समाज को नहीं बचा सकती। यदि आज का भारत जाति, भ...
मंदिर समाज को एक सूत्र में पिरोते हैं। त्योहारों, उत्सवों और सामूहिक भोज अर्थात भंडारा के माध्य...
अशोक की महत्ता इस बात में है कि उन्होंने शासन को नैतिकता से जोड़ा। उन्होंने सिद्ध किया कि सच्ची महानता साम्राज्य...
श्रीराम के जीवन का सबसे बड़ा आधार सत्य है। वाल्मीकि रामायण में उन्हें सत्यवादी और दृढव्रतः कहा गया है। श्रीराम को...
भारतीय सभ्यता में शिक्षा केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं, बल्कि संस्कार और आत्मबोध की एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही है...
माता शैलपुत्री का स्वरूप केवल एक देवी की छवि नहीं है, बल्कि यह अडिग संकल्प