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अनुत्तरित प्रश्न, नए सवाल

New Delhi, May 06 (ANI): Prime Minister Narendra Modi and Vietnam President To Lam (unseen) at a joint press meet at Hyderabad House, in New Delhi on Wednesday. (DPR PMO/ANI Photo)

कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए 2022-23 में 346 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, लेकिन बाद में ये रकम 2023-24 में 15 करोड़ 2024-25 में महज 88 लाख रुपये रह गई। आखिर क्यों?

यह स्वागतयोग्य है कि पीएम केयर्स फंड की 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट सरकार ने देर से ही, लेकिन जारी कर दी है। लेकिन इस रिपोर्ट से कुछ सवालों के जवाब नहीं मिले, जबकि कुछ नए प्रश्न खड़े हो गए हैँ। मसलन, अमल करने वाली एजेंसियों ने 324 करोड़ रुपये का रीफंड किया। केंद्र को पारदर्शिता समर्थक कार्यकर्ताओं के इस प्रश्न का उत्तर दना चाहिए कि ये एजेंसियां कौन हैं और क्या अमल में हुई गडबड़ियों को छिपाने के लिए धन लौटाया गया? फिर यह भी अहम है कि रिपोर्ट के साथ ऑडिट संबंधी टिप्पणियों को पीएम केयर्स की वेबसाइट पर क्यों नहीं डाला गया है?

रिपोर्ट से सामने आया है कि इस कोष में 8,452 करोड़ रुपये हैं, जबकि 2024-25 में सिर्फ 88 लाख रुपये यानी 0.01 प्रतिशत हिस्से का उपयोग सहायता देने के लिए किया गया। 93 फीसदी रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी गई है, जिससे कोष को 469 करोड़ रुपये का ब्याज हासिल हुआ। मगर, कोष का घोषित मकसद पैसे से पैसा बनाना तो नहीं है! प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष के पहले मौजूद होने के बावजूद कोरोना महामारी के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार ने एक नया कोष बनाने का विवादास्पद फैसला लिया था। आरंभ से ही इसको लेकर पारदर्शिता का अभाव रहा। इसे आरटीआई कानून के दायरे से बाहर रखा गया।

बहरहाल, सरकार ने कहा था कि इस कोष से कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को सहायता दी जाएगी। ऐसे हर बच्चे को 20,000 रुपये प्रति वर्ष और 18 साल का होने पर 10 रुपए एकमुश्त देने की घोषणा हुई थी। सरकार ने ऐसे 3,383 लाभार्थी बच्चों की सूची जारी कर रखी है। 2024-25 में जो कुल रकम खर्च हुई, उसे इस संख्या से विभाजित किया जाए, तो प्रति बच्चे दिया गया अनुदान महज 2,596 रुपये बैठता है। 2022-23 में इन बच्चों के लिए 346 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, लेकिन बाद में ये रकम 2023-24 में 15 करोड़ 2024-25 में महज 88 लाख रुपये रह गई। आखिर क्यों? इसका विस्तृत उत्तर सरकार को देना चाहिए? आखिर ये कोष किस दिन के लिए बचा कर रखा जा रहा है?

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