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मुगलों का इतिहास नहीं पढ़ाया जाएगा!

नई दिल्ली। इतिहास किताबों में बड़ा बदलाव हुआ है। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी ने 10वीं से 12वीं तक की कई विषयों की किताबों में बड़ा बदलाव किया है। अब 10वीं से 12वीं के छात्र मुगलों का इतिहास नहीं पढ़ पाएंगे। एनसीईआरटी ने इतिहास, नागरिक शास्त्र और हिंदी के पाठ्यक्रम में बदलाव किए हैं। इतिहास की किताब से मुगल साम्राज्य से जुड़ा अध्याय हटाया गया है। इसके अलावा हिंदी की किताब से कुछ कविताएं और पैराग्राफ हटाने का फैसला किया गया है।

नए पाठ्यक्रम के मुताबिक थीम्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री-पार्ट दो से मुगल दरबार (16वीं और 17वीं शताब्दी) और शासकों व उनके इतिहास से संबंधित अध्यायों को हटाया गया है। नागरिक शास्त्र की किताब से ‘यूएस हेजेमनी इन वर्ल्ड पॉलिटिक्स’ और ‘द कोल्ड वॉर एरा’ जैसे चैप्टर हटा दिए गए हैं। इसके अलावा, स्वतंत्र भारत में राजनीति की किताब से ‘जन आंदोलन का उदय’ और ‘एक दल के प्रभुत्व का दौर’ हटा दिया गया है।

एनसीईआरटी ने हिंदी के पाठ्यक्रम में भी कुछ बदलाव किए हैं। इनमें हिंदी आरोह भाग-2 की किताब से फिराक गोरखपुरी की गजल और अंतरा भाग-2 से सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की ‘गीत गाने दो’ मुझे को हटा दिया है। इसके अलावा विष्णु खरे की एक काम और सत्य को भी हटाया गया है। मौजूदा सत्र से होने जा रहे बदलाव केवल 12वीं क्लास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि 10वीं और 11वीं क्लास की किताब से भी कई अध्याय हटाए गए हैं। 11वीं की किताब ‘थीम्स इन वर्ल्ड हिस्ट्री’ से ‘सेंट्रल इस्लामिक लैंड्स’, ‘संस्कृतियों का टकराव’ और ‘द इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन’ जैसे अध्याय हटा दिए गए हैं। इसी तरह 10वीं की किताब ‘लोकतांत्रिक राजनीति-2’ से लोकतंत्र और विविधता, लोकप्रिय संघर्ष और आंदोलन, लोकतंत्र की चुनौतियां जैसे अध्याय हटाए गए हैं।

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