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अमित शाह संसद में जवाब देंगे!

New Delhi, Jul 29 (ANI): Union Home Minister Amit Shah speaks on Operation Sindoor in the Lok Sabha during the Monsoon Session of Parliament, in New Delhi on Tuesday. (Sansad TV/Ani Video Grab)

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र समापन की ओर बढ़ रहा है और अभी तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों में से किसी भी सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए हैं। इसे लेकर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां लगातार हमलावर हैं। मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन सोमवार को प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अनेक नेता प्लेकार्ड हाथ में लेकर संसद परिसर में खड़े थे, जिस पर 21 जुलाई से लेकर अभी तक की तारीख लिखी थी और अमित शाह के नाम के आगे ‘एब्सेंट’ लिखा हुआ था।

लोकसभा के अंदर भी विपक्षी सांसदों ने यह मुद्दा उठाया। इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि अमित शाह संसद में जवाब देंगे लेकिन विपक्ष को बिना शोर शराबे के उनकी बात सुननी होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि शाह सदन में विस्तार से जवाब देंगे लेकिन विपक्ष को भरोसा देना होगा कि वह बहस से भागेगा नहीं। उन्हें गृह मंत्री का जवाब बिना हंगामा किए सुनना पड़ेगा। हालांकि शाह कब बोलेंगे, रिजिजू ने इसकी जानकारी नहीं दी है।

उधर जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, ‘जंतर मंतर पर कोई गोली नहीं चली। राहुल गांधी भ्रम फैला रहे हैं। गृह मंत्री हर बात का जवाब देने को तैयार, आप चर्चा से मत भागिएगा’। इस बीच सोमवार को लोकसभा में चार अहम बिल पेश किए गए। इनमें ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026, माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल, 2026 शामिल हैं। इसके अलावा केरल का नाम केरलम करने का बिल भी पेश किया गया। लोकसभा ने ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया। इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित कर दी गई।

संसद ने सोमवार को टैक्सेशन और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि इस कानून में यूपीआई पर कोई टैक्स या ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं लगाया गया है। लोकसभा से पिछले सप्ताह पारित विधेयक को राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा और वित्त मंत्री के जवाब के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इससे पहले सोमवार की सुबह कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में जारी गतिरोध पर चिंता जताई। उन्होंने सदन के नेताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि जनता की आवाज सदन में सुनी जानी चाहिए। प्रश्नकाल चलने दें और अहम बिलों पर चर्चा करें।

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