• जब माहौल ज़हरीला हो

    अमेरिका में जब कभी अतीत में राजनीतिक हत्याएं हुईं, उसको लेकर यह शक उठा और फिर बना रहा है कि इसके पीछे “डीप स्टेट” की एजेंसियों का हाथ है। ट्रंप भी इस “इलीट” और “डीप स्टेट” को अपने विरुद्ध लामबंद बताते रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की हत्या का प्रयास हुआ। उनके ऊपर स्नाइपर से गोलियां दागी गईं। एक गोली उनकी दांयी कान में लगी। यह सिर्फ बेहतर संयोग है, वरना वह गोली घातक भी हो सकती थी। इस घटना से अमेरिका हिल उठा है। ट्रंप की टीम ने तुरंत यह आरोप लगा दिया कि पूर्व राष्ट्रपति...

  • नाराजगी अब ट्रेंड है

    संभव है कि आम मतदाताओं में किसी भी कीमत पर सत्ताधारी दल से निज़ात पाने का भाव अभी ना आया हो, मगर भाजपा और खासकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर लोगों का उत्साह ठंडा पड़ने के संकेत साफ हैं। भाजपा नेतृत्व भले ही अपने सार्वजनिक बयानों में इस तथ्य की अनदेखी करता रहे, लेकिन महंगाई, बेरोजगारी और सामान्य अवसरहीनता अब आम मतदाताओं के राजनीतिक निर्णय को प्रेरित कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी झटका इन्हीं कारणों से लगा। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उसे स्वीकार करने और सबक लेने की कोई तत्परता नहीं दिखाई। तो अब सात...

  • हताशा का ये आलम

    रूस में मारे गए नौजवानों में एक 23 वर्षीय हेमिल मनगुकिया थे। उनके पिता ने पुष्टि की है कि उनका परिवार रूस की नागरिकता लेने की तैयारी में है। क्यों? इस सवाल पर उन्होंने एक अखबार से कहा- ‘भारत में क्या रखा है?’ खबर सुर्खियों में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मास्को यात्रा के दौरान उन भारतीय नौजवानों का मामला उठाया, जिन्हें रूस ले जाकर वहां यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में झोंक दिया गया। इस पर रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने उन नौजवानों को जल्द कार्य-मुक्ति देकर भारत लौटाने का आश्वासन दिया। लेकिन अब भारत में आई मीडिया...

  • प्रगति की दिशा में

    भारत में निजी मजहबी दीवानी संहिताओं के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष सिविल न्याय संहिता भी मौजूद है। अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति भी इसके तहत न्याय पा सकते हैं। उनकी ऐसी अर्जी पर अदालतें धर्मनिरपेक्ष संहिता के अनुरूप ही न्याय करेंगी। शाह बानो प्रकरण भारत में न्याय सिद्धांत की प्रगति को एक झटका था। हालांकि तब सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कुछ अवांछित टिप्पणियां भी की थीं, लेकिन उसकी यह व्यवस्था सही दिशा में थी कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता पाने का हक है। तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने विधायी तरीके से उस व्यवस्था को कमजोर...

  • मास्को यात्रा का सार

    रूस के लिए मोदी की यात्रा रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई। रूस का खास प्रयास पश्चिम के इस प्रचार को झुठलाने का है कि उसे अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया गया है। इस लिहाज से इस यात्रा का महत्त्व स्पष्ट है। भारत-रूस दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मास्को यात्रा को सफल बताया है। लेकिन सफलता को मापने के दोनों के संभवतः अलग-अलग पैमाने हैं। भारत की नजर में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में हुए समझौतों से देश को फायदा होगा। दोनों देशों ने 2030 तक सालाना आपसी व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का इरादा...

  • यही तो समस्या है

    पिछले वित्त वर्ष में टेलीकॉम, एयरलाइन्स, सीमेंट, स्टील, टायर आदि जैसे उद्योगों में केंद्रीकरण तेजी बढ़ा। कोरोबार जगत के अधिकांश क्षेत्रों में गुजरे दस साल में सामान्यतः दो ऐसी कंपनियां उभरी हैं, जिनके राजस्व में तेजी से इजाफा हुआ है। भारत में वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान विभिन्न कारोबारों में बाजार केंद्रीकरण और बढ़ा। यह तथ्य खुद बाजार की एक एजेंसी के पैमाने से सामने आया है। बाजार केंद्रीकरण का मतलब है कि उद्योग के किसी विशेष क्षेत्र में एक या कुछ गिनी-चुनी कंपनियों का पूरा नियंत्रण होना। सामान्य भाषा में इसे मोनोपॉली या ओलिगोपोली कायम होना कहते हैँ। हरफाइनडहल...

  • कुलगाम के बाद कठुआ

    देश की अपेक्षा यह है कि आतंकवाद को निर्णायक रूप से परास्त किया जाए। ऐसा नहीं हो पा रहा है, तो सरकार और सुरक्षा तंत्र को अपनी अब तक की रणनीति पर सिरे से पुनर्विचार करना चाहिए। छह जुलाई को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों के हमले में सेना को दो जवान मारे गए। उसके बाद जवाबी कार्रवाई में सेना ने छह दहशतगर्दों को ढेर कर दिया। मगर सिर्फ दो दिन बाद- आठ जुलाई की रात कठुआ में सेना के कारवां पर आतंकवादियों ने और भी ज्यादा घातक हमला किया। इसमें पांच सैनिकों की जान गई। बीते एक महीने में...

  • बिगड़ती हालत की तस्वीर

    एनएसएसओ की गैर कंपनी यानी अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार की स्थिति के बारे में सर्वे रिपोर्ट आई है। उस रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 से 2022-23 के बीच इस क्षेत्र में 13 राज्यों में रोजगार प्राप्त मजदूरों की संख्या गिरी। भारत के रोजगार की हालत खराब है, लेकिन यह बदहाली सिर्फ औपचारिक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। अनौपचारिक क्षेत्र में हालत बदतर है। चूंकि यह तथ्य नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के सर्वेक्षण से सामने आया है और इसलिए सरकार इससे इनकार नहीं कर सकती। जैसाकि भारत सरकार ने सिटीग्रुप रिसर्च की एक अध्ययन रिपोर्ट के मामले में किया है।...

  • फ्रांस ने दिया फॉर्मूला

    फ्रांस में वामपंथी मोर्चा सरकार बना सकेगा या नहीं, अभी यह तय नहीं है। लेकिन उसकी सफलता ने यह जरूर बताया है कि अगर जनता के सामने विश्वसनीय नीतिगत विकल्प रखे जाएं, तो लोग उसे आजमाते जरूर हैं। यूरोपीय संसद के चुनाव में अपने देश में धुर-दक्षिणपंथी नेशनल रैली की बड़ी जीत के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संसद को भंग कर एक बड़ा दांव खेला। उनका दांव था कि पिछले दो मौकों की तरह इस बार भी धुर-दक्षिणपंथ को रोकने के लिए सभी ताकतें उनकी पार्टी के पक्ष में लामबंद हो जाएंगी। लेकिन इस बार उनका दांव...

  • अब भी गर्व है?

    सिर्फ ऊंचे टॉल टैक्स वाले महंगे एक्सप्रेस-वेज (जो आम जन की पहुंच से बाहर हों) ही इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं हैं। असल कसौटी यह है कि एक्सप्रेज-वेज से उतरने के बाद शहर और गांवों में ऐसे निर्माणों के कारण जिंदगी कितनी सहूलियत भरी हुई है। लखनऊ में चारबाग स्टेशन के बाहर नौका चलते देखना कौतुक से भरा अनुभव है। वाराणसी में शहर के अंदर जगह-जगह तालाब जैसा नज़ारा बनना उससे कोई कम तजुर्बा नहीं है। ठीक ही कटाक्ष किया गया है कि वादा वाराणसी को क्योटो (जापान की स्मार्ट सिटी) बनाने का था, लेकिन उसे वेनिस (इटली का मशहूर नगर जहां शहर...

  • मोदी की रूस यात्रा

    एक आकलन यह है कि प्रधानमंत्री उन बहुपक्षीय मंचों की बैठक में जाने को लिए ज्यादा इच्छुक नहीं हैं, जहां चीन की केंद्रीय भूमिका बन गई हो। लेकिन इसका असर रूस से द्विपक्षीय रिश्तों पर ना पड़े, इसे सुनिश्चित करना भी मोदी की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज से शुरू हो रही दो दिन की रूस यात्रा और उनके शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में ना जाने संबंधी खबरें मीडिया में लगभग एक साथ आईं। लाजिमी है कि इन दोनों के बीच संबंध देखा गया। उसके बाद से इसको लेकर भी कयास जारी है कि मोदी...

  • इल्जाम में दम है

    बेशक सेल फोन क्षेत्र में ओलिगोपॉली का मुद्दा उठा कर कांग्रेस ने प्रमुख विपक्षी दल की अपनी भूमिका का निर्वाह किया है। अब जरूरत इस बात की है कि इस पर जन-चेतना लाते हुए इसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया जाए। कांग्रेस ने सेल फोन और इंटरनेट सेवा क्षेत्र में ऑलिगोपॉली कायम होने का संगीन इल्जाम लगाया है। आम अनुभव के आधार पर ये कहा जा सकता है कि इस आरोप में दम है। इसलिए कांग्रेस ने इस सिलसिले में जो सवाल पूछे हैं, उन पर सरकार से जवाब की अपेक्षा है। सार्वजनिक विमर्श में भी उस पर खास ध्यान दिया...

  • धार चूक गई है

    पुराने फॉर्मूलों से आगे निकलने की बौद्धिक क्षमता सत्ताधारी दल नहीं दिखा पाया है। जबकि आम तजुर्बे और यहां तक कि 2024 के चुनाव नतीजों से भी यह स्पष्ट है कि इन फॉर्मूलों में अब जन समर्थन के विस्तार की क्षमता नहीं रह गई है। प्रधानमंत्री ने संसद के दोनों सदनों में लंबे भाषण दिए। लेकिन नए कार्यकाल में नरेंद्र मोदी ने नया क्या कहा, यह उन भाषणों में ढूंढना मुश्किल हो सकता है। बल्कि उनके भाषण पूर्व दो कार्यकाल में राष्ट्रपतियों के 10 अभिभाषणों के उनके जवाब की पुनरावृत्ति मालूम पड़े। उन्हीं मौकों की तरह निशाने पर कांग्रेस रही,...

  • नेपाल में सियासी प्रहसन

    प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने पिछले दिनों बयान दे दिया कि उनके पास संख्या का जादू है और वे पूरे कार्यकाल तक सरकार का नेतृत्व करते रहेंगे। इससे ओली भड़क गए। नतीजतन, उनकी पार्टी ने नेपाली कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। नेपाल में फिर नई सरकार बनने जा रही है। नवंबर 2022 में जब पिछला आम चुनाव हुआ, तब उसके बाद से- यानी डेढ़ साल में यह पांचवीं सरकार होगी। आम चुनाव प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) ने नेपाली कांग्रेस के साथ मिल कर लड़ा था। नेपाली कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप...

  • मानव की गरिमा नहीं

    अपने देश में इनसानी जान की कोई कीमत नहीं है। जो हताहत हुआ, उसे उसकी किस्मत मान कर लोग आगे बढ़ते हैं। और अगर हादसे का जिम्मेदार कोई धार्मिक व्यक्ति हो, तब तो उसकी कोई वैधानिक जवाबदेही भी तय नहीं होती! हाथरस में भक्ति भाव से प्रवचन सुनने गए हजारों लोगों के बीच भगदड़ मचने के बाद जो दृश्य वहां से सामने आए, वे हृदयविदारक हैं। किसी संवेदनशील व्यक्ति के मन में उनसे अपने समाज को लेकर एक तरह की वितृष्णा भी पैदा हो सकती है। जिस तरह शवों को लॉरी में लादा गया या लोग अपने परिजनों को कंधों...

  • अब सेबी बनाम हिंडेनबर्ग

    हिंडेनबर्ग के ताजा आरोपों से सेबी की छवि खराब हो सकती है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजारों की साख पर पड़ेगा। इसलिए अगर सेबी के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो उसे हिंडेबनर्ग पर भारत से अमेरिका तक कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।     अडानी ग्रुप के बारे में हिंडेनबर्ग ने जो खुलासे किए थे, उस मुद्दे पर अब उसने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। पहला गोला सेबी ने दागा। उसने हिंडनबर्ग को कारण-बताओ नोटिस जारी किया। सेबी ने कहा कि अगर वह हिंडनबर्ग को दोषी पाता है, तो उस पर...

  • पक्ष-विपक्ष की बात नहीं

    बेहतर होता कि दोनों पक्ष देश की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर दलगत नजरिए से बाहर आकर विचार करते। राहुल गांधी से एक तथ्य की भूल हुई, तो यह भी बेहिचक कहा जाएगा कि सरकार ने अर्धसत्य का सहारा लिया। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के समय विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अग्निपथ योजना की चर्चा की, तो रक्षा मंत्री ने उन पर गलत तथ्य पेश करने का इल्जाम लगाया। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के इस दावे को गलत बताया कि लड़ाई के दौरान किसी अग्निवीर के मरने पर उसके परिवार को कुछ नहीं मिलता। सिंह ने...

  • विपक्ष के आक्रामक तेवर

    संसद में विपक्ष की जैसी आक्रामकता देखने को मिल रही है, वैसा पिछले दस साल में कभी नहीं था। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के रुख में जितनी रक्षात्मकता आ गई दिखती है, वह भी नई बात ही है। नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में संसद के दोनों सदनों का नज़ारा बदला हुआ है। विपक्ष की जैसी आक्रामकता वहां देखने को मिल रही है, वैसा पिछले दस साल में कभी नहीं था। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के रुख में जितनी रक्षात्मकता आ गई है, वह भी नई बात है। क्या इसकी वजह यह है कि दोनों पक्षों ने एक महीना...

  • मैक्रों की नैया डगमगाई

    पहले चरण के मतदान में धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली के नेतृत्व वाला गठबंधन सबसे आगे रहा। दूसरे नंबर पर वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट रहा, जिसे 28 फीसदी वोट मिले। राष्ट्रपति मैक्रों के नेतृत्व वाले गठबंधन को 21 प्रतिशत से भी कम वोट मिले। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का संसदीय मध्यावधि चुनाव कराने का दांव उलटा पड़ा है। मैक्रों को आशा थी कि पिछले दो चुनावों की तरह इस बार भी वे धुर दक्षिणपंथ का भय दिखा कर मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने में सफल रहेंगे। मगर इस बार दांव कामयाब नहीं हुआ। नई संसद चुनने के लिए...

  • हिलने लगी है बुनियाद

    रिजल्ट की आखिरी तारीख 30 जून तक सीयूएटी-यूजी का परिणाम घोषित नहीं हुआ। इस परीक्षा को संपन्न कराने की जिम्मेदारी भी एनटीए के पास ही है। इस देर से विश्वविद्यालयों की पाठ्यक्रम समयसारणी में देर की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। नीट को लेकर गहराते संशय और छात्रों के भविष्य को लेकर जारी ऊहापोह के बीच अब कॉमन यूनिवर्सिटी टेस्ट फॉर अंडरग्रैजुएट एडमिशन्स (सीयूएटी-यूजी) से संबंधित आशंकाएं भी सच हो रही हैं। रिजल्ट की आखिरी तारीख 30 जून तक सीयूएटी-यूजी का परिणाम घोषित नहीं हुआ। इस परीक्षा को संपन्न कराने की जिम्मेदारी भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के पास...

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