पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित घाटल, आरामबाग और सबांग के इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्यों का जायजा लिया तथा मुआवजे का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि सबांग में बाढ़ के कारण जिन दो लोगों की मौत हुई है, उनके परिवारों को नाै -नौ लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, “अब तक के प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक बाढ़ से करीब 3200 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। राज्य सरकार उन सभी परिवारों को 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी जिनके घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पिंगला, लांगलकाटा से दुबराजपुर, मोयना, बकचा से गुरुग्राम और मोहम्मदपुर सहित बाढ़ प्रभावित कई इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने में आधे घंटे से अधिक का समय बिताया।
उन्होंने सबांग की पांच ग्राम पंचायतों, भगवानपुर की चार, मोयना की एक और पटाशपुर-I की गोकुलनगर ग्राम पंचायत में स्थिति का भी जायजा लिया। श्री अधिकारी ने इसके बाद एक समीक्षा बैठक की, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला परिषद के प्रतिनिधि और सिंचाई, जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग और बिजली विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। वहां करीब सात से आठ विधायक भी मौजूद थे।
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श्री अधिकारी ने प्रभावित इलाकों के प्रभारी राज्य मंत्री को निर्देश दिया कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तब तक बने रहें जब तक कि हर प्रभावित परिवार सुरक्षित घर न लौट आए और फसल बीमा के लिए पात्र किसानों की सही सूची तैयार न हो जाए। मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण और समीक्षा बैठक के बाद कहा कि सबांग और आस-पास के इलाकों की पांच-छह ग्राम पंचायतों में करीब 50,000 लोग बाढ़ के कारण फंसे हुए हैं।
करीब 4,000 से 5,000 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जबकि बाढ़ में दो लोगों की मौत हो गई है। श्री अधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन ने पहले ही सर्वे कर लिया है और राहत एवं पुनर्वास के लिए जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं।
इस बीच राज्य सरकार ने लंबे समय से अटके पड़े ‘घाटाल मास्टर प्लान’ को लागू करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाया है। इस योजना का मकसद इलाके में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान खोजना है। मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले राज्य कैबिनेट ने इस परियोजना के लिए जरूरी जमीन को 24.5 करोड़ रुपये की लागत से अधिग्रहण करने की मंजूरी दे दी।
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