सभ्यता ध्वंस की भाषा, लोकतंत्र की परीक्षा
भाषा ही यह तय करती है कि क्या सोचा जा सकता है और क्या किया जा सकता है, और जब भाषा से संकोच हटता...
भाषा ही यह तय करती है कि क्या सोचा जा सकता है और क्या किया जा सकता है, और जब भाषा से संकोच हटता...
पिछले एक दशक से नई दिल्ली ने खुद को एक उभरती शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसके वैश्विक स...
अमेरिका और ईरान दोनों अलग-अलग तरह के युद्ध के लिए बने हैं, अलग-अलग समय-धाराओं पर लड़ते हैं,
उन्नति के सतही चित्र के नीचे एक शांत, पर अधिक निर्णायक वास्तविकता मौजूद है
1 जनवरी 2026 को भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। ब्राजील ...
प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी में जंग से ठिक पहले इज़राइल की संसद केनेस्सेट में खड़े होकर भारत-इज़राइल संबंधों को “...
दुनिया आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ शक्ति केवल सैन्य या आर्थिक आकार से तय नहीं होगी, बल्कि उन देश...
सबसे चिंताजनक बात सिर्फ बमबारी नहीं, बल्कि नियमों का कमजोर होना है। जब नागरिक संविधान पर भरोसा ...
भारत इस आर्थिक कूटनीति की वापसी से परखा गया। आलोचकों का तर्क है कि नई दिल्ली ने दबाव में जल्दी कदम उठाया
भारत ने ज़्यादा ध्यान उन तकनीकों को अपनाने और लागू करने पर दिया जो बाहर विकसित हुईं। हमारे कई श्रेष्ठ शोधकर्ता व...
आयोजन की अव्यवस्था एक रूपक बन गई। भीड़ से भरे हॉल, कमजोर कनेक्टिविटी और कड़ी सुरक्षा ने उन सहज ...
सरकारी विज्ञप्तियों में जिन यूनिकॉर्न का जश्न मनाया जाता है, उनके मुकाबले हजारों स्टार्टअप्स ऐस...
अर्थशास्त्री इस स्थिति को लेकर सावधान हैं। जगदीश भगवती ने पहले ही चेताया था कि बहुत सारे अलग-अलग व्यापार समझौते ...
कोई देश केवल घोषणा करके तकनीकी महाशक्ति नहीं बन जाता। तकनीकी शक्ति धीरे-धीरे बनती है—दशकों की म...
नई दिल्ली आज जिस बदलाव को “ऐतिहासिक रीसेट” ब...