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हिंदुओं की भी किसे फिक्र?

प्रश्न है कि जिन लोगों ने हिंदू भावनाओं की दलील देकर हिंदुओं की जान की परवाह नहीं की, क्या उन पर कोई कार्रवाई की जाएगी? या ऐसी कार्रवाई से भी ‘हिंदू भावनाएं’ आहत होंगी?

रामनवमी के मौके पर मुस्लिम विरोधी तेवर कुछ इस कदर हावी हुए कि उसी रोज हिंदुओं के साथ क्या हुआ, इस बात पर सोचने की फिक्र किसी को नहीं हुई। जबकि यह सवाल बेहद अहम है कि आखिर इस धार्मिक मौके पर इंदौर में 35 से अधिक लोगों के मर जाने के लिए जिम्मेदार कौन है? इन श्रद्धालुओं ने मंदिर पर हुई भगदड़ में अपनी जान गंवाई। यह भी गौरतलब है कि दर्जनों लाशों का अंतिम संस्कार मंदिर के पास ही कर दिया गया। यह हादसा तब हुआ जब राम नवमी मनाने के लिए मंदिर आए हुए लोगों की भीड़ का वजन मंदिर की बावड़ी की छत बर्दाश्त नहीं कर पाई। छत ढह गई, जिससे दर्जनों लोग करीब 25 फुट नीचे बावड़ी के अंदर पानी में गिर गए थे। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। अब सामने आया यह तथ्य गौरतलब है कि पिछले साल नगरपालिका ने शहर की सभी बावड़ियों का सर्वेक्षण करवाया था और उसी समय इस मंदिर की बावड़ी की खतरनाक हालत नगरपालिका की नजर में आई थी।

सर्वेक्षण में पाया गया था कि मंदिर प्रशासन ने बावड़ी के ऊपर लोहे की एक जाली लगवा कर उस पर टाइलें लगवा दी थीं और उसे बंद करवा दिया था। नगरपालिका ने इसे अवैध निर्माण बताते हुए मंदिर के ट्रस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। तब ट्रस्ट ने जवाब में इन निष्कर्षों को आधारहीन बताते हुए कहा था कि बावड़ी के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है और जल्द ही उसे खोल दिया जाएगा। ट्रस्ट ने नगरपालिका से यह भी कहा कि नोटिस से “हिंदू भावनाएं आहत हो रही हैं और यह हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाओं को भड़काने का प्रयास है।” वही कथित हिंदू भावनाएं हिंदुओं के लिए जानलेवा बन गई। अब प्रश्न है कि क्या जिन लोगों ने हिंदू भावनाओं की दलील देकर हिंदुओं की जान की परवाह नहीं की, उन पर कोई कार्रवाई की जाएगी? या ऐसी कार्रवाई से भी ‘हिंदू भावनाएं’ आहत होंगी? सवाल यह भी है कि क्या उन नगरपालिका अधिकारियों तक कानून के हाथ पहुंचेंगे, जो जिन्होंने- चाहे जिन कारणों से- अपने दायित्व को नहीं निभाया?

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