अभिनेत्री और पर्यावरण संरक्षण की मुखर समर्थक दिया मिर्ज़ा ने कहा है कि मनुष्य और प्रकृति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं तथा धरती ही हमारी असली पहचान है। दिया मिर्ज़ा के सहयोग से बनी लघु फिल्म ‘पन्हा’ को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना मिल रही है। फिल्म को ऑल लिविंग थिंग्स एनवायरमेंटल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ भारतीय लघु फिल्म, नौवें वर्ल्ड इंडियन फिल्म फेस्टिवल, हैदराबाद में सर्वश्रेष्ठ फिल्म और ध्रुमा फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा 13वें मुंबई शॉर्ट्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसे ऑनरेबल ज्यूरी मेंशन से सम्मानित किया गया है।
महाराष्ट्र के एक गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘पन्हा’ सात वर्षीय विठू की नजर से एक ऐसे परिवार की कहानी कहती है, जिसकी पुश्तैनी आम की बाग़ एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के कारण छिनने वाली है। फिल्म विकास, विस्थापन और प्रकृति से जुड़े मानवीय रिश्तों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।
Also Read : महिला पेयर्स में भारत की लगातार दूसरी जीत
फिल्म के समर्थन के अपने फैसले पर दिया मिर्ज़ा ने कहा कि प्रकृति से उनका जुड़ाव बचपन से रहा है। उन्होंने बताया कि उनके घर के पीछे लगे आम के एक विशाल पेड़ ने बचपन में उन्हें सुकून, सुरक्षा और आत्मीयता का एहसास कराया। उसी अनुभव ने उनके भीतर यह समझ विकसित की कि मनुष्य प्रकृति का अभिन्न हिस्सा है।
दिया ने कहा कि मिस इंडिया बनने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी, लेकिन मध्य प्रदेश के पेंच जंगल की यात्रा ने उन्हें फिर से प्रकृति के करीब ला दिया। उन्होंने कहा कि जंगल में बिताए समय और स्थानीय समुदायों के साथ हुए संवाद ने उन्हें जीवन का उद्देश्य समझाया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
उन्होंने कहा, “हम इस धरती से जुड़े हैं। हम प्रकृति का हिस्सा हैं, उससे अलग नहीं हैं। हमारी जिंदगी की हर जरूरत हमें इसी धरती से मिलती है और यही धरती हमें अपनी गोद में संभालकर रखती है।”
साक्षी मिश्रा के निर्देशन में बनी ‘पन्हा’ वन इंडिया स्टोरीज़ के बैनर तले निर्मित है। यह दिया मिर्ज़ा और उनकी बचपन की मित्र अनन्या राणे के बीच पहली रचनात्मक साझेदारी भी है। फिल्म महाराष्ट्र के आम के बागानों की पृष्ठभूमि में प्रकृति, परिवार और अपनेपन की भावनात्मक कहानी प्रस्तुत करती है।
Pic Credit : ANI
