• बेजान, ठंडा चुनाव!

    यह उत्तर भारत का चुनावी सत्य है। जयपुर, भोपाल, रायपुर, लखनऊ कहीं बात करें सभी तरफ फीका, निराकार चुनाव है। न उम्मीदवारों के चेहरे चर्चा में हैं और न पक्ष-विपक्ष का प्रचार दिख रहा है। लोगों के मन में अकेले पैठे नरेंद्र मोदी के चेहरे में सब माने बैठे हैं कि भले गले में भाजपा का पट्टा बंधाए कुत्ता उम्मीदवार हो,  जीतेगा वही। चर्चाओं में जीत-हार की बहस या उम्मीदवारों को लेकर किसी तरह की कोई चख-चख नहीं। 1977 बाद इतना फीका लोकसभा चुनाव (तब मौन क्रांति थी) कभी देखने को नहीं मिला। मगर बेजान चुनाव की यह हकीकत उन्ही...

  • मोदी सुनामी क्षत्रपों से फुस्स!

    गुजरे सप्ताह महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की क्षत्रपता स्थापित हुई। पिछले सप्ताह भी मैंने लिखा था कि राहुल गांधी और शरद पवार ठीक कर रहे हैं, जो उद्धव ठाकरे को बड़ा भाई बना रहे हैं। अब सीटों के बंटवारे (ठाकरे पार्टी को 21, कांग्रेस 17, शरद पवार पार्टी 10 सीट) ने भी महाराष्ट्र की जनता की निगाह में उद्धव ठाकरे बनाम नरेंद्र मोदी की सीधी प्रतिद्वंद्विता बना दी है। इसका अर्थ है लोगों में, समर्थकों में एकनाथ शिंदे और अजित पवार की वोट दुकान खत्म। इनकी वही दशा होनी है जो बिहार में भाजपा के पार्टनर नीतीश, मांझी, पासवान आदि...

  • भाजपा 300 से ऊपर या नीचे?

    12 अप्रैल 2024 का चुनावी अनुमान हाल में आए एक के बाद एक सर्वेक्षणों के बीच है। इनमें मोटा मोटी 350 से 400 पार एनडीए-भाजपा की सीटों के अनुमान है। एक चैनल ने होशियारी दिखाई जो 399 का आंकड़ा दिया। मतलब चार सौ पार और चार सौ से नीचे का आंकड़ा आए तो दोनों हाथों में अपना कहा सही के लड्डू। मगर इन सबसे अलग लोगों के सरोकार के मुद्दों के ताजा सर्वे आंकड़े भी है। इस अनुसार तो 2019 के मुकाबले लोग महंगाई, बेरोजगारी से इतने अधिक परेशान हैं कि राम मंदिर और भक्ति की बात कहीं नहीं है।...

  • महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार भी मुद्दा!

    अब यह सिर्फ राहुल गांधी या विपक्ष के नेता नहीं कह रहे हैं कि महंगाई और बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या है। सीएसडीएस और लोकनीति के सर्वेक्षण में आम लोगों ने स्वीकार किया है कि वे महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से परेशान हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस सर्वेक्षण में देश के 71 फीसदी लोगों ने माना है कि जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ी हैं और इससे परेशानी हो रही है। अगर इस आंकड़े की बारीकी में जाएं तो जो गरीब हैं उनमें से 76 फीसदी ने कहा है कि महंगाई परेशान कर रही है। मुसलमानों और...

  • भाजपा पर भड़के कई राज्यों के राजपूत

    पिछले कुछ समय से ब्राह्मणों के बाद राजपूत भाजपा के लिए सबसे ज्यादा प्रतिबद्ध मतदाता के तौर पर उभरे थे। उन्होंने हिंदी पट्टी के कई राज्यों, जैसे बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में प्रादेशिक पार्टियों के साथ बनाया गया अपना पुल तोड़ दिया था और भाजपा के बड़े जहाज पर सवार हो गए थे। राजस्थान में राजपूत पहले से भाजपा से जुड़े थे और मध्य प्रदेश में अर्जुन सिंह व दिग्विजय सिंह के बाद राजपूत भाजपा के साथ चले गए थे। गुजरात अपवाद था, जहां आज तक माधव सिंह सोलंकी के बनाए खाम समीकरण के हिसाब से क्षत्रिय कांग्रेस के...

  • भाजपा की सुनामी दूर-दूर तक नहीं!

    नरेंद्र मोदी अब जनसभाओं में चार सौ पार का नारा पहले की तरह हर जगह लगवाते हुए नहीं हैं। मैंने चार सौ सीटों की सुनामी के भाजपा हल्ले पर पंद्रह दिन पहले राज्यवार सीटों की अनुमानित लिस्ट देना शुरू किया था। भाजपा की हवाई सुनामी को पहली लिस्ट में डाला तब भी चार सौ सीटों का आंकड़ा नहीं बना। उसके बाद पिछले सप्ताह (29 मार्च 2024) भाजपा-एनडीए की अधिकतम सीटों का अनुमान 358 सीटों का था। जबकि कांटे के मुकाबले के जमीनी सिनेरियो में गैर-एनडीए पार्टियों की सीटों का अनुमान था 248 सीट। पिछले सात दिनों में माहौल बदला है।...

  • विपक्ष का हल्ला, मोदी के दलबदलू!

    पता नहीं मोदी-शाह ने क्या सोच कर अरविंद केजरीवाल को जेल में डाला? ऐसे ही हेमंत सोरेन का सवाल है तो कांग्रेस की चुनावी पैसे की जब्ती का भी मामला है। वजह या तो अंहकार है या तो नरेंद्र मोदी के ग्रह-नक्षत्र खराब हैं या विनाशकाले विपरीत बुद्धि है। नरेंद्र मोदी हिंदी भाषी इलाकों के मन में भले बैठे हों और मुमकिन है उत्तर भारत में छप्पर फाड़ जीतें। लेकिन बावजूद इसके जिस भी चुनावीसीटपर जमीनी हवा-गणित और जात-पांत तथा उम्मीदवार विशेष की दबंगी पर वोटिंग होगी वहां मोदी हवा का पंक्चर होना तय है। और गुजरे सप्ताह का घटनाक्रम...

  • लालू, तेजस्वी खेला कितना बिगाड़ेंगे?

    बिहार में लालू प्रसाद और उनके बेटे तेजस्वी यादव क्या लोकसभा का चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ रहे हैं? बिहार में विपक्षी गठबंधन के बहुत अच्छे नतीजों की संभावना के बावजूद लालू और तेजस्वी ने सब सत्यानाश करते हुए है। इन्होने कांग्रेस के साथ गठबंधन में सीटों का बंटवारा ठीक से नहीं किया। यह प्रयास किया कि कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलीं। उसके बाद भी कांग्रेस जिन सीटों पर जीत सकती है उन सीटों पर भितरघात की आशंका बनवाई है। अपने उम्मीदवार तय करने में भी लालू, तेजस्वी ने बड़ी लापरवाही बरती। अपने मजबूत नेताओं की बजाय बाहर से...

  • दलित राजनीति मोदी के दरवाजे

    उत्तर और पश्चिम भारत की दलित राजनीति आमतौर पर हिंदुत्ववादी ताकतों के साथ जुड़ी रही है। जहां कुछ नेताओं ने स्वतंत्र राजनीति की उनमें से भी ज्यादातर का अंत मुकाम हिंदुवादी पार्टियां ही रहीं। चाहे वह भाजपा हो या महाराष्ट्र में शिव सेना हो। इस लिहाज से देखें तो इस बार का लोकसभा चुनाव स्वतंत्र दलित राजनीति के पूरी तरह से समाप्त हो जाने या भाजपा के साथ मिल जाने का है। कह सकते हैं पूरी दलित राजनीति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नरेंद्र मोदी के दरवाजे पहुंच गई है। सारे दलित नेता या तो भाजपा के तालमेल किए हुए...

  • बिहार में अब भी उम्मीद

    लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के इतना कुछ करने के बावजूद बिहार में अब भी उम्मीद है। जमीनी हालात एनडीए के अनुकूल नहीं दिख रहे हैं। नरेंद्र मोदी की लहर या अयोध्या की राम लहर का ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। यही कारण है कि मतदाता किसी लहर से प्रभावित होकर या भावनात्मक मुद्दे के असर में वोट डालने की मंशा नहीं जाहिर कर रहे हैं। ध्यान रहे पिछली बार के चुनाव में राज्य की 40 में से 39 सीटें एनडीए को मिली थीं। भाजपा 17 सीटों पर लड़ी थी और सभी सीटों पर जीती थी। एक सीट सिर्फ...

  • भाजपा के अधिकांश टिकट दलबदलुओं को!

    नरेंद्र मोदी-अमित शाह ने भाजपा को बदल दिया है। पार्टी दलबदलुओं की हो गई है। पार्टी के अब तक 405 उम्मीदवार घोषित हुए है। मोटा मोटी लगता है इनमें से सौ भी असली भगवा उम्मीदवार नहीं हैं। अधिकांश दलबदलू और संघ परिवार को हिकारत से देखने की बैकग्राउंड वाले हैं। संघ-भाजपा में सालों जो लोग मरे-खपे, कर्मठ क्षेत्रीय-जिला पदाधिकारी हैं वे लगभग आउट हैं। भाजपा के घोषित 405 उम्मीदवारों की सीटों के मौजूदा 291 सांसदों में से 101 भाजपाइयों के टिकट कटे हैं। सवाल है नए चेहरे कैसे हैं? ये चेहरे कौन हैं? Lok Sabha election 2024 यह​ भी पढ़ें:...

  • मुकाबला बढ़ रहा है!

    पिछले सप्ताह प्रदेशवार सीटों के आधार पर भाजपा बनाम अन्य पार्टियों के मुकाबले की जो सूची थी, उसकी जमीनी हकीकत में पिछले सात दिनों में बहुत परिवर्तन है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का दिल्ली, हरियाणा और पंजाब पर गहरा असर होगा। पंजाब में भाजपा अब अछूत पार्टी है। किसानों में नाराजगी से अकाली दल ने भाजपा से एलायंस से इनकार कर दिया। Lok Sabha chunav 2024 यह​ भी पढ़ें: भाजपा बिहार में क्यों चिंतित है?  ओडिशा में बीजू जनता दल ने भी भाजपा को छोड़ा तो दक्षिण भारत में स्थिति और क्लीयर होते हुए है। मैं पिछले सप्ताह...

  • भाजपा बिहार में क्यों चिंतित है?

    नीतीश कुमार को एनडीए में वापस ले आने के बाद भी ऐसा लग रहा है कि भाजपा बिहार में बहुत भरोसे में नहीं है। जब तक नीतीश राजद और कांग्रेस के साथ थे और विपक्ष को एकजुट कर रहे थे तब तक भाजपा के सामने एक बड़ी चुनौती थी। उसे अपनी जीती हुई 17 सीटें और अपनी करीबी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों गुटों की छह सीटों की चिंता था। Lok Sabha Chunav उसे किसी हाल में 23 सीटें बचानी थीं। लेकिन राजद, जदयू, कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन बहुत मजबूत था। तभी नीतीश कुमार के लिए भाजपा ने...

  • क्या वैश्य भाजपा से नाराज हैं?

    बड़ा सवाल है कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से वैश्य समाज नाराज है? यह आम चर्चा है और सोशल मीडिया में इसकी झलक भी मिल रही है। इस बात को लेकर नाराजगी जताई जा रहा है कि देश के इकलौते वैश्य मुख्यमंत्री को राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार कर लिया गया है। वैश्य मतदाता जागरूक हैं और पढ़े-लिखे हैं तो उनको समझ भी आ रहा है कि एक तरफ भ्रष्टाचार के केस में बंद नेताओं को रिहा या बरी किया जा रहा है तो दूसरी ओर राजनीतिक विरोध की वजह से अरविंद केजरीवाल को जेल में डाल...

  • ओडिशा और पंजाब में दूसरे के सहारे राजनीति

    भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित 370 सीट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी दो सहयोगी पार्टियों की घर वापसी कराने की जी तोड़ कोशिश की। वह ओडिशा में बीजू जनता दल को एनडीए में लाना चाहती थी और पंजाब में अकाली दल से बातचीत हो रही है। Lok Sabha election 2024 लेकिन दोनों प्रयास विफल हो गए हैं। अंत समय में बीजद और अकाली दल ने अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया। मजबूरी में भाजपा को भी इन राज्यों में अकेले लड़ना पड़ रहा है। ध्यान रहे ओडिशा में पिछली बार भारतीय...

  • मोदी की सुनामी या कांटे का मुकाबला?

    18वीं लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ‘चार जून, चार सौ सीट’ का जुमला बोल रहे हैं। लोग (खास कर उत्तर भारत के) अबकी बार मोदी के चार सौ पार के विश्वास में हैं। मतलब यह कि चुनाव में मोदी की आंधी नहीं, बल्कि मोदी की सुनामी है और राजीव गांधी की जीती 414 सीट का रिकार्ड एनडीए तोड़ेगा। लोग कहते हैं ऐसा होगा क्योंकि मोदी और ईवीएम है तो सब संभव है। पर मैं ऐसा नहीं मानता। न नरेंद्र मोदी में क्षमता है और न इतने बडे लेवल पर ईवीएम से फ्रॉड मुमकिन है। Lok Sabha Election 2024 यह भी...

  • ममता, माया बुरी तरह हारेंगी!

    हां, दीवाल पर लिखा दिख रहा है। जैसे छतीसगढ़ में रत्ती भर हिंदू-मुस्लिम न होते हुए भी एक मुसलमान मेयर और दो-तीन घटनाओं के हवाले हिंदू-मुस्लिम करा के भाजपा की अप्रत्याशित जीत हुई वैसा ही लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में होगा। प्रदेश में अपने संपर्क-संबंधों वाले जो सियासीदां लोग हैं उनकी बताई जमीनी हकीकत से साफ लगा रहा है कि कोलकत्ता व ईर्द-गिर्द इलाके को छोड़ कर उत्तर, दक्षिण बंगाल में हिंदू बुरी तरह भाजपा के लिए गोलबंद हैं। Lok Sabha election 2024 यह भी पढ़ें: मोदी की सुनामी या कांटे का मुकाबला? बांग्ला भद्र मानस भी तृणमूल कांग्रेस...

  • भाजपा की नई जमीन कहां है?

    भारतीय जनता पार्टी क्या मान रही है कि वह अपने कोर इलाकों में कमजोर हो रही है या जिन इलाकों में वह पीक पर है वहां उसे नुकसान हो सकता है? अगर भाजपा ऐसा मानती है तो मानने में कुछ भी गलती नहीं है क्योंकि लगातार दो बार भाजपा कई राज्यों में सभी सीटें या लगभग सभी सीटें जीत चुकी हैं। Lok Sabha election 2024 यह भी पढ़ें: मोदी की सुनामी या कांटे का मुकाबला? उन राज्यों में तीसरी बार भी प्रदर्शन दोहराना मुश्किल होगा। चाहे जैसे भी हालात हों लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा,...

  • विपक्ष को कहां से उम्मीद?

    भाजपा और विपक्षी गठबंधन में फर्क यह है कि भाजपा समय रहते अपनी कमजोरियों को भांप लेती है। उसको पता है कि लगातार तीसरी बार चुनाव जीतना आसान नहीं होता है इसलिए वह 370 और चार सौ सीट का नैरेटिव बना रही है तो साथ ही नए क्षेत्रों में पैर फैलाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर विपक्ष उस अंदाज में तैयारी करता नहीं दिख रहा है। Lok sabha election 2024 उसको लग रहा है कि दो बार की एंटी इनक्मबैंसी और कई राज्यों में डबल इंजन की सरकार के विरोध का फायदा उसको मिलेगा। यह बात कुछ हद...

  • चुनावी बॉन्ड/भारत का चरित्र

    भारत कैसा और कितना अनैतिक है, इसका नया सबूत है इलेक्टोरल बॉन्ड्स! सोचें, उस हिंदू राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के उन हिंदू हरकारों पर जिन्होंने कोई सौ साल हिंदुओं को चरित्रवान, नैतिक बनाने में हिंदू स्वंयसेवकों की जिंदगियां कुर्बान करवाईं। और एक खांटी प्रचारक का दिल्ली में शासन बना तो नतीजा क्या?  Electoral bond data supreme court जुआरियों, सटोरियों, दागियों व अपराधियों से चंदा ले कर राजनीति करने, चुनाव लड़ने का सत्य। पता नहीं आरएसएस के प्रतिनिधियों को अभी नागपुर की बैठक में यह भान हुआ या नहीं कि जो संगठन, जो परिवार गुरू दक्षिणा से चलता था, उसकी पार्टी...

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