जनता को एकदम बेवकूफ समझने का राजनीति!

मोदी जी के बाद केजरीवाल जिस धार्मिक पिच पर देश को ले जा रहे हैं। वहां क्या होगा कहना मुश्किल है।

आज सोनिया जिम्मेदारी से मुक्त

चुनाव हो गया। कांग्रेस को आज नया अध्यक्ष मिल जाएगा। दो दशक से ज्यादॉ समय के बाद सोनिया गांधी अब पूर्णत: कार्यमुक्त होने जा रही हैं।

अमरसिंह के फेर में मुलायम ने बहुत कुछ गंवाया!

अखिलेश और रामगोपाल यादव द्वारा सख्ती से अमर सिंह को विदा करने के बाद मुलायम सिंह के समझ में आया कि उन्हें कितना नुकसान हो चुका है। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

कांग्रेस के लिए मीडिया है सास!

सब जानते हुए भी एक बार कोई यह नहीं कहेगा कि कांग्रेस के चुनाव दूसरी सभी पार्टियों से अलग, उचित तौर तरीके से होते हैं या हो रहे हैं।

दिग्विजय के लिए बनता माहौल

दिग्विजय ने मध्यप्रदेश में दस साल अपनी सरकार चलाने के दौरान वहां सभी पार्टियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध रखे।

2017 में राहुल की यात्रा का सुझाव था!

एक बैठक में राहुल ने कहा था कि हमेशा दक्षिण से उत्तर या उत्तर से दक्षिण की ही बात क्यों की जाती है? पूर्व से पश्चिम की क्यों नहीं? एक यात्रा ऐसी भी निकलना चाहिए।

लेफ्ट में भी राहुल की यात्रा से बैचेनी!

दक्षिण में नफरत नहीं है। विभाजन नहीं है। मगर राजनीति तो है। तमिलनाडु में वहां के मुख्यमंत्री स्टालिन ने राहुल गांधी को तिरंगा सौंपकर यात्रा की शुरूआत करवाई।

राहुल का ‘चरैवेति चरैवेति’ सफर!

बुधवार, 7 सितंबर से शुरू हो रही कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का अगर यही संयोजन रहता है तो आप कुछ बेहतरीन गोल देख सकते हैं।

आजाद इतना नीचे न गिरे, खुशफहमी ने पाले!

जिस आजाद को जीरो से हीरो जिस परिवार ने बनाया था उनका वल्गर हंसी हंसते हुए राहुल पर सवाल उठाना बहुत शर्मनाक है।

कांग्रेस को अवसरवादियों से बचना होगा!

आरएसएस और भाजपा 2011 में अन्ना हजारे को सामले लाई थी। और उनकी आड़ में पूरा कांग्रेस विरोधी आंदोलन चलाया।

भाजपा को हिलाना है तो बिहार जैसे झटके और…

नीतीश कुमार इस बार नए रूप में सामने आए हैं। शायद प्रायश्चित्त के कारण। अपनी आखिरी पारी में वापस सम्मान, गरिमा और विश्वसनीयता पाने के लिए।

2024 की उल्टी गिनती शुरू, पर कांग्रेस नींद में!

कांग्रेस में एक विचार मंच भी है। मगर वह क्या करता है किसी को नहीं मालूम। आज जब लड़ाई ही सारी विचार की है तो कांग्रेस का यह विभाग सोया पड़ा है या कहें विलुप्त ही है।

साहित्य में प्रेमचंद पर हमले लगातार!

प्रेमचंद अपने लेखन के दौरान से ही आज तक ऐसा कोई आरोप नहीं है जो उन पर नहीं लगा हो।

भाजपा मंत्रियों को क्यों नेहरू, गांधी की याद?

भाजपा के दो बड़े नेताओं का गांधी नेहरू को याद करने के क्या मतलब हैं?  क्या सरकार में घुटन से बैचेन होकर वे नेहरू, गांधी के उदार विचारों तक पहुंचे? 

विपक्ष ने ऐवें ही खड़े किए अपने उम्मीदवार!

विपक्ष ने मारग्रेट अल्वा को क्यों चुना इसका कोई कारण कोई नहीं बता सकता है। सिवा इसके कि किसी को तो चुनना था। ऐसे ही यशवंत सिन्हा की उम्मीदवारी।

और लोड करें