• मुश्किल है नाथ का हाथ छोड़ कमल का होना…

    भोपाल । देशभर में चर्चा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ हाथ का साथ छोड़ कमल का दामन थामने वाले हैं। यद्द्पि यह सब इतना आसान नहीं है जितना सुनने - देखने में लगता है। भाजपा के भीतर भी इसे लेकर बहुत सकारात्मक चर्चाएं नहीं है। वरिष्ठता के मान से देश की राजनीति में कमलनाथ एक बड़ा नाम है। नाथ व उनके समर्थकों को भाजपा की रीतिनीति में एडजस्ट करना भी आसान नही होगा। मप्र में कांग्रेस छोड़ कर आए ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनके समर्थकों को भाजपा में एकरस होने में और भाजपा को उन्हें अपने...

  • उम्मीदों के आसमां पर मोहन सरकार…

    भोपाल। नए साल 2024 के पहले दिन सियासत, समाजसेवा और परीक्षा व प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धा करने वाले सभी जांबाजों के लिए शुभकामनाएं। जिन्हें मंजिल मिल गई है उन्हें ढेरों बधाइयां। मगर ध्यान रहे कामयाबी की बारिश और असफलताओं की बाढ़ के साथ ही जीवन की परेड भी जारी है। इसमें जो मंजिल पर पहुंच गए हैं वे घमंड ना करें और जो पीछे रह गए हैं वह गम ना करें। सबको पता है जब परेड होती है तो उसमें अबाउट टर्न याने पीछे मुड़ की कमांड भी दी जाती है। इसलिए जो पीछे हैं वे निराश न हों ... पता...

  • भैया- मामा के बाद मोहन दादा की सरकार…

    भोपाल। ­मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री चयन और सरकार के कामकाज को लेकर छाई अनिश्चितता डॉ मोहन यादव के मुख्यमंत्री शपथ विधि समारोह के साथ दूर हो गई। सरकार की चाल- चरित्र और मंत्रिपरिषद का चेहरा भी सोमवार की दोपहर बाद धूप ढलते ही कैबिनेट विस्तार के साथ साफ हो जाएगा। इतना तो तय माना जा रहा है कि मोहन दादा की सरकार भैया- मामा वाली भावुकता, लिहाज और उदारता वाली शिवराज सरकार से अलहदा रहने वाली है। प्रशासन में कड़े अनुशासन और कठोर कानून व्यवस्था की छाप दिखाई देगी। राम काज के बाद सरकार कृष्ण कार्य को विस्तार देगी। मालवा...

  • निष्ठुरता और परिवर्तन ने विदा किया शिवराज को…

    भोपाल। भाजपा और कांग्रेस के साथ देश के दलों में पीढ़ी परिवर्तन का दौर चल रहा है। इसके चलते अगले छह महीने में सूबे और सेंट्रल की सियासत से कई दिग्गज विदा होते दिखाई देंगे। मध्यप्रदेश से चार बार के मुख्यमंत्री होने का रिकार्ड बनाने वाले शिवराज सिंह चौहान की विदाई इसी बदलाव का जबरदस्त संकेत है। मप्र में पार्टी ने पहले ही साफ कर दिया था कि अबकी बार नया नेता सीएम होगा। लेकिन साढ़े अट्ठारह साल की एन्टीइनकबेंसी बीच मोदी के नाम पर बेटियों और बहनों ने जब भाजपा को 163 सीटों पर जीत दिलाई तो लगा क्या...

  • सियासत में खल्क खुदा का मुल्क बादशाह का हुकुम कोतवाल का…

    भोपाल। भाजपा में खल्क मोटा भाई का मुल्क छोटा भाई का और हुकुम अध्यक्ष का। केंद्रीय नेतृत्व से आए लिफाफे के खोलने के साथ ही छत्तीसगढ़ में सीएम के लिए आदिवासी नेता विष्णुदेव साय का नाम घोषित हो गया है। सोमवार दोपहर बाद मप्र में भी विधायक दल की बैठक के साथ ही कौन बनेगा सीएम..? के सवाल का उत्तर भी मिल जाएगा। यद्दपि मप्र में भी राजस्थान की भांति सीएम का सिलेक्शन छत्तीसगढ़ जितना आसान नही होगा। राजस्थान में महारानी वसुंधरा की ठसक है तो यही काम मप्र के नेता विनम्रता से करते दिख रहे हैं। छग में भाजपा...

  • सनातन विरोध और बहनों की लहर पर मोदी-मामा का मैजिक…

    भोपाल। मध्यप्रदेश- राजस्थान और छत्तीसगढ़ में लाडली बहनों और किसानों की लहर पर सवार भाजपा ने इतिहास रच दिया। मप्र में मोदी और मामा शिवराज के मैजिक से कांग्रेस परास्त हो गई। राहुल गांधी ने कहा था मप्र - छग में कांग्रेस क्लीन स्वीप करेगी लेकिन कर दिया भाजपा ने। सम्भवतः पहली दफा कांग्रेस को सनातन विरोध व हिंदू विरोधियों को मौन समर्थन देने की भारी कीमत चुकानी पड़ी। विशेषज्ञ साफ्ट माने जाने वाले सनातनियों के इस बदलते रवैये को बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं। जानकार और जिज्ञासु अवश्य इसका विश्लेषण करेंगे। चुनावी नतीजों ने साफ कर...

  • कौन बनेगा उम्मीदवार ने की दावेदारों की धड़कनें तेज…

    भोपाल । मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर हर दिन भाजपा, कांग्रेस, आप, सपा- बसपा से कौन बनेगा उम्मीदवार किसको मिलेगा टिकट और किस दिग्गज का होगा पत्ता साफ,किसकी सीट बदलेगी, कौन लेगा सन्यास। किसे लड़ाएंगे लोकसभा का चुनाव , किसे बैठाएंगे घर ? इस आशंका ने बड़े बड़े को चिंता में डाल दिया है। कहा जाता है कि मोदी है तो सब मुमकिन है। भाजपा उम्मीदवारों की अब तक की तीन फेहरिस्त ने सबकी नींद उड़ा रखी है। ऐसी बातों और उलझन भरे सवालों को लेकर दावेदारों की धुकधुकी तेज हो रही है। उनके समर्थकगण प्रत्याशियों की सूची...

  • बुझ चुका है तुम्हारे हुस्न का हुक्का…

    चुनावी दल और कार्यकर्ता भोपाल। बदलते चुनावी परिवेश में प्रचार और प्रबंधन ने ऐसा बघार लगाया है कि सारे मानक उलटपुलट हो रहे हैं। अपने पैसे खर्च कर महीनों, हफ़्तों और वोटिंग के दिन काम करने वाले कार्यकर्ताओं की भागीदारी घट रही है। हरेक दल में यह हर चुनाव में गहरे तक पैठ बना रहा है। पुराने नेता-कार्यकर्ता मुंह फाडे हक्के बक्के नैतिकता के चढ़ाव का उतार देख रहे हैं। उनकी मनोदशा को व्यक्त करने मशहूर हास्य कवि काका हाथरसी की दो पंक्तियां काफी है- “बुझ चुका है तुम्हारे हुस्न का हुक्का। ये तो हमीं है जो गुड़गुड़ाए जाते हैं...”।...

  • प्रियंका तो बहाना था महाराज को ललकारना था…

    भोपाल। मध्य प्रदेश की चुनावी राजनीति इन दिनों ग्वालियर -चंबल और विंध्य क्षेत्र के बीच केंद्रित हो रही है। ग्वालियर राजघराने और राघोगढ़ के बीच सम्बन्ध सामान्य कम तनावपूर्ण ज्यादा रहे। लेकिन दोनों घरानों के मुखिया जब तक कांग्रेस में रहे उनके तनावों ने मर्यादा की सीमा को छुआ जरूर मगर उसे पार नही किया। अब ऐसा नही है। हालात बदल गए है। कमलनाथ सरकार में कथित रूप से उपेक्षित और सार्वजनिक रूप से 'सड़क पर उतर जाएं' जैसे वाक्यो से आहत महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ नाथ की सरकार गिरा दी थी। इसके बाद राघोगढ़ के राजा रहे...

  • मप्र भाजपा के ट्रम्प कार्ड हैं नरेंद्र तोमर…

    भोपाल। ताश के 52 पत्तों की तरह राजनीति में भी देहला पकड़ का खेल अब तेज हो गया है। मध्यप्रदेश की सियासत में कांग्रेस ने दिग्विजयसिंह की संगठन शक्ति के चलते भाजपा को तगड़ी चुनौती देना शुरू कर दिया है। इसके चलते 2003 से सत्ता सुख ले रहे भाजपा नेताओं में चिंता की लकीरें देखी जा रही है। महीनों की मशक्कत के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व ने दिग्विजयसिंह की काट के रूप में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मैदान में उतारा है। अत्यंत कठिन दौर, दुविधा और ऊहापोह के बीच उन्हें प्रदेश भाजपा चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक बनाया गया...

  • भाजपा गिरवी है विधायकों के पास…

    भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा के हाल अच्छे नहीं है इसकी वजह कार्यकर्ता और नेता कम बल्कि दिल्ली और संघ से भेजे गए उनके चहेते अधिक दोषी हैं। कड़वा है मगर सच यही है। कर्नाटक में भाजपा की हार के बाद सूबे में पार्टी के वफादार चिंतित हैं। हालात यह है कि मंडल से लेकर जिला अध्यक्ष और उनकी टीम के पदाधिकारी संगठन की बजाए विधायकों की पसंद के बनाए गए हैं। ऐसे में उनकी निष्ठा संगठन को छोड़ विधायकों के प्रति ज्यादा हो गई है। पार्टी काडर कमजोर नही बल्कि ध्वस्त कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। मंडल से जिला...

  • भाजपा को हर घण्टे नुकसान…

    भोपाल । संगठन की दृष्टि से देश में सबसे मजबूत राज्य माने जाने वाले मध्य प्रदेश में भाजपा अपने बुरे और सर्वाधिक उथल-पुथल के दौर में फंसी हुई है। दीपक जोशी का कांग्रेस में जाना आने वाले दिनों में तूफान का संकेत देता है। कई दीपक हैं जिनकी लौ फड़फड़ा रही है। आशंकाओं के बीच आशा की जा रही है कि कर्नाटक में मतदान के बाद पार्टी नेतृत्व कुछ बड़ा करेगा। वरना अभी तो हर घण्टे के हिसाब से पार्टी के नुकसान का मीटर डाउन है और इसी अनुपात में कांग्रेस के लाभ का भी। भाजपा में शिकायत है कि...

  • भाजपा में कसावट की भनक, कांग्रेस में जीत का जुनून…

    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में कल क्या होगा ...? इसका उत्तर 13 मई कर्नाटक चुनाव नतीजे के बाद आएगा। कांग्रेस और भाजपा में कौन पद पर बना रहेगा बचेगा, कौन जाएगा, किसका कद बढ़ेगा किसका घटेगा यह सब मई के दूसरे सप्ताह से तय होना शुरू हो जाएगा। प्रदेश के दो बड़े दल कांग्रेस-भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कर्नाटक चुनाव में व्यस्त है इसलिए राज्य की राजनीति और नेताओं के बारे में सब कुछ पता होने के बाद भी फैसलों की घोषणा होने में 15 दिन का वक्त तो लगेगा । सूबे में भाजपा को लेकर अगर सोचे तो 15...

  • भाजपा और कांग्रेस: जो दल बगावत रोकेगा वही जीतेगा…

    भोपाल। मध्यप्रदेश समेत चार राज्यों में विधानसभा चुनाव इस साल के आखिर दिसंबर तक होना है। सियासी हलको से लेकर जनता के बीच यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर अगली सरकार किसकी बनेगी..? 2018 की भांति मप्र में मुकाबला कांटे का दिख रहा है। इस बार आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ऊवेसी की पार्टी ऑल इंडिया मजसिल ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन की एंट्री चुनाव को और भी दिलचस्प बनाएगी। ये दोनों दल भाजपा और कांग्रेस के बागियों के लिए लॉन्चिग पेड की तरह काम करेंगे। इससे दोनों ही दलों की मुश्किलें बागियों को रोकने में पहले से ज्यादा बढ़...

  • संविधान निर्माता ही नहीं, समानता के देवदूत डॉक्टर भीमराव अंबेडकर

    भोपाल। भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को देशभर में ही नहीं, अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के संविधान निर्माता के रूप में जाना पहचाना जाता है। किंतु यह उनका आधा अधूरा परिचय है। वास्तव में तो डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एक ऐसे देवदूत थे, जिन्होंने भारतीय जनमानस के भीतर गहरे तक बैठे हुए छुआछूत के रोग से लगाता संघर्ष किया। डॉक्टर अंबेडकर तत्समय अछूत कहे जाने वाले वर्ग के लोगों को उनका अधिकार दिलाने में भी काफी हद तक सफल साबित हुए। चूंकि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर स्वयं भी एक दलित परिवार में जन्मे थे। लिखने में कोई संशय नहीं है कि...

  • रोकें तो वोट कटें, न रोकें तो के जंगल…

    भोपाल। वोटों से झोली भरने वाली 'लाडली बहना' स्कीम की लॉन्चिंग के साथ फ्रंट फुट पर आई शिवराज सरकार इन दिनों वोटों के गुणाभाग को लेकर अजीब सी दुविधा में है या यूं कहें धर्म संकट में है। मसला खंडवा, खरगोन और बड़वानी के जंगल साफ होने बाद अब  नेपानगर (बुरहानपुर)के नावरा फॉरेस्ट रेंज का है। जंगल और आदिवासियों से जुड़ा है। दरअसल, प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में एक तरह से जंगल में डाका डालने का जैसा जघन्य अपराध हो रहा है। इसमें आदतन अपराध करने वाले माफिया सैकड़ों आदिवासियों के गिरोह को लेकर जंगल पर रातों-रात कब्जा करते...

  • लाडली बहना: अब आधी आबादी के दिलों में शिवराज…

    भोपाल। पांव - पांव वाले शिवराज सिंह चौहान राजनीति में नई हवा बनाने वाले युवा तुर्क मुख्यमंत्री बने तो कन्यादान योजना लाडली लक्ष्मी के साथ सूबे की सियासत में सबके दिमाग पर छा गए। अब जब उनके तरकश में सियासतदां नए तुणीर तलाश रहे थे तब उन्होंने रिटर्न गिफ्ट के तौर पर एक हजार रु हर महीने 'लाडली बहना' का ऐसा तीर चलाया जो आने वाले चुनाव में जीत का ब्रह्मास्त्र बन सकता है। यह रिटर्न गिफ्ट सरकार रिटर्न करा सकता है। 5 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जन्मदिन भी मनाया गया और ऐसे मौके पर बेटियों के...

  • शिव और कमल : सवालों को लेकर अखाड़ेबाजी

    भोपाल। नित नए रंग बदलती सूबे की सियासत में इन दिनों सवाल- जवाब फिजा में अलग ही रंगत घोल रहे हैं। करवट बदल रही सर्दी में मौसम अब गुलाबी हो रहा है। सवालों और जवाबों की इस अखाड़ेबाजी में देखना दिलचस्प होगा कि कौन किसे पटखनी देता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सवाल सियासी गर्माहट में इजाफा कर रहे है। कमलनाथ और उनकी टीम के जवाब संजीदापन कम हास- परिहास का मुद्दा ज्यादा बना रहे। भला बताइए प्रतिद्वंदी राजनीतिक दल के वादों को कोई सरकार कैसे पूरा करेगी। तंगदिली के दौर में ऐसा करने की बातें भी खमठोंक कर...

  • राजनीति अर्थात ‘मैं चाहे जो करुं मेरी मर्जी…

    भोपाल। लोकतंत्र में राजनीति का अर्थ सत्ता के जरिए सुशासन लाना सबसे अहम माना गया लेकिन अब ज्यादातर सियासत और सत्ता में मनमानियां ज्यादा हो गई है कह सकते हैं जो राजनीति में महत्वपूर्ण पद पर है वह चाहे कुछ भी करें उनका कोई बाल बांका नहीं कर सकता। एक भाजपा कार्यकर्ता ने नए साल की शुभकामना देते हुए बड़ी सहजता से सोशल मीडिया पर मशहूर फिल्मी नगमे का प्रयोग किया है। जिसकी पंक्ति है ' मैं चाहे ये करुं मैं चाहे वो करुं मेरी मर्जी'...दिल्ली से भोपाल तक भाजपा कांग्रेस जैसी राजनीतिक पार्टियों के चाल चलन और घटनाक्रम को...

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