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नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, आखिर हम हिंदू कर क्या रहे हैं..क्या हम आने वाले खतरे को जानबूझ कर नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं…हिंदुओं का लिंगानुपात बिगड़ता जा रहा है..अब लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है..रचनात्मकता और मेहनत की बयाज नकल ने हमें नाकाबिल तो बनाया ही है और अब सोशल मीडिया, एआई, डेटिंग ऐप्स के मकड़ या कहे तो मायाजाल ने युवाओं को कल्पना लोक में पहुंचा दिया है और अब हम उसी में और उसके इशारे पर ही जीना चाहते हैं…इसलिए अप तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है..हम बांझ हो रहे हैं!
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