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मौजूदा दौर के अनुरूप

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

ताजा फैसला श्रमिक कल्याण की उस समझ के विपरीत है, जिससे प्रेरित होकर पांच दशक पहले सर्वोच्च न्यायालय ने ही श्रमिक समर्थक परिभाषा तय की थी। ताजा निर्णय से बेशक मजदूर अधिकारों को झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने मौजूदा दौर में प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक तय कर दिया है कि वैधानिक रूप से अब ‘कारखाना’ का मतलब क्या होगा? इस तरह 1978 में सात जजों की बेंच ने जो परिभाषा तय की थी, वह अब अमान्य हो गई है। उस फैसले को मजदूर अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक ठोस न्यायिक निर्णय समझा गया था। नई परिभाषा के तहत असेंबलिंग या पैकिंग जैसी गतिविधियों को “निर्माण” नहीं माना जाएगा। इस तरह जहां ये कार्य होते हैं, वे ‘कारखाना’ की परिभाषा से बाहर हो जाएंगे। आउटसोर्सिंग के इस दौर में जब ज्यादातर उत्पादन पूरी असेंबली लाइन पर आधारित है, तब ताजा निर्णय का प्रभाव कितना दूरगामी होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह जरूर साफ किया है कि फिलहाल अदालत में लंबित मामलों का निपटारा 1978 की परिभाषा के अनुरूप ही होगा, हालांकि 2020 में पारित हुईं श्रम संहिताओं के तहत दर्ज मामले तब के निर्णय से बंधे नहीं होंगे। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने बहुमत से दिए इस निर्णय में कहा कि कोई इकाई ‘कारखाना’ है या नहीं, यह अब उसकी अपनी संरचना और संदर्भ से तय होगा। इसका अर्थ है कि अस्पताल, स्कूल, नगर निकाय संस्थाओं आदि में काम करने वाले कर्मी भी श्रमिकों को मिले वैधानिक संरक्षण से संभवतः वंचित हो जाएंगे।

कुल मिला कर यह फैसला श्रमिक कल्याण की उस समझ के विपरीत है, जिससे प्रेरित होकर पांच दशक पहले सर्वोच्च न्यायालय ने ही विस्तृत एवं श्रमिक समर्थक परिभाषा तय की थी। ताजा निर्णय से बेशक मजदूर अधिकारों को झटका लगा है। मगर यह हैरत की बात नहीं है। गुजरे साढ़े तीन दशक के नव-उदारवादी युग में श्रमिक हितों एवं अधिकारों का लगातार संकुचन हुआ है। पहले व्यवहार में ऐसा होने की शुरुआत हुई। अब उस चलन को वैधानिक रूप भी दिया जा रहा है। इससे जाहिर हुआ है कि सरकार के कदमों से लेकर न्यायपालिका की सोच तक उस वक्त के वैचारिक वर्चस्व की मिसाल होते हैं। मजदूर हित के पैरोकारों के लिए यह एक ठोस सबक है।

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