कर्नाटक विधान परिषद के चार चुनाव क्षेत्रों के लिए मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती शुरू हो गई। इस चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है।
इन नतीजों से स्नातक और शिक्षक क्षेत्रों में कांग्रेस के जनाधार का पता चलेगा, वहीं 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा-जद (एस) गठबंधन के चुनावी तालमेल की क्षमता की भी आजमाइश होगी। कर्नाटक दक्षिण-पूर्व स्नातक, कर्नाटक पश्चिम स्नातक, कर्नाटक उत्तर-पूर्व शिक्षक और बेंगलुरु शिक्षक क्षेत्र के लिए मतदान हुआ है। कुल 43 उम्मीदवार मैदान में हैं और मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था।
भाजपा ने दो स्नातक चुनाव क्षेत्रों और उत्तर-पूर्व शिक्षक चुनाव क्षेत्र में उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि उसकी सहयोगी पार्टी जद (एस) बेंगलुरु शिक्षक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने सभी चार चुनाव क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व स्नातक चुनाव क्षेत्र में 73.58 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पश्चिम स्नातक क्षेत्र में 75.62 प्रतिशत वोट पड़े। उत्तर-पूर्व शिक्षक चुनाव क्षेत्र में सबसे अधिक 86.97 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसके बाद बेंगलुरु शिक्षक क्षेत्र में 81.98 प्रतिशत वोटिंग हुई।
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दक्षिण-पूर्व स्नातक क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मुत्त का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी केएम सुरेश से है। पश्चिम स्नातक क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिम्बीकाई वर्तमान भाजपा एमएलसी एसवी संकनूर को चुनौती दे रहे हैं।
उत्तर-पूर्व शिक्षक क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर का मुकाबला वर्तमान भाजपा विधान पार्षद शशिल जी नमोशी से है। बेंगलुरु शिक्षक क्षेत्र में कांग्रेस विधान पार्षद पुत्तण्णा के सामने भाजपा समर्थित जद (एस) उम्मीदवार एपी रंगनाथ मैदान में हैं।
भाजपा के पास वर्तमान में चार में से तीन सीटें हैं और वह उन्हें बनाए रखने की कोशिश में है, जबकि जद (एस) बेंगलुरु शिक्षक सीट कांग्रेस से छीनने की फिराक में है। नतीजों से यह भी देखा जाएगा कि दोनों विपक्षी दलों ने अपने चुनावी प्रयासों को कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया है।
बेंगलुरु का मुकाबला इसलिए भी अहम है, क्योंकि श्री पुत्तण्णा पिछले विधानसभा चुनावों से पहले जद(एस) छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। श्री पुत्तण्णा और रंगनाथ दोनों वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं।
इन चुनावों से 75 सदस्यीय विधान परिषद में सत्ता का संतुलन बहुत ज्यादा बदलने की उम्मीद नहीं है। ये नतीजे हालांकि भविष्य की चुनावी लड़ाइयों से पहले सत्तारूढ़ दल और विपक्षी गठबंधन दोनों को राजनीतिक बढ़त बनाने का मौका दे सकते हैं।
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