Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

गिनती में तैनात होंगे केंद्रीय कर्मचारी

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि अगर चुनाव आयोग ने वोटों की गिनती में काउंटिंग की टेबल पर केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती का फैसला किया है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा, ‘चुनाव आयोग को कोई आदेश नहीं दे सकते है। यह चुनाव आयोग का अधिकार है उन पर भरोसा करें’।

हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा है कि उन्हें चुनाव आयोग से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने काउटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ पहले कलकत्ता हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने आपत्ति खारिज करते हुए कहा था कि मतगणना के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसमें कोई अवैधता नहीं है। बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरण में चुनाव हुए हैं। नतीजा चार मई को आएगा।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 13 अप्रैल को एक सरकुलर जारी किया था, जिसके अनुसार मतगणना की हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या सार्वजनिक उपक्रम यानी पीएसयू का होना अनिवार्य है। तृणमूल का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी भाजपा के प्रभाव में काम कर सकते हैं। इसलिए राज्य सरकार के कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाए। टीएमसी ने यह शिकायत चुनाव आयोग से भी की थी।

बहरहाल, वोटों की गिनती सोमवार को होने वाली है इसलिए शनिवार छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई हुई। इसमें कपिल सिब्बल ने कहा, ‘मुख्य चुनाव अधिकारी के पत्र में कहा गया है कि मतगणना में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। यह सीधे तौर पर राज्य सरकार पर उंगली उठाने जैसा है। अगर ऐसी आशंका है, तो उसका कोई ठोस डेटा होना चाहिए। हर बूथ के लिए यह आशंका कहां से आई? यह जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? अगर केंद्र सरकार के अधिकारियों को लगाया जा रहा है, तो हमें पहले से बताया क्यों नहीं गया’?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों के कर्मचारी सरकारी कर्मचारी हैं और वे उसी रूप में काम करेंगे। अदालत ने कहा, ‘यहां एक गलतफहमी है। यह मानना सही नहीं है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग अलग तरह के होते हैं। दरअसल, दोनों ही सरकारी कर्मचारी हैं’। इसके बाद अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से जारी सरकुलर लागू होगा।

Exit mobile version