• मुकाबला: भागदौड़ और भागा-दौड़ी के बीच…?

    भोपाल । अब जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव निकट आते जा रहे है वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है, अभी से चुनाव के प्रथम चरण टिकट वितरण में ही भागादौड़ी और भागदौड़ के बीच स्पर्द्धा का माहौल है, एक ओर टिकट के लिए भागादौड़ी है, तो दूसरी ओर चुनाव लड़ने से बचने के लिए भागदौड़। आज प्रमुख प्रतिपक्षी दल कांग्रेस सहित किसी भी प्रतिपक्षी दल का बड़ा नेता चुनावी रण में उतरने को तैयार नही है, सभी अपने आपको टिकट देने वाले की कतार में रखना चाहते है, टिकट प्राप्त करने वालों की कतार में नही, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी...

  • भारत में फिर एक बार, चुनौती विहीन राजनीति…!

    भोपाल। इतिहास हर जगह अपने आपको दोहराता है, फिर चाहे राजनीति ही क्यों न हो? आज से अर्द्धशतक वर्ष पहले अपनी ‘दादागिरी’ के बलबूते पर जहां कांग्रेस नैत्री इंदिरा जी ने देश में आपातकाल लगाकर उन्नीस महीनें तक तानाशाहीपूर्ण शासन चलाया था और प्रतिपक्षी संयुक्त संगठनों को जेल में डाल दिया था, अब थोड़े कुछ बदलाव के साथ पुनः देश में वही हालात बनाने की तैयारी की जा रही हैI Lok Sabha election 2024 यह भी पढ़ें: कांग्रेस की चिंता में कविता की गिरफ्तारी इंदिरा जी के समय जनसंघ सहित अन्य दलों के नेताओं ने एकजुट होकर जनता पार्टी का...

  • सीएएः क्या मोदी ने उन्नीस में ही चौबीस की इबारत लिख दी थी…

    भोपाल । क्या नरेन्द्र भाई मोदी ने अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता का परिचय देते हुए अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के श्रीगणेश पर ही तीसरे कार्यकाल की इबारत लिख दी थी? यह सवाल आज इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्री देश भारत में सांसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) अब इक्यावन महीनों बाद लागू किया गया, जिसके माध्यम से मोदी ने अपनी अगली महाविजय की इबारत लिख दी, अब पूरे देश में एक साथ इस कानून के लागू कर दिए जाने से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश के उत्पीडन पीडित गैर मुस्लिम लाखों नागरिक जो पिछले दस...

  • ‘‘उलझी है सारी सियासत, चुनावी जाल में”…!

    भोपाल। आज देश व देशवासियों के हालात देखकर मुझे आज से करीब छः दशक पहले की फिल्म ‘मदर इण्डिया’ के एक प्रसिद्ध व लोकप्रिय गीत की कुछ पंक्तियां याद आ रही है, जिसमें आज की भविष्यवाणी करते हुए लिखा गया था- ‘‘जीवन का गीत है सुर में न ताल में, उलझी है सारी दुनियां रोटी के जाल में’’, अन्तर सिर्फ इतना हो गया है कि आज दुनिया रोटी के नहीं सियासत के जाल में उलझी नजर आ रही है, किंतु इस गीत की पहली पंक्ति ‘‘जीवन का गीत है, सुर में न ताल में’’ आज भी अक्षरशः अवतरित हो रहा...

  • राजनीति का नया इश्तिहार : परिवार पर वार…!

    भोपाल।अपने भारत के राजनीतिक दलों की अग्नि परीक्षा की तिथियां अगले सप्ताह घोषित हो जाएगी, किंतु देश का आम मतदाता आज के राजनेताओं के नए-नए चुनावी पैंतरों और दांवों को लेकर आश्चर्य चकित है, उसे सबसे बड़ा आश्चर्य इस बात को लेकर है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक के पचहत्तर सालों में जो नहीं हुआ, वह आज के राजनेता करने के मंसूबे बांध रहे है, अर्थात् अब तक के चुनाव आदर्श चुनाव संहिता के दायरे में लड़े जाते रहे है, किंतु अब न तो राजनीति में कोई ‘आदर्श’ रहा न ही चुनावों में, यही नहीं अब तो...

  • तारीख तय नहीः योद्धाओं की तैनाती…?

    भोपाल। भारत में हर पांच वर्ष में होने वाले राजनीतिक महासमर की तारीखें चाहे अभी तय नहीं हुई हो, किंतु ‘महाजीत’ के नारों के साथ राजनीतिक दलों ने अपने यौद्धाओं की तैनाती अवश्य शुरू कर दी है, देश पर राज कर रही भारतीय जनता पार्टी ने अपने आधे से अधिक उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर ‘अबकी बार चार सौ पार’ का नारा भी उछाल दिया है। जबकि मुख्य प्रतिपक्षी दल कांग्रेस ने अभी अपनी उपस्थिति तक दर्ज नहीं कराई है। Lok Sabha Election 2024 यह भी पढ़ें: 2024 के भारत में ऑरवेल का सत्य! आगामी पचास दिनांे में ही...

  • आचार संहिता के पहले समान नागरिकता कानून….?

    भोपाल। अपने तीसरे प्रधानमंत्रित्व काल के लिए अनेक घोषणाएं करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी की सरकार ने अपनी जीत को पक्की करने के लिए चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले अर्थात्ा अगले पखवाड़े से देश में समान नागरिक संहिता कानून लागू करने की मानसिकता बना ली है। Uniform civil code CAA लगभग चार साल से ज्यादा लम्बे समय के इंतजार के बाद केन्द्र सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून लागू करने का मन बनाया है, इसे अगले पखवाड़े अर्थात् मार्च के पहले हफ्ते में लागू किया जा सकता है, सरकार ने इसे लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है...

  • न्यायपालिका ही प्रजातंत्र की सही संरक्षक…!

    भोपाल। भारतीय प्रजातंत्र की हम सतहत्तरवीं वर्ष ग्रंथी मना रहे है, इस लम्बी अवधि के दौरान वैसे तो प्रजातंत्र के चारों स्तंभों न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और खबरपालिका की अपनी-अपनी भूमिकाएं रही, किंतु चूंकि खबरपालिका इन भूमिकाओं की विश्लेषक भी रही, इसलिए शेष तीन अंग कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका इसे अपना अंग मानने को आज भी सहमत नहीं है, इसलिए प्रजातंत्र के मूल्यांकन के वक्त खबरपालिका को छोड़ शेष तीनों अंगों का ही महत्व प्रतिपादित किया जाता है। अब यह एक काफी लम्बे विवाद का विषय है कि आजादी के बाद से अब तक के कार्यकाल में प्रजातंत्र की मजबूती में...

  • कमलनाथ के बाद मनीष तिवारी उड़ान भरने की तैयारी में…!

    भोपाल । भारत को आजादी दिलाने वाले देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस का ‘सूर्यास्त’ निकट है, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमलनाथ के बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवरी भी कांग्रेस को ‘अलविदा’ कहने की तैयारी कर चुके है, ये नेता पिछले पांच दशक से कांग्रेस को अपने सिर पर ढोने के बाद अब उसे कंधा देने को उत्सुक है। कमलनाथ अकेले नहीं उनके साथ एक दर्जन कांग्रेसी विधायक, जिलाध्यक्ष तथा करीब एक हजार कट्टर समर्थक भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने की तैयारी कर चुके है, जहां तक दूसरे नेता मनीष तिवारी का सवाल है,...

  • चार सौ पार… गर्वोक्ति या वास्तविकता…?

    भोपालI दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हमारे भारत की मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल केवल पचास या साठ दिन ही शेष बचा है, अगले अप्रैल-मई में लोकसभा के चुनाव होना है, इस हिसाब से लोकसभा का मौजूदा सत्र् लोकसभा की इस पारी का अंतिम सत्र है, इस यथार्थ का अहसास देश के नेताओं, नागरिकों, राजनैतिक दलों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी को भी है, जो इन दिनों कयासों पर ध्यान न देकर वास्तविक स्थिति के आंकलन में व्यस्त है, जिसका एक संकेत उन्होंने लोकसभा के मौजूदा सत्र में राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर हुई लम्बी बहस के जवाब में दिया...

  • सम्मान व्यक्ति विशेष का नहीं, हिन्दुत्व का..!

    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवानी जी को भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च अलंकार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की घोषणा की गई है, यद्यपि आडवानी जी के व्यक्तित्व के सामने यह अलंकरण काफी तुच्छ है और इस घोषणा को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपना ‘राजधर्म’ निभाना बताया जा रहा है, किंतु यह भी सही है कि आज मोदी जी जो कुछ भी है, उसमें परम् श्रद्धेय लाल कृष्ण आडवानी जी की अहम् भूमिका है और इसी ‘‘राजधर्म के ऋण’’ को चुकाने की मोदी जी ने कौशिश की है। आज से करीब तीन दशक पहले आडवानी जी ने ही...

  • न राहत, न टेक्स: यथास्थितिवादी बजट…!

    भोपाल। भारत सरकार ने अगले डेढ़ सौ दिनों के लिए अंतरिम बजट प्रस्तुत कर दिया है, जिसमें न किसी नए टेक्स का प्रावधान है और न किसी तरह की राहत का एलान। सरकार ने जहां जुलाई माह में देश की आर्थिक मजबूती के लक्ष्य की घोषणा का जिक्र किया, वहीं इस चुनावी बजट में ऐसा भी कोई कदम नहीं उठाया जिससे मतदाता को मौजूदा आर्थिक चिंता से मुक्ति मिल सके। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लगभग 14 लाख करोड़ के घाटे का बजट प्रस्तुत किया, जिसमें 44.90 लाख करोड़ के खर्च और 30 लाख करोड़ की आय का जिक्र है, साथ...

  • धार्मिक प्रहसन या राजनीतिक नाटक….?

    त्रैता युग में देश की राजधानी अयोध्या इन दिनों अपने भगवान राम के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर सुर्खियों में है, इस मंदिर के प्रसंग के कारण पूरा भारत ‘राम’ के रंग में रंगा नजर आ रहा है, हर देशवासी के जुबान पर इसीलिए केवल और केवल ‘राम’ का नाम है, अब इस माहौल में हर बुद्धिजीवी के दिल-दिमाग से एक ही सवाल उठ रहा है कि इस प्रसंग को धार्मिक या आध्यात्मिक कहा जाए या राजनीतिक? क्योंकि आध्यात्म के साथ राजनीति भी इस घटनाक्रम से जुड़ी साफ नजर आ रही है और राजनीति का इससे तालमेल भी किसी...

  • सब कुछ सीखा हमने… न सीखी… सच है… हम है…!

    भोपाल। ईश्वर का यह एक शाश्वत नियम है कि ‘‘जन्मदाता ही खात्मे का अधिकारी भी होता है’’ और ईश्वर ने मानव सहित सभी जीवों पर स्वयं ही लागू भी किया, किंतु अब समय के बदलाव के साथ यह ईश्वरीय नियम हर कहीं लागू हो गया है और अब तो राजनीति भी इससे अछूती नही रही है, जिसके साक्षात दर्शन आज देश के मुख्य प्रतिपक्षी दल कांग्रेस में हो रहे है, यद्यपि कांग्रेस के मुख्य जन्मदाता एक विदेशी राजनेता ए.ओ.ह्यूम माने जाते है, किंतु ह्यूम से अधिक इसका श्रेय इलाहाबाद के नेहरू खानदान के स्व. मोतीलाल नेहरू को दिया जाता है...

  • खूफिया जांच एजेंसियों पर सरकार का कब्जा क्यों…?

    भोपाल। हाल ही में सामने आई एक अंतर्राष्ट्रीय जांच एजेंसी की रिपोर्ट में यह चौकाने वाला खुलासा सामने आया है कि भ्रष्टाचार के मामले में हमारा भारत देश विश्व में पांचवें नम्बर पर आ गया है, अर्थात् ‘‘पृथ्वी का स्वर्ग’’ कहलाने की हमारी तमन्ना अब इस रूप में हमारे सामने आई है और इसी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत में सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार आम भ्रष्टाचार के मुकाबले सर्वाधिक है। इस रिपोर्ट ने विश्वस्तर पर भारत की छवि तो खराब की ही, साथ ही इस पर एक आम भारतवासी को चिंतन हेतु मजबूर भी कर...

  • देश ‘हाय… हाय… उचारे’ प्रधानमंत्री मंदिर द्वारे…?

    भोपाल। क्या प्रधानमंत्री पद पर विराजित शख्स की कोई निजी जिन्दगी नहीं होती? क्या उसे अपने लिए कुछ भी फैसले लेने का अधिकार नहीं है? ये अहम् सवाल देश के प्रमुख प्रतिपक्षी दल कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी पर लगाए गए ताजा आरोपों में निहित है, कांग्रेस को प्रधानमंत्री के मंदिर दर्शन पर आपत्ति है, कांग्रेस के इस गंभीर आरोप ने भारतीय राजनीति मेें संलग्न शख्सियतों के निजी जीवन को लेकर अनेक सवाल खड़े कर दिए है, आखिर प्रतिपक्ष दल को किसी की भी निजी दिनचर्या या जिन्दगी में झांकने की अनुमति किसने दी? हाँँ, यदि प्रधानमंत्री के शासकीय...

  • ‘इण्डिया’ एकजुटता परोसे; भाजपा राम भरोसे…!

    भोपाल। यद्यपि लोकसभा के आम चुनाव में अभी करीब एक सौ दिनों का समय शेष है, किंतु सभी राजनीतिक दलों पर चुनाव अभी से हावी हो गया है, देश पर राज कर रही भारतीय जनता पार्टी को जहां अपने नेता नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है और वह तीसरा कार्यकाल सुनिश्चित मान रही है, वहीं मोदी की आंधी का सामना करने के लिए सभी प्रतिपक्षी दल ‘इण्डिया’ गठबंधन के माध्यम से एकजुट होने लगे है, अर्थात् मुख्य प्रतिपक्षी दल कांग्रेस सहित सभी प्रतिपक्षी दलों ने यह सुनिश्चित कर लिया कि कोई भी एक अकेला दल मोदी की...

  • जिस मिथक को राष्ट्रपति नहीं तोड़ पाए उसे मुख्यमंत्री ने तोड़ा…?

    भोपाल। भारत की पुण्य नगरियों के साथ अनेक किंवदंतियाँँ व मिथक जुड़े हुए है, इसी तरह मध्यप्रदेश की पवित्र नगरी अवंतिका (उज्जैन) के साथ भी अनेक किंवदंतियाँ व मिथक जुड़े हुए है और पिछली कई शताब्दियों से उनका पालन भी हो रहा है, इन्हीं मिथकों या किंवदंतियों में से अवंतिका (उज्जैन) के बारे मंे करीब दो शताब्दियों से यह मिथक चली आ रही है कि चूंकि उज्जैन के राजा भगवान महाकाल है, इसलिए इस नगर में देश या प्रदेश का कोई भी राजा या राजप्रमुख रात्रि विश्राम नहीं कर सकता और यदि कोई मुखिया यहां रात्रि विश्राम करेगा तो उसका...

  • गुमनाम चेहरों पर दाँव… क्या किनारे लग पाएगी नाव.?

    भोपाल। हमारे प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी का ‘कर्मयोग’ अब धीरे-धीरे सबके सामने आने लगा है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी संगठन से लेकर राज्य व केन्द्र सरकारों के कामकाज दिल्ली के मार्गदर्शन पर ही शुरू होने जा रहे है, अर्थात् देश धीरे-धीरे ‘एकतंत्र’ की ओर बढ़ता जा रहा है, इसी के चलते मोदी जी राजनीति में नए-नए प्रयोग भी शुरू कर रहे है, जिसका ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में नए गुमनाम चेहरों को राज्यों की बागडोर सौंपना। अर्थात् अब देश की राजनीति और कार्यनीति में वही होने वाला है जो आदरणीय मोदी जी चाहेंगे। अब यहाँँ एक अहम्...

  • संघ की पसंद सर्वोपरी, मोदी की कसौटी पर खरे उतरे मोहन.!

    भोपाल। सबको चौंकाने वाले फैसले सुनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने इस बार अपने फैसले से पूरे मध्यप्रदेश को चौका दिया है, उन्होंने मध्यप्रदेश की राजनीतिक चुनौतियों से सक्षम मुकाबले के लिए एक ऐसे राजनेता को चुना है, जिसका अभी तक कहीं भी अता-पता नहीं था, ये शख्स है- उज्जैन दक्षिण के विधायक मोहन यादव, जो मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होगें तथा 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को करिश्माई जीत दिलाने का प्रयास करेगंे। मोदी की पसंद मोहन यादव 2013 से विधायक है तथा उज्जैन में अगले सिंहस्थ (2028) की तैयारियों में व्यस्त है। अचानक उनका नाम मुख्यमंत्री...

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