केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को मजबूत करने के लिए कार्य योजना की समीक्षा की जिसमें राज्यों की भागीदारी बढ़ाने के माध्यम से चालू वित्त वर्ष में 300 केवीके के बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के उन्नयन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गयी।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवीके में परिवर्तन के लिए मजबूत केंद्र-राज्य समन्वय, समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक बुनियादी ढांचे, पर्याप्त जनशक्ति और जिला-विशिष्ट कार्य योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र कृषक समुदाय की प्रभावी ढंग से सेवा करने और कृषि में उभरती चुनौतियों का जवाब देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और संस्थागत सहायता से लैस हैं।
इस बैठक में मुख्य सचिवों के 5वें सम्मेलन 2025 से उभरने वाले केवीके से संबंधित प्रमुख सिफारिशों के कार्यान्वयन में तेजी लाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में विभाग के राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. मंगी लाल जाट और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार आज की बैठक में मार्च 2027 तक प्राथमिकता वाले 300 केवीके के उन्नयन पर चर्चा की गई। श्री चौहान ने निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य प्राप्त करने के लिए राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी और समय पर समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ मंगी लाल ने इस काम के लिए वित्तीय और संस्थागत सहायता जुटाने के विषय में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ बातचीत की। विज्ञप्ति में कहा गया है कि कई राज्यों ने अपने-अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से कार्ययोजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू की है। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत की है, जबकि अन्य राज्य तैयारी और कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
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दिसंबर 2028 तक सभी केवीके में इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र स्थापित करने के विषय में भी चर्चा की गयी। इस पहल के तहत, केवीके का कृषि-आधारित उद्यमों, तकनीकी भागीदार संस्थानों और जिला-विशिष्ट कृषि अवसरों के साथ मानचित्रण किया जा रहा है। वित्त पोषण और कार्यान्वयन सहायता के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केवीके-वार योजनाएं विकसित की जा रही हैं।
बैठक में केवीके कर्मियों के कार्य की दशाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई। उनके वेतन, भत्ते और पदोन्नति से संबंधित प्रस्तावित सुधारों को व्यय विभाग (डीओई) से मंजूरी मिल चुकी है। उन्हें एनपीएस (नयी पेंशन योजना) और सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने में राज्य सरकारों की भूमिका पर जोर दिया गया। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे केवीके में खाली पदों पर समय पर भर्ती सुनिश्चित कर पर्याप्त कार्यबल की व्यवस्था करें।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि मौसमी कृषि कार्यक्रमों के लिए केवीके को समय पर धन जारी करने के महत्व पर भी चर्चा हुई । वर्ष 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन कार्यक्रम पर क्लस्टर फ्रंटलाइन प्रदर्शन (सीएफएलडी) के तहत 24 राज्यों में 12,349 हेक्टेयर क्षेत्र के साथ 353 केवीके और संबंधित जिलों के माध्यम से प्रदर्शन के तौर पर खेती कराये जाने का कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसमें अब तक 9,750 हेक्टेयर क्षेत्र का रकबा शामिल किया जा चुका है।
कुछ राज्यों में धन जारी करने में देरी से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएम डीडीकेवाई) का समर्थन करने में केवीके की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि मजबूत केवीके वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों, उन्नत किस्मों, कौशल, नवाचार और उद्यमिता के अवसरों की किसानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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