अपने या बाहरी को नेता बनाएगी भाजपा?

पश्चिम बंगाल में नतीजे आने के बाद सरकार बन गई, विधायकों की शपथ हो गई, स्पीकर का चुनाव हो गया पर अभी तक भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं हुआ है। क्योंकि भाजपा को समझ में नहीं आ रहा है कि किसको नेता बनाएं। चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी भाजपा विधायक दल और विधानसभा में नेता विपक्ष पद के दावेदार बताए जा रहे हैं। लेकिन अगर भाजपा उनको नेता बनाती है तो उनसे पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए मुकुल रॉय को कहीं और एडजस्ट करना होगा क्योंकि वे दोनों साथ काम नहीं कर सकते हैं। वैसे मुकुल रॉय भी अपनी दावेदारी किए हुए हैं लेकिन मुश्किल यह है कि वे कभी विधायक नहीं रहे हैं, जबकि शुभेंदु अधिकारी का बतौर विधायक लंबा अनुभव है और वे मुख्यमंत्री को हरा कर विधायक बने हैं। सो, उनको बनाने से विधानसभा में भाजपा मजबूत रहेगी। शुभेंदु अधिकारी या मुकुल रॉय की बहस के बीच एक बड़ी मुश्किल राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भाजपा के पुराने नेताओं की है। संघ के पदाधिकारी चाहते हैं कि बाहर से आए किसी नेता की बजाय भाजपा अपने किसी पुराने नेता को विपक्ष के… Continue reading अपने या बाहरी को नेता बनाएगी भाजपा?

अब आगे क्या करेंगे प्रशांत किशोर?

इंडियन पोलिटिकल एक्शन कमेटी यानी आईपैक के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का आंकड़ा तीन अंक में पहुंच जाए तो वे चुनाव प्रबंधन का काम छोड़ देंगे। भाजपा तीन अंक तक तो नहीं पहुंच पाई इसके बावजूद प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रबंधन का काम छोड़ने का ऐलान कर दिया। उनके हाथ में अभी पंजाब का काम है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने उनको अपना सलाहकार नियुक्त किया है। अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले पंजाब चुनाव से पहले पीके ने अपना काम छोड़ने का ऐलान किया है। तभी सवाल है कि वे आगे क्या करेंगे? क्या सचमुच जैसा कि उन्होंने कहा है वे असम के टी-गार्डेन में परिवार के साथ रहने चले जाएंगे? इसकी संभावना कम है। ज्यादा संभावना इस बात की है कि वे सक्रिय राजनीति में उतरें। हालांकि इस बारे में भी उन्होंने कहा कि वे बिहार में एक बार सक्रिय राजनीति में हाथ जला चुके हैं। लेकिन जिस तरह से बिहार में सक्रिय राजनीति में आने और जदयू ज्वाइन करने के बाद उन्होंने आईपैक का काम छोड़ा था और फिर राजनीति छोड़ कर आईपैक चलाने लगे थे वैसे ही फिर से सक्रिय राजनीति में जाने या… Continue reading अब आगे क्या करेंगे प्रशांत किशोर?

बंगाल में आज अंतिम चरण का मतदान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के आठवें और अंतिम चरण का मतदान गुरुवार को होगा। सात चरण के मतदान के बाद राज्य की बची हुई 35 सीटों पर गुरुवार की सुबह सात बजे मतदान शुरू होगा और शाम छह बजे तक चलेगा। 294 सदस्यों की विधानसभा की 257 सीटों पर मतदान हो चुका है और दो सीटों पर उम्मीदवारों के निधन की वजह से मतदान टल गया है। आठवें और अंतिम चरण के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं और कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी के निर्देश दिए गए हैं। राज्य विधानसभा के आठवें और अंतिम चरण में कोलकाता की सात विधानसभा सीटों सहित बीरभूम की 11, मुर्शिदाबाद की 11 और मालदा जिले की छह विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसी के साथ बंगाल में विधानसभा चुनाव के मतदान की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। इसके बाद दो मई को मतगणना होगी। आखिरी चरण का मतदान होने के बाद मीडिया समूहों की ओर से कराए गए एक्जिट पोल के नतीजे शाम तक जारी होंगे। राज्य में अंतिम तीन चरणों के चुनाव कराने में आयोग को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है क्योंकि अचानक से कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो गई। चौथे… Continue reading बंगाल में आज अंतिम चरण का मतदान

सातवें चरण में 75 फीसदी से ज्यादा मतदान

पश्चिम बंगाल में सातवें चरण के मतदान में 75 फीसदी से ज्यादा लोगों ने वोट डाले हैं। चुनाव आयोग के प्रांरभिक आंकड़ों के मुताबिक शाम छह बजे मतदान का समय खत्म होने तक 75.06 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का

महामारी के बीच सातवें चरण का मतदान आज

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस की महामारी के बीच सोमवार को सातवें चरण का मतदान होगा। राज्य के चार जिलों की 26 सीटों पर सुबह सात बजे से वोट डाले जाएंगे। राज्य में छठे चरण के पहले चुनाव आयोग ने रैलियों, रोडशो आदि पर पाबंदी लगा दी थी इसके बावजूद राज्य में कोरोना का कहर जारी है। पश्चिम बंगाल में अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से चार उम्मीदवारों की मौत हो चुकी है। उत्तर 24 परगना के खरदह विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार काजल सिन्हा की कोरोना वायरस से मौत हो गई। रविवार को काजल ने कोलकाता के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। उधर कोलकाता की टालीगज सीट से भाजपा के प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो संक्रमित हो गए हैं। उनकी पत्नी की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान कोविड-19 नियमों की जम कर धज्जियां उड़ी थीं। प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और राज्य की मुख्यमंत्री सहित तमाम नेता लाखों की भीड़ जुटाकर रैलियां, सभा और रोड शो कर रहे थे। इस दौरान संक्रमण बड़े पैमाने पर पूरे राज्य में फैला। इसकी वजह से अब तक चार प्रत्याशियों की मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से… Continue reading महामारी के बीच सातवें चरण का मतदान आज

बंगाल में हिंसा कब तक?

विरला ही कोई ऐसा भारतीय  होगा जो किसी-न-किसी क्षेत्र में बंगाल की असाधारण प्रतिभा एवं तीक्ष्ण बौद्धिकता से प्रभावित न हुआ हो! पर कैसी विचित्र विडंबना है कि जो बंगाल कला, सिनेमा, संगीत, साहित्य, संस्कृति की समृद्ध विरासत और बौद्धिक श्रेष्ठता के लिए देश ही नहीं पूरी दुनिया में विख्यात रहा हो, वह आज चुनावी हिंसा, अराजकता, रक्तपात के लिए जाना जाने लगा है। शायद ही कोई ऐसा दिन बीतता हो जब वहाँ होने वाली हिंसक राजनीतिक झड़पें अख़बारों की सुर्खियाँ न बनती हों! राज्य विधानसभा के लिए चले रहे चुनाव-प्रचार के दौरान इस बार वहाँ भाषा की मर्यादा का जमकर उल्लंघन हुआ, नैतिकता एवं मनुष्यता को ताक पर रख दिया गया, संसदीय परंपराओं की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गईं, एक-दूसरे पर अनर्गल आरोपों-प्रत्यारोपों की झड़ी लगा दी गई, कोविड-बचाव के दिशानिर्देशों की घनघोर उपेक्षा एवं अवमानना की गई। और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि सभी पक्षों ने किसी-न-किसी स्तर पर गंभीरता, जिम्मेदारी एवं सरोकारधर्मिता की कमी दर्शाई। ममता बनर्जी और तृणमूल काँग्रेस ने तो सख़्ती किए जाने पर उलटे चुनाव-आयोग एवं केंद्रीय सुरक्षा बल जैसी संस्थाओं की साख़ एवं विश्वसनीयता पर ही सवाल उछाल दिया। वहाँ छिड़ी चुनावी रंजिशों से उठती हिंसक लपटों ने स्त्री-पुरुष-बाल-वृद्ध-जवान किसी को नहीं बख़्शा। 82… Continue reading बंगाल में हिंसा कब तक?

ममता ने मीटिंग का मुद्दा बनाया

पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं और चुनाव के बीच कोई भी पार्टी आम लोगों से जुड़ी बातों का मुद्दा बनाने में पीछे नहीं रह रही है। तभी ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक को मुद्दा बना दिया। ध्यान रहे इस बैठक में ममता बनर्जी को नहीं बुलाया गया था क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्र सरकार का मानना था कि पश्चिम बंगाल कोरोना से ज्यादा प्रभावित राज्य नहीं है। हालांकि राज्य में हर दिन अब 10 हजार या उससे ज्यादा केसेज आ रहे हैं। राज्य में 26 फरवरी को चुनाव की घोषणा हुई थी उस समय से अभी तक कोरोना के केसेज में ढाई हजार फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को ज्यादा प्रभावित राज्य क्यों नहीं माना यह समझ में नहीं आया। वैसे भी प्रधानमंत्री की बैठक 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से थी। जिन राज्यों में रोज 10 हजार से ज्यादा केसेज आ रहे हैं, ऐसे शीर्ष 10 राज्यों में पश्चिम बंगाल भी है। फिर भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया गया। बाद में ममता बनर्जी ने कहा कि अगर उनको बुलाया जाता… Continue reading ममता ने मीटिंग का मुद्दा बनाया

बंगाल में डेढ़ सौ सीट जीतने का प्रचार

भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में गजब कर रही है। पांच चरण के मतदान के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 122 सीट जीतने का दावा किया। पांच चरण तक 180 सीटों पर मतदान हुआ था, जिसमें से शाह ने 122 सीट जीतने का दावा किया। अब छह चरण में 223 सीट का चुनाव हो गया तो भाजपा डेढ़ सौ सीट जीतने का प्रचार कर रही है। पार्टी के नेता जो प्रचार कर रहे हैं, उससे आगे बढ़ कर पार्टी ने सोशल मीडिया में कुछ अलग अलग लोगों से प्रचार शुरू कराया है। अपने को स्वतंत्र राजनीतिक विचारक और सैफोलॉजिस्ट के तौर पर पेश कर रहे कुछ लोगों ने छठे चरण के बाद प्रचार किया है कि भाजपा डेढ़ सौ सीट जीत रही है। सबसे पहली बात तो यह है कि चुनाव आयोग ने एक्जिट पोल पर रोक लगाई है। आखिरी चरण के मतदान से पहले किसी तरह से आंकड़ों का प्रोजेक्शन नहीं किया जा सकता है। लेकिन हैरानी की बात है कि कुछ लोग लगातार हर चरण के बाद सीटों का प्रोजेक्शन कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि चुनाव आयोग का रोक लगाने का फैसला सिर्फ टेलीविजन चैनलों या अखबारों के लिए है। यह… Continue reading बंगाल में डेढ़ सौ सीट जीतने का प्रचार

सीटों की ताजा भाजपाई हवाबाजी!

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में पांच चरण में जिन 180 सीटों पर मतदान हुआ है उसमें से भाजपा 122 जीत चुकी है। उनसे पहले चौथे चरण तक 135 सीटों के मतदान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि भाजपा शतक लगा चुकी है। इसका मतलब है कि पांचवें चरण की 45 में से भाजपा अधिकतम 22 सीट जीतने का दावा कर रही है। पहले तीन चरण के मतदान में भाजपा ने बड़े दावे किए थे लेकिन चौथे और पांचवें चरण में भाजपा ने पहले के मुकाबले कम सीटें जीतने का दावा किया। देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों जिस पोजिशन में हैं वहां बैठे नेता का इतना सटीक दावा कई सवाल खड़े करता है। जैसे यह कि आखिर दोनों इतने पक्के तौर पर सीटों की संख्या कैसे बता रहे हैं? अगर सचमुच इतनी ही सीटें आईं तो क्या इससे यह आरोप नहीं लगेगा कि ईवीएम से छेड़छाड़ हुई है और इसलिए सरकार को पहले से पता था कि सरकारी पार्टी कितनी सीटें जीतेगी? यह भी सवाल है कि अगर इतनी सीटें नहीं आती हैं तो क्या झूठे, गलत या भ्रामक दावे… Continue reading सीटों की ताजा भाजपाई हवाबाजी!

कोरोना में चुनाव आयोग भी जिम्मेदार!

वैसे तो पिछले कुछ वर्षों में भारत की लगभग सभी संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र के कथित स्तंभों ने अपनी साख गंवाई है लेकिन जैसी अक्षमता और लापरवाही चुनाव आयोग के कामकाज में देखने को मिली है वह अभूतपूर्व है। इस समय अगर पूरा देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर के भंवर में फंसा है तो कहीं न कहीं चुनाव आयोग भी इसके लिए जिम्मेदार है। अगर पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हिंसक और जहरीला हुआ है तो उसके लिए भी आयोग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है। अगर केंद्रीय सुरक्षा बलों की साख पर बट्टा लगा है और उनकी गोलीबारी में चार बेकसूर लोग मारे गए हैं तो उसके लिए भी चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बनती है। अगर राज्य का प्रशासन पार्टी लाइन पर बंटा हुआ दिख रहा है या संघीय ढांचे पर चोट हुई है या चुनाव में धनबल का इस्तेमाल ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंचा है तो चुनाव आयोग इसकी जिम्मेदारी से भी नहीं बच सकता है। अगर आज चुनाव आयोग पर यह आरोप लग रहा है कि वह भाजपा और केंद्र सरकार के कहे अनुसार काम कर रही है और विपक्षी पार्टियों के साथ भेदभाव कर रही है तो इसके लिए भी खुद आयोग जिम्मेदार है। पश्चिम… Continue reading कोरोना में चुनाव आयोग भी जिम्मेदार!

ज्यादा बड़ी लड़ाई बंगाल की है!

सब लोग पूछ रहे हैं कि प्रधानमंत्री कोरोना वायरस से लड़ाई पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं? क्यों वे पश्चिम बंगाल की चुनावी लड़ाई को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं? क्यों वे तमाम आलोचनाओं से बेपरवाह पश्चिम बंगाल में रैलियां कर रहे हैं? पिछली बार यानी कोरोना वायरस की पहली लहर के समय प्रधानमंत्री ने खुद कमर कसी थी और कोरोना के खिलाफ जंग की कमान संभाली थी। उन्होंने कई बार टेलीविजन पर आकर देश को संबोधित किया। लोगों को ढाढस बंधाई। ताली-थाली बजवाए और दीये भी जलवाए। जैसा भी हो एक आर्थिक पैकेज भी घोषित कराया। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। इस बार प्रधानमंत्री मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार कर रहे हैं और उससे फुरसत मिलने पर कभी कभार अधिकारियों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों के साथ बैठक कर ले रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री, जिन्होंने पहली लहर में कोरोना संक्रमित होने के बावजूद वायरस के खिलाफ जंग में सक्रिय भूमिका निभाई थी और अस्पतालों तक का दौरा किया था, वे भी इस बार चुनाव प्रचार में ही बिजी हैं। सवाल है कि क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह यह नहीं समझ रहे हैं कि देश के सामने कोरोना वायरस का बहुत… Continue reading ज्यादा बड़ी लड़ाई बंगाल की है!

भाजपा ने जो चाहा, आयोग ने वो किया!

भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती थी कि पश्चिम बंगाल में बचे हुए चार चरणों का या कम से कम आखिरी तीन चरणों का मतदान एक साथ हो। तभी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के मांग करने और बाकी विपक्षी पार्टियों के परोक्ष समर्थन के बावजूद केंद्रीय चुनाव आयोग ने बंगाल में बचे हुए चऱणों का मतदान एक साथ कराने से इनकार कर दिया। चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों की बैठक में दो टूक अंदाज में कह दिया कि मतदान पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक आठ चरण में ही होंगे। असल में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुझाव दिया था कि बचे हुए चरणों का मतदान एक साथ करा लिया जाए। यह अच्छा और तार्किक सुझाव था, जिस पर चुनाव आयोग को खुले दिमाग से विचार करना चाहिए था। पर इसकी बजाय उसने भाजपा की बात सुनी, जिसने एक अजीब सा तर्क दिया कि पहले पांच चरणों में मतदाताओं को जो मौका मिला है वहीं मौका बाकी तीन चरणों में भी मतदाताओं को मिलना चाहिए। सवाल है कि पार्टियां प्रचार करती हैं तो उसमें जनता को क्या मिलता है? नेता प्रचार करते हैं, रैलियां करते हैं, भेड़ियाधसान भीड़ उसमें शामिल… Continue reading भाजपा ने जो चाहा, आयोग ने वो किया!

मतदान के दिन रैलियों पर रोक हो

वैसे तो चुनाव से जुड़े अनेक नियम और आचार संहिता के अनेक मुद्दे हैं, जिनमें बदलाव की सख्त जरूरत है लेकिन मतदान के दिन बड़े नेताओं के रैली करने का मुद्दा ऐसा है, जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। मतदान के दिन होने वाली रैलियां, रोड शो और चुनाव प्रचार वोटिंग को तो प्रभावित करता ही है साथ स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की संभावना को भी कम करता है। इसके अलावा मतदान के दिन होने वाली रैलियों से हिंसा फैलने की संभावना अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा होती है। पहले भी कई चरण में मतदान होते थे लेकिन मतदान को प्रभावित करने के लिए वोटिंग के दिन रैलियां करने का चलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया। जिस दिन मतदान होता है उस दिन वे अगले चरण के मतदान वाले किसी क्षेत्र में रैली करने पहुंच जाते हैं। जैसे शनिवार यानी 17 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में पांचवें चरण का मतदान चल रहा था और उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो चुनावी रैलियों को संबोधित किया। इससे पहले भी तीन चरण के मतदान के दिन उन्होंने रैली की और एक चरण के मतदान के दिन बांग्लादेश में भाषण आदि दिए। उसका भी एक मकसद मतदान को ही प्रभावित करना था।… Continue reading मतदान के दिन रैलियों पर रोक हो

चुनाव खत्म होते ही कोरोना विस्फोट

पश्चिम बंगाल को लेकर बड़ी चिंता हो रही है। जैसे जैसे मतदान खत्म होता जा रहा है वैसे वैसे कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। बंगाल में मतदान शुरू होने से पहले रोज मिलने वाले संक्रमितों की संख्या तीन सौ के करीब आ गई थी और ऐसा लग रहा था कि कोरोना खत्म हो गया। हालांकि यह भी हैरानी की बात थी कि बंगाल जैसे राज्य में, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं का घनघोर अभाव है और बड़ी आबादी है वहां कोरोना कैसे खत्म हो रहा है। लेकिन यह लगभग खत्म होने की स्थिति में था। यही स्थिति तमिलनाडु, केरल और असम में भी थी। असम में तो फिर भी अभी स्थिति काबू में है पर बाकी राज्यों में यह बेकाबू होती जा रही है। जिन राज्यों में चुनाव खत्म हो गए हैं या बंगाल में जहां चुनाव चल रहा है वहां कोरोना वायरस के केसेज में पांच से 12 सौ फीसदी तक का इजाफा हुआ है। तमिलनाडु में जहां पांच-छह सौ केसेज आ रहे थे वहां अब आठ हजार से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। केरल में केसेज दो हजार से नीचे आ गए थे वहां संक्रमितों की संख्या 10 हजार से ऊपर पहुंच गई है। यही… Continue reading चुनाव खत्म होते ही कोरोना विस्फोट

जहरीली और हिंसक होती राजनीति!

लोग चुनाव लड़ने के लिए राजनीति करते हैं। कुछ लोग राजनीति में आते ही चुनाव लड़ जाते हैं लेकिन बहुत से लोग जीवन भर राजनीति करते रह जाते हैं और चुनाव नहीं लड़ पाते। कुछ लोग पहली ही बार चुनाव लड़ कर विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बन जाते हैं और बहुत से लोग अनेक बार चुनाव लड़ कर भी जीत नहीं पाते। चुनाव लड़ना एक साध्य है, जिसका साधन राजनीति है। यानी केंद्रीय तत्व राजनीति है। राजनीति तब भी थी, जब राज्य नहीं थे और वहां भी है, जहां राज्य नहीं है। कारोबार में राजनीति है, नौकरी की जगह पर राजनीति है और यहां तक कि परिवार में, बेहद नजदीकी रिश्तों में भी राजनीति है। इसलिए जब राजनीति घृणा या हिंसा का पर्याय बन जाती है तो वह किसी भी समाज के लिए दुखद स्थिति होती है। राजनीति अच्छी, सच्ची और साफ-सुथरी भी हो सकती है। राज्य की और चुनाव की राजनीति भी संस्कारों के साथ की जा सकती है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि राजनीति से उसके संस्कार खत्म हो गए हैं। उसकी अच्छाई खत्म हो गई। राजनीति सचाई से दूर चली गई है। अब राजनीति का मतलब खास कर चुनावी राजनीति का मतलब सिर्फ झूठ… Continue reading जहरीली और हिंसक होती राजनीति!

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