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बेंच के बाद बेंच!

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

केंद्र ने विधेयक के जरिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा, तो उसके बाद लगभग तीन साल गुजर चुके हैं। अब नई बेंच बनेगी, तो जैसा तजुर्बा है, उसका फैसला आने में अभी कई और वर्ष गुजरेंगे।

मार्च 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया तय की। पांच जजों की संविधान पीठ ने व्यवस्था दी कि ये नियुक्तियां तीन सदस्यीय समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश, एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल रहेंगे। नरेंद्र मोदी सरकार को यह निर्णय पसंद नहीं आया, तो उसने उसी वर्ष दिसंबर में संसद से विधेयक पारित करवा कर समिति की संरचना बदल दी। इसके तहत प्रावधान किया गया कि नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त एक कैबिनेट मंत्री, और नेता विपक्ष रहेंगे। इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तो न्यायालय ने वह याचिका दो जजों की बेंच को सौंप दी।

उस पीठ का बंटा हुआ फैसला बुधवार को आया। एक जज- न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने याचिका में पेश दलील को जायज मानते हुए कहा कि उपरोक्त कानून ने नियुक्ति समिति में सत्ता पक्ष का बहुमत कायम कर दिया है, जिससे वहां नेता विपक्ष की मौजूदगी सजावटी बन भर रह गई है। वे इस तर्क से भी सहमत हुए कि मौजूदा स्वरूप में समिति ‘स्वतंत्र’ मालूम नहीं पड़ती। लेकिन दूसरे जज जस्टिस एस.सी. शर्मा ने सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश दलील से सहमति जताई कि इस मामले से महत्त्वपूर्ण कानूनी प्रश्न जुड़े हुए हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की अधिक बड़ी बेंच ही फैसला दे सकती है।

तो अब मामला फिर से प्रधान न्यायाधीश के पास चला गया है। वे तय करेंगे कि क्या इस मुद्दे पर फिर से संविधान पीठ बने? केंद्र ने जब विधायी पहल के जरिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा था, तो उसके बाद लगभग तीन साल गुजर चुके हैं। अब नई बेंच बनेगी, तो जैसा तजुर्बा है, उसका फैसला आने में अभी कई और वर्ष गुजरेंगे। इस बीच तमाम चुनाव सरकार के मन-माफिक बने निर्वाचन आयोग की देखरेख में होते रहेंगे। अतः सामान्य स्थितियों में फैसले का इंतजार असहनीय महसूस नहीं होता। लेकिन निर्वाचन आयोग जैसी शिकायतों से घिरता चला गया है, उसको लेकर जैसे संदेह सार्वजनिक दायरे में मौजूद हैं, उन्हें देखते हुए बहुत बड़े जनमत को संभावित देर अंधेर का कारण बनती मालूम पड़ेगी।

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