• शंघाई सहयोग संगठन में असहज हो गया है भारत?

    शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने अपने 24वें शिखर सम्मेलन के साथ एक नया मुकाम तय किया है। कजाख़स्तान की राजधानी अस्ताना में हुए इस शिखर सम्मेलन के साथ ही एससीओ प्लस के सरकार प्रमुखों की बैठक भी हुई। यानी सीएसओ के नौ पूर्ण सदस्यों के अलावा इसमे पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) का दर्जा रखने वाले तीन देशों और 14 डायलॉग पार्टनर देशों के नेताओं को भी बुलाया गया। इसके अलावा अतिथि के तौर पर तुर्कमेनिस्तान इसमें शामिल हुआ। इसी यानी अतिथि की श्रेणी में कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भी भागीदारी हुई। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से महासचिव एंतोनियो गुटारेस खुद आए। संयुक्त...

  • फ्रांसीसी चुनाव: ‘लेफ्ट’-‘लिबरल’ का सच

    ‘लेफ्ट-लिबरल’ कितना विरोधाभासी है, उसका जीवंत उदाहरण फ्रांस के हालिया संसदीय चुनाव में देखने को मिल जाता है। जब पहले चरण के चुनाव में दक्षिणपंथी ‘नेशनल रैली’ गठबंधन ने वामपंथी दलों के ऊपर निर्णायक बढ़त बनाई और उसकी प्रचंड जीत की संभावना बनने लगी, तब इसी ‘लेफ्ट-लिबरल’ गिरोह के चेहरे से ‘लिबरल’ मुखौटा एकाएक उतर गया। वास्तव में, ‘लेफ्ट-लिबरल’ संज्ञा किसी फरेब से कम नहीं। यह दो अलग शब्दों को मिलाकर बना है, जिनका रिश्ता पानी-तेल के मिलन जैसा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जहां वामपंथ होता है, वहां उसके वैचारिक चरित्र के मुताबिक हिंसा, असहमति का दमन, मानवाधिकारों का हनन...

  • देश में अल्पसंख्यक कौन है?

    यह यक्ष प्रश्न है कि भारत में अल्पसंख्यक कौन है? उसकी परिभाषा क्या है? उसका आधार क्या है, धार्मिक या भाषायी या कुछ और? उसका अखिल भारतीय और राज्यस्तरीय पैमाना एक ही है या अलग अलग है? क्या जितने गैर हिंदू हैं सब अल्पसंख्यक हैं? इन सवालों के जवाब तलाशने की जरुरत है। कोई पांच साल पहले सुप्रीम कोर्ट में यह मामला पहुंचा था और तब सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को निर्देश दिया था कि वह अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करे। लेकिन पांच साल बाद भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिल पाया है। हालांकि यह जरूर...

  • आख़िर किसके दबाव में है नागरिक उड्डयन मंत्रालय?

    जब भी किसी बड़े उद्योगपति, अभिनेता, मशहूर हस्ती या राजनेता को हवाई यात्रा करनी पड़ती है तो वे अक्सर निजी चार्टर सेवा को ही चुनते हैं। निजी चार्टर सेवा महंगी तो अवश्य पड़ती है परंतु मशहूर हस्तियों को अपनी सुविधा अनुसार यात्रा करना और समय बचाना काफ़ी सुविधाजनक लगता है। इसी के चलते हमारे देश में निजी चार्टर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। साधारण एयरलाइन की तरह निजी चार्टर कंपनियों को भी देश के कानून का पालन करते हुए ही ये सेवाएं चलाने दी जाती हैं। नागरिक उड्डयन के सभी नियम और...

  • राजनीतिक विभाजन कहां तक पहुंच गया

    भारत की राजनीति इतनी विभाजित कभी नहीं रही, जितनी अभी है। पार्टियां और नेता एक दूसरे को अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं मान रहे हैं, बल्कि शत्रु मान रहे हैं। एक समय था जब कहा जाता था कि सब नेता मिले होते हैं। लोग देखते भी थे कि संसद में या विधानसभाओं में या राजनीतिक कार्यक्रमों में एक दूसरे के खिलाफ आग उगलने वाले नेता निजी कार्यक्रमों में एक दूसरे के गले मिलते थे। राजनीति से इतर उनके आपस में अच्छे संबंध होते थे। पक्ष और विपक्ष के नेता आपस में मिलते जुलते थे, बातें करते थे। लेकिन अब यह परंपरा...

  • सूडान पर ध्यान देने की जरुरत

    सूडानवासी दुनिया के सबसे बड़े विस्थापन संकट की पीड़ा झेल रहे हैं। लेकिन किसी को उनकी फिक्र नहीं है। और हो भी क्यों? क्या सूडान हमेशा से उथल-पुथल और उत्पातों के लिए जाना नहीं जाता रहा है? क्या अकारण टकरावों में उलझे रहना ही इस अफ्रीकी देश की किस्मत नहीं है? सूडान पश्चिमी ताकतों की प्राथमिकता की सूची में हमेशा से बहुत नीचे रहा है। शक्तिशाली पश्चिमी नेताओं की इस देश में न के बराबर रूचि है। वे या तो प्रतिबंध लगाकर उसे दुनिया से अलग-थलग कर देते हैं, या फिर, जैसा कि उन्होंने क्रांति के बाद किया, जल्दबाजी में...

  • सीबीआई जाँच के लिए, राज्य की मंजूरी जरूरी.?

    भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले के माध्यम से अब तक चली आ रही उन दुर्भावनापूर्ण सीबीआई जांचों पर पाबंदी लगा दी है, जिसका अब तक मुख्य आधार राजनीतिक विद्वेष होता रहा है, अब सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट निर्देश दे दिया है कि किसी भी राज्यके किसी भी मामले में सीबीआई बिना राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के शुरू नही कर सकती, अब तक केन्द्र में काबिज राजनीतिक दल अपने विरोधी दलों की राज्य सरकारों को सीबीआई के हथियार से डराया धमकाया करते थे और राज्य सरकार कुछ नही कर पाती थी, अर्थात् केन्द्र में राज करने...

  • चीन की चिंता में मोदी की मॉस्को यात्रा

    क्या दृश्य था.! अस्त होने के ठीक पहले का नर्म सूरज पेड़ों के पीछे से झांक रहा था। उसकी रोशनी दो प्रसन्नचित्त पक्के दोस्तों पर पड़ रही थी जो पांच साल के बाद मिले थे। इस मुलाकात से वे दोनों कितने रोमांचित थे, यह उनके गर्मजोशी से गले मिलने से जाहिर था। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की यात्रा पर मास्को पहुंचे। वे कूटनीतिक उलझनों को कम करने और संबंधों और मजबूत बनाने के लिए बातचीत करने आए थे। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने निवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया और रूस आने के लिए...

  • क्षत्रपों को काबू में कर पाएंगे राहुल?

    लोकसभा चुनाव, 2024 में कांग्रेस की बढ़ी ताकत का इस्तेमाल क्या राहुल गांधी पार्टी को मजबूत करने और स्वतंत्र व बेलगाम क्षत्रपों को काबू करने के लिए करेंगे? यह लाख टके का सवाल है। हकीकत यह है कि लोकसभा चुनाव, 2024 से पहले तक कांग्रेस के प्रादेशिक क्षत्रप लगभग मनमाना आचरण कर रहे थे। आलाकमान यानी सोनिया और राहुल गांधी के लिए उनको निर्देश देना असंभव सा काम था। क्षत्रप आलाकमान का नाम लेते थे और उनके प्रति सार्वजनिक रूप से सम्मान भी जाहिर करते थे लेकिन करते अपने मन की थे। अगर कभी कांग्रेस आलाकमान को उनके खिलाफ कोई...

  • राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही कहां है?

    मानसून की पहली बारिश में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल एक की पार्किंग एरिया में कैनोपी यानी छत गिर गई। इस हादसे में आठ गाड़ियां दब गईं। इनमें से एक गाड़ी टैक्सी थी, जिसमें ड्राइवर बैठा हुआ था और छत गिरने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। दिल्ली हवाईअड्डे के साथ ही मध्य प्रदेश के जबलपुर और गुजरात के राजकोट हवाईअड्डे पर भी बिल्कुल इसी तरह की घटनाएं हुईं। जिस समय एक के बाद एक ये तीन घटनाएं हुईं उसी समय बिहार में पुल गिरने की खबरें आ रही थीं। एक पखवाड़े में कोई एक...

  • चिंता के साये में नाटो की 75वीं सालगिरह

    सोमवार को रूस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। जिस समय व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी से गलबहियां कर रहे थे और दोनों नेता कूटनीतिक ठहाके लगा रहे थे, उसी समय बहुत सारी मिसाइलें यूक्रेन के बच्चों के सबसे बड़े अस्पताल से टकराईं। ओखमाद्यित यूक्रेन का बच्चों का सबसे बड़ा अस्पताल है और कैंसर के इलाज के लिए विख्यात है। वहां बहुत से बच्चे कई महीनों से रह रहे थे। हमले में यह अस्पताल मलबे के ढेर में तब्दील हो गया और 36 लोग मौत के मुंह में समा गए। कीव का ओखमाद्यित अस्पताल काफी समय से यूक्रेन के...

  • अचानक से हुए अधूरे विस्तार को पूर्णता का इंतजार

    भोपाल। सोमवार की सुबह अचानक से हुए अधूरे विस्तार के बाद प्रदेश की सियासत में सरगर्मी है। केवल कांग्रेस से भाजपा में आए रामनिवास रावत को मंत्री बना दिया गया जबकि भाजपा के दिग्गज नेता इंतजार करते रह गए। शायद यही कारण है कि अमरवाड़ा विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी एक पूर्ण विस्तार करेगी जिसमें असंतुलन को साधा जाएगा। दरअसल, 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में बहुत कुछ परिवर्तित हो गया जिसकी पटकथा बहुत पहले से लिखी गई थी जिसमें केंद्रीय मंत्री और सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़वाया गया था तब भी लोगों को उम्मीद इन्हीं नेताओं...

  • जनगणना कब तक स्थगित रहेगी?

    नई लोकसभा का पहला सत्र संपन्न हो गया है और अब सरकार मानसून सत्र की तैयारी कर रही है, जिसमें वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश किया जाएगा। तीन जुलाई को खत्म हुए संसद सत्र में जनगणना को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। सवाल है कि 23 जुलाई को आने वाले बजट में क्या सरकार जनगणना की घोषणा करेगी और उसके लिए जरूरी धन का आवंटन करेगी? कायदे से यह भारत सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि जनगणना कराई जाए। हर 10 साल पर होने वाली जनगणना आखिरी बार 2011 में हुई थी। अभी तक सरकार उसी के आंकड़ों...

  • फ्रांस में गठबंधन का नया दौर

    केवल एक हफ्ते में फ्रांस में जनमत का पेंडुलम अति दक्षिणपंथ से वामपंथ की ओर खिसक गया है। यह बदलाव चौंकाने वाला और अनापेक्षित है। संसदीय चुनाव का अंतिम दौर रविवार को खत्म हुआ और ऐसा लगता है कि जोनिक मिनोशों के वर्चस्व वाला वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट यानी एनएफपी संसद में सबसे बड़ा गठबंधन बनने की ओर बढ़ रहा है। फ्रांस, यूरोप और सारा विश्व, जनता के मूड में आए इस अचानक बदलाव से चकित है। पिछले हफ्ते तक यह तय माना जा रहा था कि मरिन ले पेन सत्ता हासिल कर लेंगीं। जनमत संग्रहों से ऐसा अनुमान लगाया...

  • चुनाव हारे तो अयोध्यावासियों का बहिष्कार?

    जिन लोगों ने भी अयोध्यावासियों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है, वे किस श्रेणी के लोग हैं? या तो वे मूर्ख और अज्ञानी हैं, जिन्होंने शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया? या वे भक्त हैं ही नहीं और राम भक्त होने का झूठा दावा कर रहे हैं और अगर यह सब उन्होंने जानते-बूझते हुए किया है तो वे न सिर्फ़ ख़ुद घोर पाप कर रहे हैं, बल्कि अन्य भक्तों को भी पाप कर्म करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जब से लोकसभा चुनावों के परिणाम आए हैं तब से सोशल मीडिया पर व अन्य माध्यमों से ऐसी बातें सुनने...

  • उदार लोकतंत्र के लिए ब्रिटेन से आशा की किरण

    करीब 14 साल तक लगातार सत्ता में रहने के बाद इंग्लैंड की जनता ने कंजरवेटिव पार्टी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह नतीजा अवश्यंभावी और अपेक्षित था। लेकिन कंजरवेटिव पार्टी की इतनी बुरी गत होगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। कंजरवेटिव पार्टी संभवतः दुनिया का सफलतम राजनीतिक दल है। सन 1945 के बाद से वह जितने समय सत्ता से बाहर रहा है, उसके दोगुने समय तक सत्ता में रहा है। लेकिन अब वह विपक्ष में है। ब्रेक्जिट, महामारी और राजनीतिक उथल पुथल, जिसके चलते एक साल में तीन प्रधानमंत्री बदले, का मिलाजुला प्रभाव यह हुआ कि कंजरवेटिव...

  • मनमर्जियों-बदज़ुबानियों के बीच बदचलन होती सियासत…

    भोपाल। देश को विचित्र राजनीतिक दौर में धकेलने की कोशिशें होती दिख रही हैं। हालात ऐसे बन रहे है कि संसद से सड़क तक दुविधा, आक्रमकता अराजकता का वातावरण पनपता दिख रहा है। लोकसभा से लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा तक में दलों और नेताओं के बीच रिश्तों में सदन चलाने को लेकर समन्वय-सदभाव कम तल्ख़ी और शत्रुता का भाव ज्यादा दिखा। सदनों में पब्लिक प्रॉब्लम कम पॉलिटिकल टारगेट किलिंग की कूटनीति ज्यादा दिखी। मीडिया में भी सच बोलना और लिखना हर दिन कठिन होता जा रहा है।कभी सदन में जय फलीस्तीन के नारे लगते हैं तो कभी जय हिंदू राष्ट्र। यद्द्पि...

  • कार्यकर्ताओं को उत्साहित और नेताओं को नसीहत

    विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में भारी जीत से उत्साहित भाजपा की प्रदेश कार्य समिति में जहां कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने वाले और नेताओं को नसीहत देने वाले भाषणों से सराबोर रही, वहीं कुछ वक्ताओं ने कांग्रेस को भी जमकर कोसा। दरअसल, प्रदेश कार्यालय की बजाय रविंद्र भवन के विशाल सभागार में भाजपा की विस्तारित प्रदेश कार्य समिति की बैठक हुई जिसमें पहली बार सभी 1099 मंडल अध्यक्षों को भी बुलाया गया। इस दौरान पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं का जमकर उत्साहवर्धन किया और ऐसे नेताओं खासकर मंत्रियों और विधायकों को नसीहत दी जो पद के रुतबे में कार्यकर्ताओं और आम...

  • कौन चला रहा है अमेरिका का शासन?

    बाइडेन की जो दिमागी हालत है तो उसके मद्देजनर सवाल है कि  अभी अमेरिका का शासन कौन चला रहा है? यह संदेह पहले से है कि सत्ता की कमान बाइडेन के हाथ में नहीं है। बल्कि उनके आसपास के लोग शासन चला रहे हैं। इन लोगों में न्यूकॉन्स (new conservatives) की भरमार है। ये लोग मिलिट्री इंडस्ट्रीयल कॉम्पलेक्स से नियंत्रित हैं। इसीलिए उन्होंने ऐसी नीतियां अपना रखी हैं, जो दुनिया को तेजी से तीसरे विश्व युद्ध के लिए ले जा रही हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से सवा चार महीने पहले दोनों प्रमुख उम्मीदवारों जो बाइडेन और डॉनल्ड ट्रंप के...

  • सिर्फ मोदी है तो ही मुमकिन है…

    लोगों का जीवन स्तर बेहतर बनाने का लक्ष्य तभी प्राप्त हो सकेगाजब सरकार आर्थिक सुधारों की गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ाएगी। बैंकिंग से लेकर पूरी वित्तीय व्यवस्था में कई छोटे बड़े सुधारों की जरुरत है। इन सुधारों या ऐसे कहें कि नियमों को तर्कसंगत बनाने से कामकाज में सुगमता होगी, सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और कारोबारियों व आम लोगों को भी राहत मिलेगी। कुछ जरूरी सुधार करने और नियमों को तर्कसंगत बनाने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि विवादों में कमी आएगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार का तीसरा कार्यकाल आरंभ हो गया है और...

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