नई दिल्ली। दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा खतरनाक श्रेणी में पहुंच गई है। शुक्रवार को दिल्ली में कई जगहों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई पांच सौ के करीब दर्ज किया गया। दिल्ली आईआईटी के पास यह 472 थी तो रोहिणी में 475 पहुंच गई। शुक्रवार की सुबह ही दिल्ली का औसत एक्यूआई चार सौ करीब दर्ज हुआ। इसके बाद राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाके में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप का तीसरा चरण लागू कर दिया गया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पाबंदी लगाने से प्रदूषण कम नहीं होगा।
ग्रैप का तीसरा चरण लागू होने के बाद दिल्ली व एनसीआर में नया निर्माण, तोड़फोड़, खुदाई, प्लास्टर, टाइल्स आदि का काम पूरी तरह से बंद रहेगा। इसके साथ ही ‘बीएस फोर’ या उससे नीचे के मानक वाले डीजल वाहन और ‘बीएस थ्री’ या उससे नीचे के मानक वाले पेट्रोल वाहन नहीं चल सकेंगे। साथ ही पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से हाइब्रिड मोड में होगी। यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से कक्षाएं चलेंगी। ये पाबंदियां दिल्ली के साथ ही नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत में भी लागू होंगी।
असल में शुक्रवार की सुबह से दिल्ली में चारों तरफ धुंध छाई रही। प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा और शहर का औसत एक्यूआई 391 दर्ज किया गया। दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 30 पर शुक्रवार सुबह नौ बजे एक्यू चार सौ के पार यानी गंभीर श्रेणी में पहुंच गया था। बाकी केंद्रों पर भी हवा की हालत बहुत खराब थी। रोहिणी में सबसे ज्यादा एक्यूआई 475 दर्ज किया गया।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई हुई। इस पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सिर्फ पाबंदी लगाने से प्रदूषण की स्थिति में सुधार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में दायिर याचिका में मांग की गई है कि एक्यूआई एक तय स्तर से ऊपर पहुंचने पर सभी उम्र के बच्चों के लिए स्कूल बंद कर दिए जाएं या हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराई जाए। इस पर अदालत ने कहा कि वह विशेषज्ञों की राय के आधार पर फैसला करेगी।
