राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

ट्रंप की विश्व दृष्टि

जब पूछा गया कि क्या उनकी वैश्विक शक्ति की कोई सीमा है, तो डॉनल्ड ट्रंप ने कहा- ‘हां, एक चीज है- मेरी अपनी नैतिकता। मेरा अपना दिमाग। यही एक चीज है, जो मुझे रोक सकता है।

जो बातें डॉनल्ड ट्रंप पर बतौर इल्जाम कही जाती थीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अब खुद उसकी पुष्टि कर दी है। दो-टूक कहा है कि वे किसी अंतरराष्ट्रीय कानून से बंधे हुए नहीं हैं। बीते सप्ताहांत अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने सैनिक, आर्थिक या राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करने के मामलों में अपनी पूरी ‘स्वतंत्रता’ का एलान किया। कहा कि अपने मकसद को हासिल करने की राह में आने वाली किसी अंतरराष्ट्रीय संधि, कानून, समझौते आदि वे नहीं मानते। जब पूछा गया कि क्या उनकी वैश्विक शक्ति की कोई सीमा है, तो उन्होंने कहा- ‘हां, एक चीज है- मेरी अपनी नैतिकता। मेरा अपना दिमाग। यही एक चीज है, जो मुझे रोक सकता है।’ राजतंत्र के दौर में समझा जाता था कि राजा की सोच या वह जो कहता है, वही कानून है। ताजा टिप्पणियों से ट्रंप ने उस दौर की मान्यता के अनुरूप खुद को विश्व सम्राट के रूप में पेश किया है। इन बातों की रोशनी में वेनेजुएला में उनके प्रशासन ने क्या किया या ग्रीनलैंड में क्या करने का इरादा रखता है, उसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुई नियम आधारित एवं उदार विश्व व्यवस्था के तर्कों से समझने की कोशिश व्यर्थ हो जाती है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उस समझ के आधार पर होने वाली आलोचनाओं का उनकी निगाह में कोई महत्त्व नहीं है।

वे दुनिया को नए युग में ले गए हैं, जो शक्ति के सिद्धांत के प्रेरित है। ट्रंप के आचरण में यह बात पहले से ही साफ नजर आती रही है, मगर अब उन्होंने इनको सैद्धांतिक जामा भी पहना दिया है। संदेश यह है कि ट्रंप सिर्फ ताकत का सम्मान करना जानते हैं। संभवतः इसीलिए शी जिनपिंग या व्लादीमीर पुतिन का उल्लेख करते हुए वे उतना अपमानजनक लहजा नजरिया नहीं दिखाते, जैसा इजहार दूसरे नेताओं- जिनमें यूरोपीय नेता भी शामिल हैं- के प्रति करते हैं। भारत जैसे देशों को इसका अर्थ समझना चाहिए। उन्हें ट्रंप से किसी रहम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। ट्रंप के दौर में अपने हित की रक्षा कैसे की जाए, यह यक्ष प्रश्न उनके सामने खड़ा है।

Tags :

By NI Editorial

The Nayaindia editorial desk offers a platform for thought-provoking opinions, featuring news and articles rooted in the unique perspectives of its authors.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

20 − 6 =