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‘पठार’ से टकराया रिश्ता

संभवतः नरेंद्र मोदी सरकार के नीतिकार इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि तमाम रियायतें देने के बावजूद ट्रंप प्रशासन से न्यूनतम उम्मीदें पूरी करा पाना भी संभव नहीं है। और बात सिर्फ आर्थिक मोर्चे की नहीं है।

वित्त मंत्री ने स्वीकार किया है कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत ‘पठार’ पर पहुंच गई है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि दोनों पक्ष अब ऐसे बिंदु पर हैं, जहां उनके लिए और रियायतें देना मुश्किल हो रहा है। म्यूनिख सिक्युरिटी कांफ्रेंस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्होंने कहा कि अमेरिका ने टैरिफ को “हथियार” बना लिया है। इससे पहले अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रियर ने कहा था कि भारत  अमेरिका व्यापार समझौते का संपन्न होना तय नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति अभी नहीं बनी है।

इन बयानों का अर्थ है कि डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन की एकतरफा रियायतों की मांग पर लगातार राजी होने के बाद आखिर ऐसी सीमा आई है, जिसके आगे झुकना भारत सरकार को मुनासिब महसूस नहीं हो रहा है। संभवतः नरेंद्र मोदी सरकार के नीतिकार इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि तमाम रियायतें देने के बावजूद ट्रंप प्रशासन से न्यूनतम उम्मीदें पूरी करा पाना भी संभव नहीं है। और बात सिर्फ आर्थिक मोर्चे की नहीं है। बीते हफ्ते विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था अगर अमेरिका (पाकिस्तान प्रायोजित) आतंकवाद और भारत के सुरक्षा हितों के प्रति उदासीनता दिखाता है या पाकिस्तान से सैन्य जुड़ाव बढ़ाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ेगा।

उसके बाद खबर आई कि ट्रंप परिवार से जुड़ी अमेरिका की एक डिफेंस स्टार्ट-अप कंपनी ने पाकिस्तानी सेना को ड्रोन और काउंटर- ड्रोन तकनीक की आपूर्ति के लिए समझौता किया है। इसी कंपनी ने मुंबई स्थित एक फर्म के साथ काउंटर- ड्रोन इंटरसेप्टर उत्पादन का अनुबंध कर रखा है। यानी भारत में निर्मित अस्त्र पाकिस्तान के पास पहुंच सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय रक्षा रणनीतिकारों ने सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका पाकिस्तान को फिर सैन्य समर्थन देने की शुरुआत कर रहा है? दरअसल, अनेक भू-राजनीतिक एवं रणनीतिक मामलों में पाकिस्तान को ट्रंप का साथ मिलता रहा है। इससे भारत में नाराजगी बढ़ी है। फिर भी मोदी सरकार ट्रंप की मिज़ाज-पुर्सी में लगी रही। लेकिन नतीजा शून्य रहा है। बहरहाल, अब भी अगर सरकार रीढ़ दिखाती है, तो देश में उसका स्वागत किया जाएगा।

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