अब इजराइल में गठबंधन बनाने की ऊबाऊ प्रक्रिया शुरू होगी। विपक्षी नेता गादी आसेनकोट ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है। इसलिए कुछ दिन रहस्य बना रहेगा, लेकिन बाजी आखिरकार शायद नेतन्याहू के हाथ ही रहेगी!
इजराइल में फिर बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना बनती दिख रही है। हालांकि ताजा चुनाव में किसी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लेकिन मौजूदा सियासी समीकरणों के बीच ऐसा लगता है कि नेतन्याहू की स्थिति मजबूत है। चुनाव रुझानों के मुताबिक 120 सदस्यीय केनेसेट (संसद) में नेतन्याहू की अपनी पार्टी लिकुड को तो महज 28 सीटें ही मिलीं, लेकिन धुर-दक्षिणपंथी ऐसे 57 सांसद जीत कर आए हैं, जिनका समर्थन वर्तमान प्रधानमंत्री को मिल सकता है। नतीजे सामने आने के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन में नेतन्याहू ने दावा किया कि ‘दक्षिणपंथी पार्टियों को निर्णायक जीत’ मिली है।
इस आधार पर उन्होंने आह्वान किया ‘राष्ट्रीय दक्षिणपंथी सरकार’ का गठन होना चाहिए। उचित ही इस अपील को उन छोटे दलों को अपनी ओर खींचने का दांव माना गया है, जो यहूदीवादी (मजहबी) एजेंडे को लेकर मतदाताओं के बीच गए थे। वैसे, जिन मुद्दों और सवालों के बीच यह चुनाव हुआ, उनके मद्देनजर यह कहा जाएगा कि नेतन्याहू इजराइली राजनीति में अपने प्रभाव का फिर मुजाहिरा करने में कामयाब रहे हैं। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों, प्रशासनिक अकुशलता की शिकायतों, और सात अक्टूबर 2023 के हमास के हमलों के दौरान सरकारी नाकामी के तमाम कथानकों के बीच लिकुड का सबसे बड़ी पार्टी बने रहना संकेत है कि इजराइली आवाम के एक बड़े हिस्से को आज भी नेतन्याहू का कोई विकल्प नजर नहीं आता।
इस सिलसिले में अमेरिकी समर्थन भी एक बड़ा पहलू है, जिसकी इजराइली सियासत में हमेशा निर्णायक किस्म की भूमिका रही है। इस चुनाव के दौरान दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने खुलेआम नेतन्याहू के लिए अपने समर्थन का एलान किया। इससे संदेश गया कि अमेरिका का बेहिचक समर्थन बनाए रखने के लिए नेतन्याहू का नेतृत्व जरूरी है। अनुमान लगाया जा सकता है कि युद्ध के मौजूदा माहौल में इस पहलू ने अनेक मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित किया होगा। अब इजराइल में गठबंधन बनाने की ऊबाऊ प्रक्रिया शुरू होगी। विपक्षी नेता पूर्व सेनाध्यक्ष गादी आसेनकोट ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है। इसलिए कुछ दिन रहस्य बना रहेगा, लेकिन बाजी आखिरकार शायद नेतन्याहू के हाथ ही रहेगी!
