महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने शनिवार को घोषणा की है कि सरकार ने तीन शहरों में अनशन कर रहे आदिवासी छात्रों की सभी मांगें मान ली हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांगें सरकारी सेवा में अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों की भर्ती और आदिवासी बच्चों के लिए आवासीय स्कूलों में स्थितियों में सुधार से संबंधित थीं।
गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल में सांप के काटने से तीन आदिवासी लड़कियों की मौत के बाद पुणे, नागपुर और नासिक में शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन के आज बाद में खत्म होने की उम्मीद है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों ने राज्य के कांग्रेस नेताओं और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) समेत अन्य लोगों का उनके आंदोलन का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया।
उइके ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत के बाद उनकी सभी मांगें मान लीं।
मंत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री ने उन्हें यह भी आश्वासन दिया है कि तीन महीने बाद फिर से बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें लिए गए फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी और यह देखा जाएगा कि इसमें किसी तरह की कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है।
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उन्होंने अनशन कर रहे छात्रों से अपना विरोध-प्रदर्शन वापस लेने और अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने की अपील की।
उइके ने कहा कि मुख्य मांगें संबंधित सरकारी आदेश के अनुसार ‘पॉइंट रोस्टर’ में अनुसूचित जनजातियों को दूसरे स्थान पर रखने से जुड़ी थीं। उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए पहले ही एक समिति गठित की जा चुकी है और सरकार उसकी सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई करेगी और उम्मीद है कि तीन महीने के भीतर समिति की सिफारिश आएगी।
‘पॉइंट रोस्टर’ सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण लागू करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसके जरिए यह तय होता है कि कौन सा पद किस आरक्षित या अनारक्षित वर्ग को मिलेगा।
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम या पेसा, और गैर-पेसा क्षेत्रों में भर्ती पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि पेसा के तहत आने वाले 17 कैडर में से नौ कैडर के लिए भर्ती पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी कैडर के लिए तुरंत भर्ती शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इससे पहले दिन में, बंबई उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का कल्याण सुनिश्चित करे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने कहा कि वे नहीं चाहते कि और युवाओं की जान जाए।
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