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बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान मौजूदा नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश: संजय राउत

New Delhi, Dec 11 (ANI): Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) Rajya Sabha MP Sanjay Raut addresses a press conference, at Constitution Club, in New Delhi on Wednesday. (ANI Photo)

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बंगाल में 92 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84 से 85 प्रतिशत मतदान होने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि एसआईआर में गलत तरह से काम किया गया है, जिससे जनता ने घर से निकलकर वोट किया।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने कहा कि खराब मौसम के बाद भी पश्चिम बंगाल में करीब 92 प्रतिशत और तमिलनाडु में लगभग 84-85 प्रतिशत मतदान हुआ है। खास बात यह है कि तूफान जैसी परिस्थितियों के बावजूद लोगों का बड़ी संख्या में मतदान के लिए निकलना लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि एसआईआर अगर सही तरह से होता तो और मतदान हो सकता था।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कुछ नीतियों को लागू करने के तरीके ने भी लोगों को अधिक संख्या में मतदान के लिए प्रेरित किया।

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महाराष्ट्र की राजनीति पर बोलते हुए राउत ने महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर चल रही चर्चाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने ‘मातोश्री’ जाकर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। इस बैठक में आगामी विधान परिषद चुनाव सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

संजय राउत ने संकेत दिया कि सहयोगी दलों के बीच समन्वय बनाए रखने और भविष्य की रणनीति तय करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, यह भी चर्चा है कि उद्धव ठाकरे को एक बार फिर विधान परिषद में भेजा जाए।

भाषा के मुद्दे पर राउत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का उपयोग स्वाभाविक और आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैसे तमिलनाडु में तमिल और पश्चिम बंगाल में बंगाली बोली जाती है, उसी तरह महाराष्ट्र में मराठी का सम्मान होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि राज्य में मराठी भाषा को लेकर कोई कानून बनाया जाता है, तो उसका पालन सभी को करना चाहिए।

राउत ने आगे कहा कि जो लोग महाराष्ट्र में रहकर रोजगार और सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें राज्य की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाषा को लेकर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है बल्कि इसे सम्मान और पहचान के रूप में देखा जाना चाहिए।

Pic Credit : ANI

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