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हेमंत का नाम लिए बगैर मोदी का हमला

रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार का आगाज किया। सोमवार को उन्होंने दो चुनावी सभाओं को संबोधित किया। राज्य की 43 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होना है। उससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को गढ़वा और चाईबासा में चुनावी रैली को संबोधित किया। चाईबासा के आसपास की सभी छह सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं तो प्रधानमंत्री का भाषण भी आदिवासियों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था। इससे पहले गढ़वा में उनकी सभा हुई।

उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जम कर हमला किया लेकिन उनका नाम नहीं लिया। मोदी ने चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में भाषण देते हुए लालू प्रसाद के एक बयान का हवाला दिया और उस बहाने लालू और हेमंत दोनों के निशाना बनाया। उन्होंने कहा- कुछ लोग जो यहां बैठे हैं वो कहते थे हमारी छाती पर झारखंड बनेगा। उनकी छाती पर झारखंड बन गया, लेकिन झारखंड के कुछ नेता उनकी गोदी में जाकर बैठ गए। गौरतलब है कि लालू प्रसाद ने कहा था कि उनकी लाश पर झारखंड बनेगा। उस समय एकीकृत बिहार में उनकी सरकार थी। अभी वे हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हैं।

बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने हेमंत सोरेन का नाम लिए बिना उनके और उनके मंत्रियों के भ्रष्टाचार का जिक्र किया। उन्होंने कहा- मंत्री, विधायक हर कोई भ्रष्टाचार में शामिल है। एक मंत्री के घर से नोटों का पहाड़ निकला। मैंने भी पहली बार नोटों का पहाड़ टीवी पर देखा। मोदी ने परिवारवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा- जेएमएम, राजद और कांग्रेस तीनों ही पार्टियां घोर परिवारवादी हैं। ये चाहती हैं कि सत्ता की चाबी हमारे परिवार के हाथ में ही रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा- झारखंड बीजेपी का संकल्प पत्र रोटी, बेटी और माटी के सम्मान और सुरक्षा और समृद्धि के लिए समर्पित है। माताओं, बहनों और बेटियों के कल्याण के लिए इसमें अनेक संकल्प लिए गए हैं। उन्होंने गोगो दीदी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें हर महीने माताओं, बहनों को 21 सौ रुपए मिलेंगे।

जेएमएम, कांग्रेस और राजद पर हमला करते हुए मोदी ने कहा- ये तीनों दल सामाजिक तानाबाना तोड़ने पर आमादा हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोट पाने के लिए ये लोग उन्हें पूरे झारखंड में बसा रहे हैं। जब स्कूलों तक में सरस्वती वंदना पर रोक लगने लगी तो पता चलता है कि खतरा कितना बड़ा है। जब तीज त्योहारों पर पत्थरबाजी होने लगे, जब माता दुर्गा को भी रोक दिया जाए, जब कर्प्यू लगने लगे तो पता चलता है कि स्थिति कितनी खतरनाक है।

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