• अब तो ‘धर्म की राजनीति’ ही ‘राजनीति का धर्म…!

    भोपाल। आज से करीब पचहत्तर साल पहले छब्बीस जनवरी से लागू आजाद भारत का संविधान अब तक सवा सौ से भी अधिक संशोधन के तीर झेल चुका है और इसीलिए आज वह द्वापर में हुए महाभारत युद्ध के बाद के भीष्म की ‘शर शैय्या’ का परिदृष्य उपस्थित कर रहा है या यदि यह कहा जाए कि हमारे संविधान को आज के शीर्ष राजनेताओं ने रामायण-महाभारत जैसे पवित्र धर्मग्रंथों की तरह ही लाल कपड़े में लम्बी डोरी से बांध कर रख दिया है और अपने खुद की मनमर्जी के संविधान से सरकार चला रहे है तो कतई गलत नहीं होगा। आज...

  • राम का मंदिर क्या सिर्फ राम के उपासकों का है..?

    भोपाल। विश्व हिन्दू परिषद की ओर से राम मंदिर निर्माण के कर्ता – धर्ता चम्पत रॉय द्वारा चार पीठों के शंकरचार्यों द्वारा अयोध्या मंदिर के निर्माण से अपने को अलग करने के बाद उन्होंने यह विवादित बयान दिया। जिससे यह प्रतीत होता है कि मंदिर के निर्माण में धन और जन से सहयोग करने वाले शैव और शाक्त संप्रदाय के लोग अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने शंकराचार्यों को शैव मत का मानते हुए उनकी उपस्थिति को गैर जरूरी माना है। अब इन सज्जन को कौन समझाये कि ना तो अयोध्या सनातन धरम के चार धामों में है और ना...

  • न तो ये युद्ध है न ही आक्रमण, यह है नस्ल संहार

    भोपाल। संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गाज़ा पट्टी पर इज़राइल की फौजी कार्रवाई ने अब तक 17000 (सत्रह हज़ार) और 700 (सात सौ) फिलिस्तीनी लोगों की मौत/हत्या/वध का जिम्मेदार है। यूक्रेन और रूस के दरम्यान पिछले साल भर से चल रहे युद्ध में भी इतने लोगों की मौत नहीं हुई जितनी इज़राइल की अहंकारी नेत्न्याहु सरकार ने एक माह में भी निहत्थे नागरिकों को मौत की नींद सुला दिया हैं। भारत के संदर्भ में ने इतनी मौतंे बंगला देश युद्ध में भी नहीं हुई थी। शायद दूसरे महायुद्ध में बर्लिन के घेरे के समय भी दोनों...

  • विधानसभा चुनाव परिणाम बनाम महाभारत की द्यूत क्रीड़ा…!

    भोपाल। जब कुछ ऐसा घटित होता हैं जो असामान्य या असंभावित हो तब – तब शकुनि के पाँसों के चमत्कार की याद आती है ! जिस प्रकार जुए में हार – जीत होती है, परंतु यदि एक पक्ष की ही विजय हो तब कुछ असंभव को संभव कला का संदेह होता हैं। जिस प्रकार पांडवों की लगातार द्यूत में शकुनि के मंत्र अभिसिक्त पाँसों ने अपने मालिक के कहे को सत्य किया कुछ उसी प्रकार चुनावों में शायद ईवीएम मशीनों ने भी चुनाव परिणाम उगले हैं। क्यूंकि विरोधी दलों उम्मीदवारों को उनके ही गाँव में फक्त 40 से 50 वोट...

  • पिछड़ी जातियों के वोटों की राजनीति…!

    भोपाल। नाइन इयर के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ने अनेक परदेशों के नेत्रत्व को झटका दिया है। पहला झटका उत्तराखंड फिर गुजरात और महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्रियों को लगा। इन लोगों को जिस प्रकार बेबस कर के पैदली मात दी वह उनके अपराजेय व्यक्तित्व का विज्ञापन ही है। अब इस बार उनका निशाना उत्तर प्रदेश के भगवाधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है ! हाल में ही हुए पाँच राज्यों मंे से चार में अपनी पार्टी की गिरती साख और आसन्न पराजय का आभास मिलते ही, राहुल गांधी के एजेंडा पिछड़ी जातियों की जनगणना के सामने झुकते हुए बीजेपी शासित राज्यों...

  • न्याय का मज़ाक उड़ाती : बुलडोजर कार्रवाई…!

    भोपाल। आरोपी को अपराधी बनाने की कार्रवाई है प्रशासन द्वारा आरोपियों के घरों को गिराना। भले ही वह घर या मकान किसी और की मिल्कियत हो ! अब ऐसे मंे अगर परिवार के कोई लड़का कोई अपराध करता है, तब सज़ा उसके परिवार को प्रशासन देता है ! अब ऐसी कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह कथन कि हम इस कार्रवाई को नहीं रोक सकते हंै ! न्याय के सिधान्त का मखौल ही उड़ना ही तो है। यह मध्ययुगीन काल के सुल्तानों की कार्रवाई की याद दिलाता है जब हुकुमरान की नाराजगी परिवार को नेस्तनाबूद कर देती थी। आजकल हम...

  • हम चुने जन प्रतिनिधि, लेकिन तुम उम्मीदवार कैसे चुनो.!

    भोपाल। मध्य प्रदेश में 2023 के विधान सभा चुनावों में पार्टी के टिकट यानि की उम्मीदवारी का “बी” फार्म पाने के लिए जैसा घमासान मचा है, वैसा विगत चालीस सालों मंे नहीं देखा गया। यह बात मैं खुद के अनुभव से कह रहा हूँ। सवाल उठता है कि ऐसा क्यंू? कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां इसमें फांसी हुई हैं, इन पार्टी के बड़े नेताओं को भरोसा है कि नाम वापसी तक सब ठीक कर लेंगे ! लेकिन जिले स्तर के जिन नेताओं को जनता में अपनी जमीन की पकड़ का भरोसा है, वे तो नामांकन भी दाखिल कर आए...

  • मंदिर का परिचय उसके देवता से या कि उसे बनवाने वाले से

    भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चित्रकूट में मफ़तलाल के मंदिर में हुए समारोह में भाग लिया, उनकी कुछ घंटों की यात्रा का खर्च सिर्फ 90 से 97 लाख का खर्च जिला प्रशासन को आया है! वैसे अयोध्या के राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से, पर निर्माण का खर्च भारत सरकार दे रही है। पर निर्माण कार्य में विश्व हिन्दू परिषद का ही बोलबाला है ! वैसे इसकी सदारत एक आईएएस अफसर नृपेन्द्र मिश्रा कर रहे है, जिन्हें अपनी सेवा मे लाने के लिए मोदी जी ने नियुक्ति के नियमो को ही बदल डाला था !...

  • बिग फाइव को हैसियत बताते छोटे-छोटे लोग..!

    यूक्रेन में रूस और अफगानिस्तान में अमेरिका की ताक़त को दुनिया देख ही चुकी है.! अब इज़राइल के जरिये फिर अमेरिका की साख एक बार दांव पर लगी है। रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण के समय दंभपूर्वक कहा था की यह कुछ ही दिनो की बात है, जब यूक्रेन पर हमारी सेनाएं काबिज होंगी। पर आज साल भर होने को आया हालत क्यू की त्यु है। अफगानिस्तान को भी सभ्य बनाने चले अमेरिका को जिस हड़बड़ी में मुल्क को छोडना पड़ा वह दुनिया के सामने है। हवाई जहाज और अनेक फौजी सामान छोड़ कर सैनिको को लेकर उड़ गए थे।...

  • इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष: अभिमन्यु का चक्रयूह में प्रवेश हो गया….

    भोपाल। फिलिस्तीन और इज़राइल के मध्य हो रहे सघर्ष को महाभारत के उस प्रकरण से समझा जा सकता है जिसमें कौरवों के चक्रव्यूह को भेदने के लिए अभिमन्यु ने सात – सात महारथियों से युद्ध किया, था। उसी प्रकार आज फिलिस्तीनियों के साथ अरब राष्ट्रों की चुप्पी और विश्व की महा शक्तियों का इज़राइल को अनैतिक समर्थन ही हैं। इज़राइल और फिलिस्तीनियों का संघर्ष की नीव अंग्रेज़ों द्वारा वालफोर संधि से 1948 में ही हो गया था, जब तीन मित्र राष्ट्रों (ब्रिटेन – फ्रांस और अमेरिका) ने अरब बहुल क्षेत्र में हिटलर के शिकार यहूदियों को उनका राष्ट्र बना कर...

  • सांप्रदायिक उन्माद कश्मीर और मणिपुर

    भोपाल। मणिपुर में शांत मैतेई इलाके में भीड़ द्वारा बीजेपी के प्रांत अध्यक्ष के निवास पर हमला और आगजनी की घटना सबूत है कि प्रांत की सरकार का हालत का आंकलन कितना गलत है ! हालांकि इस निवास में हमले के समय कोई नहीं था इसलिए जान की कोई हानि नहीं हुई, परंतु इस वारदात से यह साफ हो गया कि अब मैतेई समुदाय भी सरकार से असंतुष्ट है। क्यूंकि भीड़ में इसी समुदाय के लोग थे ! अब गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर के पुलिस अधीक्षक बलवाल को मणिपुर भेजा गया है। इस हवाई नियुक्ति से क्या कोई...

  • मोदी का सम्मोहन खत्म हो रहा है…..?

    भोपाल। तीन राज्यों में विधान सभा चुनावों का ताप बढ़ने के साथ मोदी जी के हवाई दौरे और आभासी उद्घाटनों के सरकारी आयोजनों की सूचना के विज्ञापनों से भरे समाचार पत्रों के बाद भी भीड़ एकत्र करने का दायित्व भी पार्टी का नहीं – सरकार की जिम्मेदारी है ! परंतु ऐसे आयोजनों में उनके भाषण अभी भी कॉंग्रेस केंद्रित होते हैं, अब ऐसे अवसर पर दलीय प्रचार कितना उचित है। यहां पर इलाहाबाद उच्च न्यायलय का जस्टिस जगमोहन लाल का विख्यात फैसले का जिक्र करना जरूरी है, जिसमें उन्होंने इन्दिरा गांधी जी के रायबरेली से संसद के चुनाव को सिर्फ...

  • चुनावी राजनीति में सामाजिक और धार्मिक वेश में दखल…?

    भोपाल। देश के चुनावों में राजनीतिक दलों की भागीदारी तो जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 के तहत विधिमन्य है, परंतु देश के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 1952 से ही एक तथाकथित सामाजिक संगठन की दखलंदाज़ी रही है। जी हाँं राजनीतिक पार्टी जनसंघ का जन्म, नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के यहां हुआ था। जो अपने आपको सामाजिक संगठन कहता है परंतु जनसंघ के जनता दल में विलय हो जाने के बाद फिर मुंबई में भारतीय जनता पार्टी के रूप में उदय हुआ। लेकिन संघ उसी पुराने तेवर और रंग ढंग में बना रहा। कहने को सामाजिक संगठन है। न इस संगठन...

  • सनातन धरम के हिन्दू ठेकेदार…!

    भोपाल। द्रविड़ मुनेत्र कडगम के मंत्री उदयनिधि के कथन पर बीजेपी ने इंडिया गठबंधन के दलों से जवाब तलब किया है। उन्होंने कहा था की डेंगू की भांति सनातन का विरोध नहीं करना, वरन निर्मूल करना है। वाकई में यह बयान ना तो उचित है और ना ही किसी को ऐसा बोलना चाहिए। परंतु बीजेपी और मोदी भक्तों ने जिस प्रकार इस ब्यान मात्र को राजनीतिक चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं – वह भी उतनी ही अनुचित और गलत है। पहले तो उस प्रष्टभूमि को जानना जरूरी है – जिसमें डीएमके निकला है। तमिलनाडु में सदियों तक...

  • एक देश एक चुनाव सत्ता का रास्ता नहीं बन सकता…?

    भोपाल। नरेंद्र मोदी जी का नया शगूफा है, वे हमेशा कुछ बाजीगरी के तिकड़म के अनुसार गेली गेली करके जनता को भरमाते रहे हैं। पहले उनके टीवी पर आगमन के समय जैसे ही भाइयों और बहनों कहते थे लोग किसी अनिष्ट की आशंका से भर जाते थे। पर उनकी पार्टी के मीडिया सेल द्वारा आमजन की दहशत को देखते हुए उन्होंने अब नया मेरे देश के परिवारजनों से अपना भाषण शुरू करते हैं। विपक्षी दलों के गठबंधन आईएनडीआईए यानि इंडिया की बैठकों के बाद उनके सम्बोधन में यह परिवर्तन आया है। वैसे बीजेपी और आरएसएस की युति हमेशा अपने लश्कर...

  • दिल्ली दरबार से क्या नागरिकों और देश के सवाल का समाधान होगा…!

    भोपाल। जी-20 के राष्ट्रों के शासनाध्यक्षों और राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन की तैयारी और प्रचार ना केवल सरकार वरन सत्ता दल द्वारा भी पूरे ज़ोर –शोर से किया जा रहा है। परंतु प्रश्न यही है कि क्या, इन सब तैयारियों से क्या सीमा पर चीन की चुनौती और मणिपुर में जातीय संघर्ष तथा उत्तर पूर्व राज्यों में और हिमालय के प्रदेशों में बाढ़ की मार सह रहे लाखों - लाखों नागरिकों को कोई राहत मिलेगी ! शायद नहीं, परंतु एक राष्ट्र के रूप में यह एक कूटनीतिक दायित्व है, जिसे निभाना होता है। परंतु एक कहावत है कि यह एक गलत...

  • क्या लाड़ली बहनों के भाई और बच्चों के मामा मुख्यमंत्री रहेंगे?

    भोपाल । आगामी विधान सभा चुनावों की जंग को सत्तारूद पार्टी यानि की बीजेपी, किसी अनाम चेहरे के लिए ही लड़ रही हैं| यह तथ्य केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर की प्रैस कोन्फ्रेंस में खुलकर सामने आ गया! जब उनसे पूछा गया की जिस व्यक्ति ने विगत चार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का चेहरा बन कर प्रदेश में अगुवाई की हो उसे पाँचवी बार राज्य का नेत्रत्व करने से वंचित रखना वैसा ही हैं, जैसे राजा नरेंद्र मोदी के नाम और परचम के लिए सूबेदार लड़ रहा हो !! आखिर क्यूँ ऐसा हो रहा हैं? नरेंद्र सिंह तोमर के जवाब के अनुसार, राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका निर्णय पार्टी का संसदीय बोर्ड ही तय करेगा! यह आम तौर पर तब होता है जब एक से अधिक लोग मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो! परंतु जिस व्यक्ति ने राज्य का बीस साल तक नेत्रत्व किया हो, उसके भविष्य...

  • 76 वीं आज़ादी की वर्षगांठ पर– लालकिला से सबोधन

    भोपाल। विधि और न्याय व्यवस्था के कानूनों में परिवर्तन का दावा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा को बताया कि मोदी जी ने विगत में तीन प्रण लिए थे जिनमें एक था गुलामी की निशानियों को मिटा देंगे। फ़ौजदारी और साक्ष्य कानून में संशोधन के विधेयक पेश करते हुए उन्होंने कहा। अब मोदी जी और शाह साहब के पहले के बयानों की तरह यह भी हकीकत से बहुत दूर है। मोदी जी जब - जब लाल किले से कहेंगे कि मैं आज़ादी की (76 वीं) वर्षगांठ पर देश को बधाई देता हूँ, तब आखिर वे यही तो...

  • एक या दो नहीं बल्कि 180 अपराधों में जेल की सजा से छुट्टी

    भोपाल। भारत सरकार के 42 मंत्रालयों के 48 कानूनों के 182 प्रावधानों में संशोधन करके मोदी सरकार के जन विश्वास विधेयक को संसद से पारित होने के हफ्ते भर के भीतर ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देश में निर्मित कफ सिरप को जानलेवा घोषित कर दिया ! मोदी सरकार ने दावा निर्माताओं को राहत के नाम पर दवाओं में मिलावट पर जेल की सज़ा को खत्म कर दिया हैं। यानि कि अब मिलावट से अगर लोगों की मौत भी होती है तब भी उन पर फ़ौजदारी कानून के तहत मुकदमा नहीं चलेगा। क्यूंकि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के तहत, मिलावटी खाद्य...

  • इनकाउंटर और बुल्डोजर संस्कृति पर लगाम

    भोपाल। हैदराबाद में एक लड़की से बलात्कार और हत्या के मामले में, पुलिस ने दो–तीन दिन में ही तथाकथित आरोपियों को गिरफ्तार किया फिर मौका मुआइना के नाम पर घटनास्थल पर ले जाकर उन पर भागने का आरोप लगाकर गोली मार दी ! उस समय बलात्कार की घटना से उत्तेजित जनसमूह ने इसे फौरी न्याय बताते हुए पुलिस की वाहवाही की। परंतु कुछ समय बाद खुफिया विभाग की जांच में यह पाया गया कि पुलिस ने तीन निर्अपराध लोगों की हत्या कर दी है ! तब अखबारों में इस त्वरित न्याय से होने वाले अन्याय को लेकर खबरंे छपीं। कुछ...

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