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सीएम धामी ने चमोली के श्री गोपीनाथ मंदिर का महत्व बताया

Rudrapur, Jul 19 (ANI): Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami addresses the gathering during the ‘Uttarakhand Investment Festival - 2025’ event, in Rudrapur on Saturday. (Pushkar Singh Dhami_X)

देवी भूमि उत्तराखंड अपनी प्राचीन पौराणिक विरासत और भव्य मंदिरों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसी कड़ी में चमोली के गोपेश्वर में स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर एक प्रमुख आकर्षण है। यह मंदिर बाबा भोलेनाथ को समर्पित है और अपनी अनोखी स्थापत्य कला व धार्मिक महत्व के कारण काफी मशहूर भी है।

गोपीनाथ मंदिर का निर्माण नौवीं व 11वीं शताब्दी के बीच कत्यूरी शासकों की ओर से किया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का भव्य वीडियो शेयर किया।

इसके साथ उन्होंने लिखा, “जनपद चमोली के गोपेश्वर में स्थित गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि और होली जैसे पावन पर्वों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आप भी चमोली आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।

यह प्राचीन मंदिर कत्यूरी राजवंश के समय (लगभग 9वीं से 11वीं शताब्दी) में निर्मित माना जाता है। इस मंदिर की खासियत है कि ये अपनी गुम्बदनुमा शिखर और 30 वर्ग फुट का गर्भगृह है, जिस तक 24 द्वारों से पहुंचा जा सकता है।

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यह मंदिर चमोली के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित है और पंच केदार के रुद्रनाथ जी की शीतकालीन गद्दी होने के कारण प्रसिद्ध है। यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण प्रांगण में स्थापित 5 मीटर ऊँचा त्रिशूल है, जो 8 विभिन्न धातुओं से बना है।

प्राचीन त्रिशूल को लेकर एक पौराणिक कहावत काफी लोकप्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि इस प्राचीन त्रिशूल को शारीरिक ताकत से नहीं हिलाया जा सकता, लेकिन अगर किसी भक्त के मन में सच्ची आस्था है, तो उसके छूने भर से त्रिशूल में कंपन होने लगता है।

शीतकाल के दौरान जब रुद्रनाथ मंदिर (पंच केदार में से एक) के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भगवान रुद्रनाथ की उत्सव मूर्ति को यहां लाया जाता है। मंदिर परिसर में शिवजी के अलावा परशुराम, गणेश और भैरव जी की मूर्तियां हैं। साथ ही यहां एक पवित्र ‘वैतरणी कुंड’ भी स्थित है। यह मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ के बीच एक प्रमुख पड़ाव माना जाता है, जहां महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा की जाती है।

Pic Credit : ANI

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