समाज के दो ‘सच’

एक ‘सच’ में यकीन करने वाले लोग यह मानते हैं कि देश में सब कुछ अच्छा हो रहा है। दूसरी गोलबंदी पर मौजूद समूहों की सोच है कि सब कुछ बिगड़ता जा रहा है।

मीडिया की क्या जिम्मेदारी?

देश के एक मशहूर टीवी चैनल समूह की खरीदारी लगभग पूरी कर लेने के बाद अब उद्योगपति गौतम अडानी जब कभी मीडिया की भूमिका के बारे में बात करेंगे, तो बेशक लोग उस पर ध्यान देंगे।

समीक्षा पर स्पष्टता चाहिए

जाहिर है, इन बातों से संकेत मिलता है कि केंद्र आर्थिक और मानव विकास के पैमों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले (खास कर दक्षिणी) राज्यों को मनरेगा के तहत मिलने वाले धन से वंचित करना चाहती है।

ना जवाबदेही, ना कार्रवाई!

दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन को जेल में मिल रही सुविधाओं के वीडियो ने एक बार इस देश में खास और आम लोगों की हैसियत में फर्क का अहसास कराया है।

स्वर्ण में लौटा भरोसा

इसका प्रमुख कारण अमेरिका अपने यहां जमा रूस के 300 बिलियन डॉलर को जब्त करने लेने का फैसला था।

सर्वाधिक आबादी की चुनौती

तेजी से जनसंख्या में वृद्धि गरीबी उन्मूलन, भूख और कुपोषण से लड़ाई और शिक्षा- स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रसार को और चुनौतीपूर्ण बना देती है। भारत को अभी से इन चुनौतियों की तरफ ध्यान देना होगा।

बात होती है दिल्ली की!

दिल्ली में हर साल दिवाली के आसपास प्रदूषण का धुआं आसमान में छा जाता है। तब मीडिया के लेकर सियासी हलकों तक में इसकी जोरदार चर्चा होती है।

सुर्खियों के सुखबोध का सच

ये हर साल की कहानी है। नवंबर या दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र का जलवायु सम्मेलन होता है। जब ये समाप्त होता है तो सुर्खियों में बताया जाता है कि एक बड़ी सहमति के साथ सम्मेलन हुआ।

देसी श्रोताओं के लिए?

क्या भारत आतंकवाद पर दुनिया को अपनी बात समझा पा रहा है? शायद नहीं। हाल ही में पश्चिमी देशों के वर्चस्व वाले एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट से पाकिस्तान को मुक्त कर दिया गया है।

सीआईआई की चिंताएं

सीआईआई चाहती है कि आय कर में छूट देकर और ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं के जरिए लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाई जाए।

क्योंकि राज्य सर्वोच्च है!

डेटा प्रोटेक्शन के बिल के पेश प्रारूप के बारे में पहली बात यह जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि यह अंतिम मसविदा नहीं हैँ। बल्कि सरकार ने इसे आम जन की राय जानने के लिए सामने रखा है।

ट्रंप को हलके से ना लें

डॉनल्ड ट्रंप के 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का एलान कर देने से रिपब्लिकन पार्टी के एक हिस्से बेचैनी है। ये हिस्सा अब उन्हें पार्टी के लिए बोझ मानता है।

सिफर नतीजे का सम्मेलन

ग्लोबलाइलजेशन के दौर थम चुका है। वैश्विक सप्लाई चेन टूट चुका है। दुनिया खेमों में बंट रही है। तब क्या जी-20 की ऐसी प्रासंगिकता नहीं बचेगी, जिस कारण यह एक महत्त्वपूर्व समूह बना था?

उपभोक्ता अधिकार के पक्ष में

अमेरिका में छह विमानन कंपनियों को ग्राहकों के लगभग दस अरब रुपये लौटाने का आदेश दिया गया है। इन कंपनियों में भारत की एयर इंडिया भी है।

अपने हित की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए वहां जुटे नेताओं को उचित आगाह किया कि वे दूसरे देशों की ऊर्जा सुरक्षा को बाधित करने वाले कदम ना उठाएं।

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