अगर तृणमूल कांग्रेस के जानकार नेताओं की मानें तो इस बार भी विधानसभा चुनाव का असली बैटलग्राउंड भवानीपुर नहीं, बल्कि नंदीग्राम होगा। पिछली बार नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी को चैलेंज किया था। उनकी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला लेकिन वे खुद दो हजार से कुछ कम वोट से हार गई थीं। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट खाली करा कर वहां से उपचुनाव लड़ा। इस बार शुभेंदु अधिकारी उनको चैलेंज देने भवानीपुर पहुंचे हैं। दूसरी ओर ममता बनर्जी नंदीग्राम को बैटलग्राउंड बना कर शुभेंदु अधिकारी को वहां घेरना चाहती हैं। तृणमूल के जानकार नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी इस बार नंदीग्राम में वह करना चाहती हैं, जो पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने अमेठी में किया। जैसे राहुल ने अमेठी में अपनी हार का बदला लिया था उसी तरह इस बार ममता नंदीग्राम में अपनी हार का बदला लेंगी।
गौरतलब है कि 2019 के चुनाव में स्मृति ईरानी ने अमेठी में राहुल गांधी को हरा दिया था। लेकिन 2024 में राहुल ने परिवार के करीबी और कांग्रेस के कार्यकर्ता किशोरी लाल को टिकट देकर स्मृति ईरानी को हरवाया। इस बार ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी के करीबी रहे पवित्र कर को वहां से उम्मीदवार बनाया है। पवित्र कर पहले तृणमूल कांग्रेस में थे। जब शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी छोड़ी तो वे भी तृणमूल छोड़ कर उनके साथ चले गए। उनको पार्टी में वापस शामिल करा कर ममता ने उनको टिकट दिया है। अपनी भवानीपुर सीट पर भी मुकाबला आसान बनाने के लिए ममता चाहती हैं कि नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी को मजबूत लड़ाई में उलझाया जाए। ध्यान रहे नंदीग्राम या मेदिनीपुर का पूरा इलाका अधिकारी परिवार का गढ़ है। लेकिन उनके करीबी व्यक्ति को तोड़ कर ममता ने वहां चुनाव में उतारा है तो उसके पीछे एक सोची समझी रणनीति दिख रही है।


