वियतनाम, श्रीलंका, फिलीपीन्स और जॉर्डन की प्रति व्यक्ति औसत आय 4,635 डॉलर से अधिक हो गई है, जिससे वे उच्च मध्यम आय वर्ग में पहुंच गए हैं। भारत अभी इस मंजिल से कोसों दूर है।
विश्व बैंक ने बीते हफ्ते वियतनाम, श्रीलंका, फिलीपीन्स और जॉर्डन को उच्च-मध्यम आय वर्ग वाली देशों की श्रेणी में डाल दिया, जबकि जाहिर हुआ कि भारत अभी इस मंजिल से बहुत दूर है। “सबसे तेजी से उठती अर्थव्यवस्था” और “विकसित भारत” की कहानियों में यकीन करने वाले समूहों में इस खबर से बड़ी बेचैनी देखी गई है। विश्व बैंक प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के आधार पर देशों की श्रेणी बनाता है। 1,176 से 4,635 डॉलर प्रति व्यक्ति औसत आय वाले देशों को निम्न मध्य आय वर्ग में रखा जाता है। वियतनाम, श्रीलंका, फिलीपीन्स और जॉर्डन की प्रति व्यक्ति आय 4,635 डॉलर से अधिक हो गई है। जबकि भारत अभी 2,760 डॉलर तक ही पहुंच पाया है।
अपने यहां सबसे ज्यादा व्यग्रता इस तथ्य से पैदा हुई है कि वियतनाम भारत के दो साल बाद यानी 2009 में निम्म मध्यम वर्ग आय श्रेणी में पहुंचा था। उसके 17 साल बाद वह अगली श्रेणी में जा पहुंचा है। जबकि डेमोग्रैफिक डिविडेंड, बड़े उपभोक्ता बाजार और दूरदर्शी नेतृत्व आदि जैसी कथाओं में खोये भारत के सामने मिडल इनकम ट्रैप में फंसे रह जाने की परिस्थिति आ खड़ी हुई है। यहां जानबूझ कर निर्मित निराधार कहानियों ने मानव विकास की उपेक्षा, अनुसंधान एवं विकास की अनदेखी, कारोबार के रास्ते में मौजूद रुकावटों से बेपरवाही तथा आर्थिक और वित्तीय शक्तियों के कुछ घरानों में केंद्रित होते चले जाने की हकीकत पर परदा डाले रखा है।
दूसरी तरफ वियतनाम ने प्रशिक्षित श्रमिक वर्ग तैयार किया, जिससे ‘चाइना+1’ का दौर आने पर उसका लाभ उठाने में वह सफल हुआ। वह मैनुफैक्चरिंग को बहुरूप देने और निर्यात उन्मुख नीतियों पर अमल करने में कामयाब हुआ। नतीजतन, वहां लाखों नई नौकरियां पैदा हुईं, जिनसे आम जन की आमदनी बढ़ी। फिलीपीन्स पश्चिमी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक सेवा प्रदान करने के ढांचे की बदौलत आगे बढ़ा है, तो चार साल पहले व्यापक अस्थिरता का शिकार हुआ श्रीलंका फिर से विकास मार्ग पर चल निकला है। इसके विपरीत भारत के नीति-निर्माता वर्तमान की बलि चढ़ा कर अतीत के गौरव की तलाश में मग्न रहे हैं, तो उसके परिणाम से हम कैसे बच सकते हैं!
