यह मौद्रिक मामला नहीं
ताजा महंगाई को मौद्रिक नीति संबंधी चर्चा में सीमित करना गलत निदान होगा। तमाम संभव क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाने और मुनाफा की प्रवृत्ति पर लगाम लगाते हुए ही फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती है। जब कभी मुद्रास्फीति दर ऊंची होती है, तो मीडिया में ब्याज दर बढ़ने का अंदाजा लगाया जाने लगता है। थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के ताजा आंकड़ों के बाद फिर ऐसा हो रहा है, तो उसमें हैरत की कोई बात नहीं है। मगर यह चर्चा अप्रसांगिक है। इसलिए कि हालिया महंगाई मौद्रिक नीतियों का नतीजा नहीं है। बल्कि इसके...