अब सौर पैनलों पर टैक्स घटा, तो चीन से ही आयात बढ़ेगा। इससे भारत के बारे में क्या धारणा बनेगी? इसीलिए अपेक्षित यह है कि कोई कदम सभी पहलुओं पर पूरे विचार-विमर्श के बाद ही उठाया जाए।
एक खबर के मुताबिक भारत सरकार अब चीन से सौर पैनलों के आयात पर टैक्स घटाने पर विचार कर रही है। जबकि इसके पहले भारत ने चीन से आयात कम करने के लिए सौर पैनलों पर 40 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था। सवाल है कि जब यह फैसला लिया गया, उसके बाद स्थिति में ऐसा क्या बदलाव आ गया है? एक विदेशी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार अब शुल्क को 40 से 20 प्रतिशत पर लाने और साथ ही जीएसटी को 12 से पांच प्रतिशत पर लाने का विचार कर रही है। दरअसल सरकार ने अप्रैल 2022 में सौर पैनलों के आयात पर 40 प्रतिशत टैक्स और सौर सेलों के आयात पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाया था। तब बताया गया था कि इस कदम का उद्देश्य चीन से आयात पर लगाम लगाना है, ताकि देश के अंदर इनके उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। लेकिन खबरें है कि असल में ऐसा नहीं हुआ । भारतीय निर्माता इन पैनलों और सेलों की मांग को पूरा करने लायक उत्पादन कर नहीं पाए। जबकि ऊंचे शुल्क की वजह से इन उत्पादों की देश में कमी हो गई और सौर परियोजनाओं का काम धीमा पड़ गया।
इसकी वजह से भारत सौर ऊर्जा उत्पादन के अपने लक्ष्यों को भी हासिल नहीं कर पाया। 2022 में 100 गीगावाट सौर ऊर्जा इंस्टॉल करने का लक्ष्य था, लेकिन कुछ रिपोर्टों के मुताबिक हासिल सिर्फ 63 मेगावाट हो पाया। इस हाल को देखते हुए भारतीय सौर कंपनियों ने इस साल आम बजट से पहले ही सरकार से इन टैक्स दरों को कम करने की मांग की थी। जीएसटी दर भी इस समस्या का बड़ा हिस्सा है। करीब चार साल पहले सौर परियोजनाओं पर जीएसटी सिर्फ पांच प्रतिशत ही थी, जिसे बाद में बढ़ा कर 8.9 प्रतिशत किया गया और फिर बढ़ा कर 12 प्रतिशत कर दिया गया। यह एक तथ्य है कि सौर उपकरणों का 80 प्रतिशत उत्पादन चीन में होता है। अब टैक्स घटा, तो चीन से ही आयात बढ़ेगा। इससे भारत के बारे में क्या धारणा बनेगी? इसीलिए अपेक्षित यह है कि कोई कदम सभी पहलुओं पर पूरे विचार-विमर्श के बाद ही उठाया जाए।
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