नफरत की जड़ है वोट राजनीति

संदेह नहीं समस्या की जड़ है सरकार। और उसकी जड़ है सत्तारूढ़ दल की वोट राजनीति। उसी की वजह से नफरत मुख्य धारा का राजनीतिक विमर्श है।

मीडिया है नफरत फैलाने का टूल!

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि मीडिया है नफरत फैलाने का टूल। सिर्फ प्राइम टाइम में नहीं, बल्कि हर समय न्यूज चैनलों पर कुछ न कुछ ऐसा चलता होता है

विपक्षी राज्यों में राज्यपालों की भूमिका

इससे पहले शायद ही कभी विपक्ष शासित राज्यों में सरकार और राज्यपाल का ऐसा टकराव देखने को मिला होगा, जैसा अभी देखने को मिल रहा है।

हमारे टीवी चैनल कैसे सुधरें ?

अदालत ने सरकार से मांग की है कि टीवी चैनलों पर घृणा फैलानेवाले बयानों को रोकने के लिए उसे सख्त कानून बनाने चाहिए।

लोकल बनाम ग्लोबल

पहले वित्त मंत्री और अब वाणिज्य मंत्री के बयानों से यह साफ है कि नरेंद्र मोदी सरकार देसी उद्योगपतियों से खुश नहीं है।

चीन से चिंतित अमेरिका

ये बात बेहिचक कही जा सकती है कि अब लगभग रोजमर्रा के स्तर पर चीन की चिंता में अमेरिका की काफी ऊर्जा खर्च होती है।

चंदे का हिसाब तो होना चाहिए

चुनाव आयोग ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है कि पार्टियों को मिलने वाले नकद चंदे की सीमा 20 हजार रुपए से घटा कर दो हजार रुपए की जाए।

पुरानी पेंशन का चारा

राज्यों में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अब विभिन्न विपक्षी दलों की तरफ से सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना वापस लाने के वादे की झड़ी लग गई है।

ये मायूसी वाजिब है

रूस की अर्थव्यवस्था को ठप करने का मकसद तो पूरा नहीं हुआ, उलटे यूरोप से लेकर अमेरिका तक में बड़ी आर्थिक उथल-पुथल मची हुई है।

ईरान में हिजाब पर कोहराम

मुस्लिम औरतें हिजाब पहने या नहीं, इस मुद्दे को लेकर ईरान में जबर्दस्त कोहराम मचा हुआ है। जगह-जगह हिजाब के विरूद्ध प्रदर्शन हो रहे हैं।

ममता डर गईं या कोई रणनीति है?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के तेवर नरम पड़ गए हैं। वे भाजपा के खिलाफ बयान अब भी दे रही हैं लेकिन उस तरह से लड़ नहीं रही हैं

आरिफ से विजयन टक्कर न लें

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को कल एक पत्रकार-परिषद बुलानी पड़ी। क्या आपने कभी सुना है कि किसी राज्यपाल ने कभी पत्रकार-परिषद आयोजित की है?

पहला पखवाड़ा प्रभावशाली

भारत जोड़ों जैसा असाधारण अभियान देश में पैदा हुई असाधारण परिस्थितियों के कारण शुरू करना पड़ा है।

चंदे की वाजिब चिंता

निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक चंदे पर जो पहल की है, वह स्वागतयोग्य है। ये दीगर बात है कि इस पहल के सफल होने की न्यूनतम संभावना है।

राहुल कांग्रेस की ताकत हैं या कमजोरी?

यह यक्ष प्रश्न है कि राहुल गांधी कांग्रेस की ताकत हैं या उसकी कमजोरी? देश में शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसकी कोई राय इस सवाल पर नहीं होगी।

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