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स्पष्टीकरण के बावजूद

यह कहना काफी नहीं है कि व्यापार समझौते पर बातचीत अभी चल रही है और उसे लिखा नहीं गया है। जब ऐसा होगा, तब पूरी जानकारी दी जाएगी। दरअसल, पीयूष गोयल की इस टिप्पणी ने अनिश्चय और बढ़ा दिया है।

भारत- अमेरिका ट्रेड डील के बारे में डॉनल्ड ट्रंप की घोषणा से बने अनिश्चय के बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आनन-फानन में प्रेस कांफ्रेंस कर किसान एवं अन्य समूहों को आश्वस्त करने की कोशिश की। कहा कि कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाएगा। मगर इससे आशंकाएं दूर नहीं हुईं, तो उसकी वजह वॉशिंगटन से आ रहे बयान हैं। अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंग्स और व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने बेलाग कहा है कि ट्रेड डील में कृषि शामिल है। यह भी कहा है कि अमेरिका के कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों पर भारत शून्य आयात शुल्क लगाएगा।

उधर ह्वाइट हाउस की प्रवक्ता केरोलीन लेविट कहा है कि भारत ना सिर्फ रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, बल्कि अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से भी अधिक मात्रा में तेल खरीदेगा। ये वही बातें हैं, जिनका उल्लेख राष्ट्रपति ट्रंप ने किया था। इसलिए इन मुद्दों पर दो-टूक बयान की जरूरत है। यह कहना पर्याप्त नहीं है कि व्यापार समझौते के कई पहलुओं पर बातचीत चल रही है और उसे अभी लिखा नहीं गया है। जब ऐसा होगा, तब पूरी जानकारी दी जाएगी। दरअसल, गोयल की इस टिप्पणी ने प्रकरण पर और भी धुंध डाल दी है। क्या बिना डील संपन्न हुए ट्रंप ने एलान कर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसके लिए उन्हें धन्यवाद दे दिया?

ऐसा हुआ, तो उससे दोनों देशों के सर्वोच्च नेतृत्व की छवि और भी खराब होगी। फिर क्या भारत ऐसा आश्वासन लेने में सफल रहा है कि ट्रंप आगे चल कर ब्रिक्स+ की भारत की सदस्यता और ईरान जैसे देशों से व्यापारिक संबंध रखने को मुद्दा नहीं बनाएंगे? हाल में दक्षिण कोरिया से डील होने के बावजूद ट्रंप ने यह कर उस पर 25 फीसदी नया टैरिफ लगा दिया कि वह समझौते पर ठीक से अमल नहीं कर रहा है। ट्रंप के व्यवहार में ऐसी अस्थिरताएं भरी-पड़ी हैं। भारत सरकार का कर्त्तव्य इन तमाम पहलुओं का आकलन करते हुए आगे बढ़ना और देशवासियों को इस संबंध में अवगत रखना होना चाहिए। मगर फिलहाल आधी-अधूरी जानकारियों के आधार पर जश्न का माहौल बनाने की कोशिश होती हम देख रहे हैं।

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