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अपनी इज्जत, अपने हाथ!

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

क्या न्यायपालिका का रुख अब अधिक लोकतांत्रिक हो गया है और वह खुद को नागरिकों का सेवकसमझने लगी है? अथवा, उसे अहसास है कि असंतोष की अभिव्यक्ति को दंडित करने की कोशिश विपरीत परिणाम देगी?

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे के सामने अपनी याचिका की खुद पैरवी के लिए पेश हुए एक व्यक्ति ने जजों को “मिस्टर जुडिशियल सर्वेंट” कह कर संबोधित किया। कहा कि नागरिक होने के नाते ‘मैं’ संप्रभु हूं और आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें। इसके बाद उस व्यक्ति ने भरी अदालत में कागजात उछाले और प्रधान न्यायाधीश के लिए अश्लील शब्द का इस्तेमाल किया। लेकिन जजों ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई ना करने का निर्णय लिया।

ऐसी घटना नौ महीनों के अंतराल पर दोहराई गई है। पिछले अक्टूबर में एक हिंदुत्ववादी वकील ने तत्कालीन चीफ जस्टिस पर जूता फेंका था। लेकिन न्यायमूर्ति गवई गवई ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। पिछले ही साल जब उन्नाव बलात्कार कांड के सजायाफ्ता मुजरिम कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दी गई, तो दिल्ली हाई कोर्ट के सामने सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। वहां मौजूद पीड़िता ने जजों पर गंभीर आरोप लगाए थे। मगर तब भी अवमानना की कार्यवाही जैसी कोई पहल नहीं हुई। इस सिलसिले में उचित ही यह जिक्र हुआ है कि 1999 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जस्टिस ए.एस. आनंद की बेंच के सामने जब एक वकील ने जूता फेंका था, तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर अवमानना मानते हुए वकील को चार महीने की कैद सुनाई थी।

मुद्दा है कि तब से अब तक क्या बदल गया है? क्या न्यायपालिका का नजरिया अब अधिक लोकतांत्रिक हो गया है और वह सचमुच नागरिक को संप्रभु मान खुद को उसका ‘सेवक’ समझने लगी है? अथवा, उसे अहसास है कि उसके हालिया रुख से नागरिकों में असंतोष और अविश्वास बढ़ा है, जिसकी अभिव्यक्ति विभिन्न रूपों में हो रही है, जिसे दंडित करने की कोशिश विपरीत परिणाम देगी? अगर दूसरी बात में तनिक भी दम है, तो उचित होगा कि न्यायपालिका कथित नाराजगी के प्रति सिर्फ नरमी दिखा कर ना रह जाए। वाजिब यह होगा कि वह अपनी प्रतिष्ठा और उसका रुतबा कायम रखने की दिशा में ठोस पहल करे। आखिर, जैसाकि कहा जाता है, अपनी इज्जत अपने हाथ में ही होती है।

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