Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

मणिपुर में अराजक हाल

अफसोसनाक है कि मणिपुर में हिंसा का दायरा फैलने के बावजूद राष्ट्रीय चर्चा में ये राज्य अब हाशिये पर है। ऐसी बेपरवाही आगे चल कर भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा जोखिम साबित हो सकती है।

मणिपुर के कई हिस्सों में सरकारी तंत्र का नियंत्रण ना के बराबर रह गया है। अलग- अलग समुदाय से संबंधित हथियारबंद गुट अपने प्रभाव वाले इलाकों में हत्या, अपहरण, इलाका-बंदी और आम जन-जीवन को ठप करने जैसी गतिविधियां बेकाबू ढंग से चला रहे हैं। फिलहाल, कुकी-जो और नगा समुदायों के बीच ठनी हुई है। 13 मई को तीन पादरियों की हत्या के बाद से कांगपोकपी और सेनापति जिलों में हालात तनावपूर्ण हैं। उसी रोज कुकी-जो और नगा गुटों ने एक-दूसरे समुदाय के लगभग 40 लोगों का अपहरण कर लिया।

उन गुटों ने आपसी सहमति के तहत 15 मई को 12 नगा और 14 कुकी बंधकों को रिहा कर दिया। मगर कुकी गुटों का दावा है कि उनके 14 लोग अभी भी नगा गुटों के पास हैं। इस बीच नगा समूहों ने अपने इलाके में राजमार्ग की बंदी कर रखी है, जिससे पूरे उत्तर-पूर्व क्षेत्र का परिवहन प्रभावित हुआ है। सेना और अर्धसैनिक बलों ने बंधकों को छुड़ाने की मुहिम चलाने का एलान किया है, लेकिन मोटे तौर पर उनकी भूमिका निष्प्रभावी रही है। पिछले फरवरी में मणिपुर में युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई भाजपा सरकार बनी, लेकिन उसके कार्यकाल में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मैतेई, कुकी-जो और नगा गुटों के बीच हिंसा और अशांति का माहौल लगातार बना हुआ है।

अब कुकी-जो संगठनों ने खेमचंद सरकार को बर्खास्त कर राज्य में फिर से राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। मैतेई संगठन भी मौजूदा सरकार से असंतुष्ट हैं। इस बीच नगा और कुकी-जो के बीच टकराव बढ़ गया है। मणिपुर को हिंसा की चपेट में गए तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं। अफसोसनाक है कि राज्य में सामुदायिक खाई और चौड़ी होने तथा हिंसा का दायरा फैलने के बावजूद राष्ट्रीय चर्चा में ये राज्य अब हाशिये पर है। ऐसा लगता है कि वहां से आने वाली खबरें विपक्ष या मीडिया के लिए भी अहम नहीं रह गई हैं। मगर ये याद रखना चाहिए कि उत्तर-पूर्व के इस महत्त्वपूर्ण राज्य को लेकर ऐसी बेखबरी आगे चल कर भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा जोखिम साबित हो सकती है।

Exit mobile version