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भाजपा में ‘सत्ता का संघर्ष’, अयोध्या मुद्दे पर आस्था से किया जा रहा है समझौता : अखिलेश

Lucknow, Feb 15 (ANI): Samajwadi Party National President Akhilesh Yadav addresses a press conference, in Lucknow on Sunday. (ANI Photo)

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच ‘सत्ता का संघर्ष’ होने का आरोप लगाया एवं कहा कि अयोध्या में लोगों की आस्था और धार्मिक भावनाओं से समझौता किया जा रहा है।

यादव ने प्रदेश पार्टी मुख्यालय पर दल के नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद प्रेसवार्ता में भाजपा पर आरोप लगाया कि इस पार्टी का नेतृत्व लोगों की धार्मिक आस्था की रक्षा करने से ज्यादा अंदरूनी झगड़े को लेकर फिक्रमंद है।

उन्होंने आरोप लगाया,‘‘हमारी आस्था और भक्ति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हर कोई जानता है कि क्या हो रहा है, फिर भी वे चुप हैं। डबल इंजन वाली सरकार (उत्तर प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार) एक साथ नहीं चल रही हैं। दोनों इंजन टकरा रहे हैं। सत्ता का संघर्ष है। उन्हें आस्था या भक्ति की कोई चिंता नहीं है।

यादव ने दावा किया कि सत्ता में बैठे लोग खजाने के लालच में ‘अंधे’ हो गए हैं और यह झगड़ा भाजपा के अंदर नियंत्रण की लड़ाई को जाहिर करता है।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कथित चढ़ावा चोरी मामले की विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) की जांच खुद भाजपा की अंदरूनी खींचतान को उजागर करती है।

उन्होंने कहा,‘‘अगर यह प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई या आयकर विभाग का मामला होता, तो जांच दिल्ली के हाथ में होती। मगर इससे पहले कि दिल्ली इस बारे में सोच पाती, लखनऊ ने सब कुछ अपने हाथ में ले लिया। यह सत्ता के संघर्ष की वजह से हो रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने हिंदू धर्मगुरुओं और संस्थाओं से इस विवाद पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया,‘‘मैं दुनिया भर के राम भक्तों, अयोध्या के संतों, उच्चतम न्यायालय, लोकसभा अध्यक्ष, अयोध्या के नागरिकों और पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग) समाज से इस पर ध्यान देने की अपील करता हूं। भाजपा मिथ्या प्रचार करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

यादव ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ दौरे का जिक्र करते हुए दावा किया कि इससे पार्टी संगठन और राज्य सरकार के बीच जारी अनबन सामने आ गई है।

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उन्होंने कहा, जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आए तो ऐसा लगा जैसे लखनऊ में कर्फ्यू लगा दिया गया हो। दरअसल, संगठन और सरकार के बीच बहुत बड़ा झगड़ा है।

सपा प्रमुख ने भाजपा अध्यक्ष के अपने लखनऊ दौरे के दौरान पार्टी नेताओं के साथ एक चाय की दुकान पर चाय पीने को लेकर तंज किया और कहा,‘‘जब आपके पास करने को कुछ नहीं होता, तो आप चाय पीते हैं।

यादव ने सपा के सदस्यता अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी इस मुहिम को तेज करके अपने जमीनी नेटवर्क को मजबूत करेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां हुए विकास कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश करते हुए आरोप लगाया कि राज्य की मौजूदा भाजपानीत सरकार अब भी उनके शासनकाल में शुरू की गयी परियोजनाओं का उद्घाटन कर रही है।

यादव ने राज्य सरकार पर जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र की उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया और कहा कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि जयप्रकाश नारायण के राजनीतिक जीवन को समर्पित एक संग्रहालय है मगर भाजपा ने समाजवादी आंदोलन से अपनी नफरत की वजह से इसे बर्बाद कर दिया है।

उन्होंने कहा कि जब भाजपा का गठन हुआ था, तब इस बात पर बहस हुई थी कि भाजपा का रास्ता क्या होगा तथा उसने तय किया था कि उनका रास्ता धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी होगा।

यादव ने कहा, उनके पास दिखाने के लिए कोई समाजवादी नेता या चेहरा नहीं था। जब उनके पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए, तो उन्होंने जयप्रकाश नारायण की तस्वीर लगाकर यह साबित करने की कोशिश की कि वह उन्हीं के नक्शेकदम पर समाजवादी आंदोलन के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।

उन्होंने कहा, आज वे (भाजपा के नेता) मुस्लिम भाइयों से इतनी नफ़रत कर रहे हैं जबकि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के पहले प्रस्तावक भी एक मुस्लिम था।

सपा प्रमुख ने दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी के कई नेता अपना चुनाव क्षेत्र बदलना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर उनमें हिम्मत है तो उन्हें उन्हीं चुनाव क्षेत्रों से फिर से चुनाव लड़ना चाहिए। हम उन्हें वहीं हराने के लिए तैयार हैं।

यादव ने इंजीनियरिंग शिक्षा और मूलभूत ढांचे को लेकर भी भाजपा सरकार की आलोचना की।

Pic Credit : ANI

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