छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें एवं अंतिम दिन शुक्रवार को करीब 14 घंटे 30 मिनट तक चली विस्तृत चर्चा के बाद कांग्रेस द्वारा साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शनिवार सुबह 2 से 3 बजे के बीच ध्वनिमत से अस्वीकृत हो गया। चर्चा के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के जनादेश के खिलाफ लाया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप काम कर रही है और महिलाओं, किसानों, युवाओं तथा बुजुर्गों के लिए अनेक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों को केवल वोट बैंक के रूप में देखने का आरोप लगाते हुए कहा आदिवासी किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है, यही बात कांग्रेस को पच नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा 70 से अधिक सीटों के साथ सरकार बनाएगी तथा “कांग्रेस अगले 25 साल तक सत्ता में नहीं लौटेगी।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार पर घोटालों, चुनावी वादों को पूरा नहीं करने तथा छत्तीसगढ़ को दिल्ली का ‘एटीएम ‘ बनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने विपक्षी विधायकों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का उपयोग करने की भी बात कही।
इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को किसानों, खाद संकट, धान खरीदी, कानून-व्यवस्था, महतारी वंदन योजना, राशन वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं और आदिवासी हितों के मुद्दों पर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में खाद की कमी है, धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित है और कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने तमनार, हसदेव अरण्य, महादेव ऐप, नकली खाद, पेसा कानून तथा अन्य मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार पर जनविरोधी निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में “अदृश्य शक्ति सरकार चला रही है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने चर्चा के दौरान हसदेव अरण्य में प्रस्तावित कोयला खनन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्यावरण की अनदेखी कर उद्योगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि 91 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति से लगभग 15 हजार पेड़ों की कटाई होगी और हसदेव, जिसे उन्होंने “मध्य भारत के फेफड़े” बताया, उसके अस्तित्व पर खतरा पैदा हो जाएगा।
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डॉ. महंत ने महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध, बलौदाबाजार हिंसा, कानून-व्यवस्था, कृषि संकट, बेरोजगारी भत्ता, किसानों की धान खरीदी, पेसा कानून, आदिवासी भूमि, अबूझमाड़ में पेड़ों की कटाई, भारतमाला परियोजना तथा आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित रूप से नकली मंगलसूत्र वितरित किए जाने और संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई नहीं होने का मामला उठाया। इस पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बालोद जिले से इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कार्रवाई का प्रश्न नहीं उठता।
सत्तापक्ष की ओर से उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार को “घोटालों और झूठ की सरकार” बताते हुए विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया।
विधानसभा सचिवालय के उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, राज्य गठन के बाद अब तक 10 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है और प्रत्येक अवसर पर संबंधित सरकार बहुमत साबित करने में सफल रही है। पहली विधानसभा में वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी सरकार के विरुद्ध भाजपा ने दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था।
इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कांग्रेस ने कुल पांच बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। वहीं भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ भाजपा ने 2022 और 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लाया था, जो ध्वनिमत से अस्वीकृत हो गया था।
विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी चर्चा जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली। वहीं 2022 में भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे 32 मिनट चर्चा हुई थी। जुलाई 2023 के मानसून सत्र में भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ 109 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश किया था, लेकिन कांग्रेस के 72 विधायकों के बहुमत के कारण वह प्रस्ताव भी ध्वनिमत से गिर गया।
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