नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जैसे जैसे समय बीत रहा है वैसे वैसे सुरंगों में फंसे और मलबों में दबे लोगों के बचने की संभावना कम होती जा रही है। सोमवार, 31 अगस्त की शाम तक आए आंकड़ों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ कर 955 हो गया है। अकेले नेपाल में 939 मौते हुई हैं, जबकि तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 है। बाढ़ में बहे लोगों के 17 शव उत्तर प्रदेश में गंडक नदी से बरामद किए गए हैं।
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, अब 3,925 लोग लापता हैं। इससे पहले बताया गया था कि 4,247 लोग लापता हैं। गौरतलब है कि चीन पर आरोप लग रहे हैं कि उसने समय रहते सूचना नहीं दी। अब भी उस पर आंकड़े छिपाने के आरोप लग रहे हैं। इन आरोपों के बीच चीन ने सफाई दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने बाढ़ से 12 दिन पहले ही नेपाल को ईमेल भेजकर भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की चेतावनी दी थी।
गौरतलब है कि 27 मई को काठमांडू में दोनों देशों की मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों पर बैठक हुई थी। इसमें नेपाल ने ग्लेशियरों में शुरुआती हलचल और संभावित खतरे की जानकारी पहले देने की मांग की थी। नेपाल का आरोप है कि चीन भारी बारिश का अनुमान तो देता है, लेकिन हिमस्खलन, पानी के स्तर, भूस्खलन और दूसरे बड़े प्राकृतिक खतरों की जानकारी साझा नहीं करता। बताया जा रहा है कि 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ की सूचना चीन को पहले मिली थी। ग्लेशियर टूटते ही उसको जानकारी हो गई थी। अगर उसने जानकारी साझा की होती तो सैकड़ों लोगों की जान बच सकती थी।
