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‘ऑपरेशन पवन’ में शामिल रहे शांति सैनिकों के योगदान को मान्यता : राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह

New Delhi, Mar 29 (ANI): Defence Minister Rajnath Singh addresses the gathering during the launch of e - Coffee table book 'Veerangana' - a Tribute to Rani Velu Nachiyar - honouring the women freedom fighters of India - organised by Bharatiya Janata Party Mahila Morcha, at Kedarnath Sahni Auditorium in New Delhi on Saturday. (ANI Photo/Ritik Jain)

‘ऑपरेशन पवन’ में भारतीय सेनाओं ने अद्भुत साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया। कई सैनिकों ने कर्तव्य की राह पर चलते हुए वीरगति प्राप्त की। उनका साहस और बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा होनी ही चाहिए। बुधवार को सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात कही। 

भारतीय सेना के कई वीर जवानों ने वर्ष 1987 से 1990 के बीच श्रीलंका में शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय सद्भाव बनाए रखने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन पवन’ में सर्वोच्च बलिदान दिया था।

सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस के मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा, ”आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ‘ऑपरेशन पवन’ में भाग लेने वाले शांति सैनिकों के योगदान को न केवल खुले मन से स्वीकार कर रही है, बल्कि उनके योगदान को हर स्तर पर मान्यता देने की प्रक्रिया भी चल रही है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जब 2015 में अपनी श्रीलंका यात्रा पर गए थे, तो उन्होंने इंडियन पीस कीपिंग फोर्स मेमोरियल पर अपनी तरफ से भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। अब हम नई दिल्ली स्थित ‘नेशनल वॉर मेमोरियल’ पर भी इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के शांति सैनिकों के योगदान को पहचान प्रदान कर रहे हैं और उन्हें पूरा सम्मान भी दे रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा, “मैं आज से लगभग 40 साल पहले इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के रूप में श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए चलाए गए सैन्य अभियान में भाग लेने वाले सभी पूर्व सैनिकों का भी स्मरण करना चाहता हूं। श्रीलंका में भारतीय सेनाओं को भेजने का जो निर्णय तत्कालीन सरकार ने लिया था, उस पर बहस की गुंजाइश है, मगर ‘ऑपरेशन पवन’ में भाग लेने वाले इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के सैनिकों की जो उपेक्षा की गई, उसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारतीय सेना ने जो बलिदान और संघर्ष उस दौरान किया, उसका सम्मान किया जाना चाहिए था।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी सैनिक के लिए रिटायरमेंट बस एक शब्द होता है। असल मायने में कोई सैनिक कभी रिटायर नहीं होता। आप सब, जब सर्विस से रिटायर हुए, तो क्या आपकी सेवा समाप्त हो गई? बिल्कुल नहीं। आपकी वर्दी का रंग बदल सकता है, आपके काम करने की जगह बदल सकती है, आपके आसपास रहने वाले लोग बदल सकते हैं, लेकिन आपके दिल में देशभक्ति और सेवा की भावना वैसी की वैसी ही बनी रहती है।

रक्षा मंत्री ने कहा, ”पूरा देश हर क्षेत्र में आपके योगदान को देख रहा है, महसूस कर रहा है। हमारी सरकार का भी यह मानना है कि हमारे सैनिक और पूर्व सैनिक देश के मजबूत स्तंभ हैं। उनकी देखभाल करना, हमारा नैतिक और भावनात्मक कर्तव्य है। हमारी सरकार ने भी अपने पूर्व सैनिकों के लिए, बीते वर्षों में कई ठोस फैसले लिए हैं और आने वाले समय में भी यह सिलसिला रुकेगा नहीं। आज, सारा देश अपने पूर्व सैनिकों के योगदान का स्मरण करते हुए, उनके प्रति आभार की अभिव्यक्ति कर रहा है।

उन्होंने बताया कि लंबे समय से चली आ रही ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की मांग को सरकार ने पूरी ईमानदारी से साकार किया। उस असमानता को खत्म करने का प्रयास किया गया, जिसे हमारे पूर्व सैनिक वर्षों से महसूस कर रहे थे। इस व्यवस्था के लागू होने से, पूर्व सैनिकों के जीवन में न केवल वित्तीय स्थिरता आई बल्कि यह भरोसा भी मजबूत हुआ कि देश उनके साथ न्याय करता है।

रक्षामंत्री ने कहा कि आज, पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर, मैं सभी को, पूर्व सैनिकों को बधाई देता हूं। मैं इस अवसर पर आज, वीरगति प्राप्त हो चुके अपने सैनिकों के प्रति, देश सेवा में संलग्न रहे अपने पूर्व सैनिकों के प्रति, तथा अपने सैनिकों के प्रति, कृतज्ञ राष्ट्र की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। आप सभी केवल सर्विस से रिटायर हुए एक सैनिक भर नहीं हैं, आप हमारी राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ, हमारे सामूहिक साहस के प्रतीक और हमारी भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

Pic Credit : ANI

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